Category: शिक्षा

  • भारत की नवरत्न और महारत्न का दर्जा प्राप्त कम्पनियाँ

    भारत की नवरत्न और महारत्न का दर्जा प्राप्त कम्पनियाँ

    नवरत्न का दर्जा केन्द्रीय लोक उद्यम विभाग द्वारा दिया जाता है! 1997 में यह दर्जा मूलतः नौ कंपनियों के लिए ही सृजित किया गया था! कालांतर में यह संख्या बढ़ती गई! 2009 में केन्द्रीय मंत्रिमंडल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए महारत्न दर्जे का सृजन करने का निर्णय लिया! यह दर्जा उन कंपनियों को मिलेगा, जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में औसतन 5 हजार करोड़ रूपये का शुद्ध मुनाफा कमाया हो, साथ ही तीन वर्षों में औसत सालाना टर्नओवर 25 हजार करोड़ को हो तथा विदेशों में भी कारोबार होने अन्य और कई शर्तें हैं महारत्न का दर्जा मिलने के लिए!

     

    नवरत्न कम्पनी :

     नवरत्न कम्पनियाँ
    स्थापना वर्ष
    मुख्यालय
     भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL)
    1962 नई दिल्ली
     भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (BPCL)
    1976 मुंबई
     हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (HPCL)
    1976 मुंबई
     इंडियन आयल कारपोरेशन (IOC)
    1964 नई दिल्ली
     महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL)
    1986 नई दिल्ली

    और पढ़ें : भारत के राष्ट्रीय चिह्न, प्रतिक, ध्वज, राष्ट्रगान

     

     तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC)
    1956
    देहरादून
     राष्ट्रीय ताप विद्युत् निगम (NTPC)
    1975 नई दिल्ली
     भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (SAIL)
    1974 नई दिल्ली
     भारतीय गैस प्राधिकरण लिमिटेड (GAIL)
    1984 नई दिल्ली
     भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)
    1954 बंगलौर
     हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)
    1940 बंगलौर

     

     पॉवर फाइनेंस कारपोरेशन (PFC)
    1986
    नई दिल्ली
     राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NDMC)
    1950 हैदराबाद
     पॉवर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (PGCIL)
    1989 नई दिल्ली
     ग्रामीण विद्युतीकरण निगम लिमिटेड (REC)
    1969 नई दिल्ली
     नेशनल एल्युमिनियम कंपनी (NALCO)
    1981 ओडिशा
     भारतीय नौवहन निगम (SCI)
    1961 मुंबई

    और पढ़ें : भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन संबंधित प्रमुख संगठन एवं संस्थाएं

     

     कोल इंडिया लिमिटेड (CIL)
    1975
    कोलकाता
     राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL)
    1982 विशाखापत्तनम
     आयल इंडिया लिमिटेड (OIL)
    1959 डुलियाजन
     निवेली लिग्नाइट कारपोरेशन (NLC)
    1956 चेन्नई

     

    महारत्न कम्पनियाँ :

     राष्ट्रीय ताप विद्युत् निगम (NTPC)
     –
     तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC)
     भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (SAIL)
     भारतीय तेल निगम (IOC)
     कोल इंडिया लिमिटेड
     भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड
    गैस अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड

     

    उम्मीद है ये रोचक पोस्ट आपको जरुर पसंद आया होगा! पोस्ट को पढ़ें और शेयर करें (पढाएं) तथा अपने विचार, प्रतिक्रिया, शिकायत या सुझाव से नीचे दिए कमेंट बॉक्स के जरिए हमें अवश्य अवगत कराएं! पुराने पोस्ट से संबंधित प्रतिक्रिया आप हमसे हमारे  ट्विटर  और  फेसबुक  पर जुड़कर शेयर कर सकते हैं!

  • विभिन्न यंत्रों और उपकरणों के आविष्कारक और उनके देश

    विभिन्न यंत्रों और उपकरणों के आविष्कारक और उनके देश

    विज्ञान, यंत्र और भौतिकी के आविष्कार और आविष्कारक के इस सूची में आविष्कार, आविष्कारक, वर्ष और संबंधित देश के नाम दिए गए हैं।

     

     उपकरण आविष्कारक
    देश
    वर्ष
     बैरोमीटर
    टोरसेली इटली 1644
     विद्युत् बैटरी
    अलेसांद्रो वोल्टा इटली 1800
     बाइसिकल के मैकमिलन स्कॉटलैंड 1839
     बाइसिकल टायर
    जॉन डनलप ब्रिटेन 1888
     बाई फोकल लेंस
    बेंजामिन फ्रेंकलिन यु एस ए 1780

     

     बुन्सन बर्नर
    राबर्ट बुन्सन
    जर्मनी
    1855
     कंप्यूटर चार्ल्स बेवेज ब्रिटेन 1834
     केस्कोग्राफ जे सी बोस भारत 1928
     कॉस्मिक किरणें
    विक्टर हेस ऑस्ट्रिया 1912
     कार्बन पेपर
    राल्फ वेजवुड इंग्लैंड 1806
     कार (वाष्प)
    निकोलस कुगनाट फ्रांस 1769

    और पढ़ें : कौन सी बीमारी में किस डॉक्टर को दिखाते हैं

     

     कार (आतंरिक दहन)
    सैमुअल ब्राउन
    ब्रिटेन
    1826
     कार (पेट्रोल)
    कार्ल बेंज जर्मनी 1885
     कार्बुरेटर जी डैमलर जर्मनी 1876
     कताई मशीन
    सैमुअल क्राम्पटन ब्रिटेन 1779
     कारपेट स्वीपर
    मेलविल बिसेल यु एस ए 1876
     क्रोनोमीटर जॉन हैरिसन जर्मनी 1735

     

     घड़ी (यांत्रिक)
    आई सिंह व लियांग सैन
    चीन
    1725
     घड़ी (पेंडुलम)
    क्रिश्चियन ह्युगेंस नीदरलैंड 1656
     डीजल इंजन
    रुडोल्फ डीजल जर्मनी 1895
     डायनेमो माइकल फैराडे इंग्लैंड 1831
     डेंटल प्लेट
    ऐन्थोनी प्लेट्सन यु एस ए 1817
     डिस्क ब्रेक
    एफ लेचेस्टर ब्रिटेन 1902

     

     डी सी मोटर
    जेनोबे ग्रामे
    बेल्जियम
    1873
     इलेक्ट्रो मैगनेट
    विलियम स्टारजन ब्रिटेन 1824
     ए सी मोटर
    निकोला टेसला यु एस ए 1888
     फिल्म (मूक)
    लुई ली प्रिंस यु एस ए 1855
     फिल्म (वाक)
    जे मुसली व हैंस वागट जर्मनी 1922
     फिल्म (संगीत युक्त)
    ली डी फ़ॉरेस्ट यु एस ए 1923

    और पढ़ें : राज्य की कार्यपालिका, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और व्यवस्थाएँ

     

     फाउंटेनपेन
    लेविस वाटरमैन
    यु एस ए
     1884
     गैल्वेनोमीटर एंड्रे मेरी एम्पियर फ्रांस 1834
     गैस लाइटिंग
    विलियम मरडॉक ब्रिटेन 1792
     ग्लाइडर
    जॉर्ज कैले ब्रिटेन 1853
     ग्रामोफोन थॉमस अल्वा एडिसन यु एस ए 1878
     जाइरो कंपास
    सर अल्पर स्पेरी यु एस ए 1911

     

     गीगर काउंटर
    हैंस गीगर
    जर्मनी
    1913
     गैस फायर
    फिलिप लेबन फ्रांस 1799
     लाउडस्पीकर होरेस शार्ट ब्रिटेन 1900
     लॉगरिथम जॉन नेपियर स्कॉटलैंड 1614
     नियोन लैंप
    जॉर्ज क्लाड फ्रांस 1910
     नायलॉन
    डॉ वालेस कैरायर्स अमेरिका 1937

     

     सेफ्टी पिन
    वाल्टर हंट
    यु एस ए
    1849
     स्काच टेप
    रिचर्ड ड्र यु एस ए 1930
     स्वतः चालक
    चार्ल्स कैटरिंग यु एस ए 1911
     स्लाइड पैमाना
    विलियम ओफट्रेंड ब्रिटेन 1621
     स्काईस्क्रेपर
    विलियम जेनी यु एस ए 1882
     स्टील हेनरी बेसेमर ब्रिटेन 1855

     

     सुपर कंडक्टीवीटी
    एच के ओनेस
    नीदरलैंड
    1911
     स्टीम इंजन (कंडेंसर)
    जेम्स वाट स्कॉटलैंड 1769
     स्टीम इंजन (पिस्टन)
    धाम न्युकोमेन ब्रिटेन 1712
     सेलुलाइड
    अलेक्जेंडर पार्क ब्रिटेन 1861
     सेफ्टी मैच
    जान वाकर ब्रिटेन 1826
     सेफ्टीलैंप
    हम्फ्रेडेवी ब्रिटेन 1816

     

     सीमेंट (पोर्टलैंड)
    जोसेफ अरगडीन
     ब्रिटेन 1824
     सिनेमा लाउस निकोलस व लाउस लुमियारी फ्रांस 1895
     ट्रैक्टर राबर्ट फॉरमिच यु एस ए 1892
     टैंक अर्नेस्ट स्वीटन ब्रिटेन 1914
     टेलीग्राफ (यांत्रिक)
    एम लैमांड फ्रांस 1787
     टेलीग्राफ कोड
    सैमुअल मोर्स यु एस ए 1837

     

     टेलीफोन ग्राहम बेल
    यु एस ए
    1876
     टेलीविजन (यांत्रिक)
    जे एल बेयर्ड ब्रिटेन 1926
     टेलीविजन (इलेक्ट्रॉनिक)
    टेलर फारन्सवर्थ यु एस ए 1927
     ट्रांजिस्टर जॉन बरडीन, विलियम शाकले व वाल्टर बर्टन यु एस ए 1948
     टाइपराइटर
    पेलेग्रीन टैरी इटली 1808
     थर्मामीटर
    फ़ॉरेनहाईट जर्मनी 1714

     

     ट्रांसफर्मर माइकल फैराडे
    ब्रिटेन
    1831
     वाशिंग मशीन
    हार्ले मिशन कंपनी यु एस ए 1907
     वेल्डिंग मशीन (विद्युत्)
    एलिसा थोमसन यु एस ए 1877
     पनडुब्बी डेविड बुसनेल यु एस ए 1776
     विद्युत् पंखा
    ह्वीलर यु एस ए 1776
     हेलीकाप्टर (प्रारूपिक)
    लाउन्वाय एवं बियेन्वेनू फ्रांस 1784

     

     हेलीकाप्टर (मानव चालित)
    ममफोर्ड

    1905
     होवरक्राफ्ट
    क्रिस्टोफर कांकरेल ब्रिटेन 1955
     मशीन गन
    जेम्स पकल ब्रिटेन 1718
     माइक्रोप्रोसेसर
    एम ई हौफ यु एस ए 1971
     माइक्रोस्कोप
    जेड जानसेन नीदरलैंड 1590
     मोटर साइकिल
    जी डैमलर जर्मनी 1885

    और पढ़ें : भारत के संविधान में केंद्र राज्य संबंध का वर्णन

     

     माइक्रोफोन
    ग्राहम बेल
    यु एस ए
    1876
     पेनिसिलिन एलेक्जेंडर फ्लेमिंग इंग्लैंड 1928
     प्रेशर कुकर
    डेनिस पैपिन इंग्लैंड 1679
     पेपर मुलबेरी चीन 105
     पैरासूट जीन पियरे क्लानचार्ड फ्रांस 1795
     प्लास्टिक अलेक्जेंडर पार्कस ब्रिटेन 1862

     

     प्रोपेलर (जलयान)
    फ्रांसिस स्मिथ
    ब्रिटेन
    1837
     प्रिंटिंग प्रेस
    जॉन गुटेनबर्ग जर्मनी 1455
     पाश्चुरिकरण लुई पाश्चर फ्रांस 1867
     रडार रोबर्ट वाटसन वाट स्कॉटलैंड 1930
     रेडियो टेलीग्राफी
    डेविड एडवर्ड ह्यूज ब्रिटेन 1879
     रेडियो टेलीग्राफी
    मार्कोनी इटली 1901

     

     रेजर (विद्युत्)
    जैकब शिक
    यु एस ए
    1931
     रेजर (सेफ्टी)
    किंग जिलेट यु एस ए 1895
     रेफ्रिजरेटर हैरिसन व टिनिंग यु एस ए 1850
     रबर (पौधों का दूध) फोम
    डनलप रबर कम्पनी ब्रिटेन 1928
     रबर (टायर)
    थॉमस हॉनकाक ब्रिटेन 1846
     रबर (जलरोधी)
    चार्ल्स मैकिंटोस ब्रिटेन 1823

     

     रबर (वल्कनीकृत)
    चार्ल्स गुडइयर
    यु एस ए
     1841
     रिवाल्वर सैमुअल कोल्ट यु एस ए 1935
     लेसर थियोडोर मेमैन यु एस ए 1960
     लिफ्ट (यांत्रिक)
    इलिसा ओटिस यु एस ए 1852
     लाइटिंग कंडक्टर
    बेंजामिन फ्रेंक्लिन यु एस ए 1737
     लोकोमोटिव (रेल)
    रिचर्ड ट्रेकिथिक ब्रिटेन 1804

     

     थर्मस फ्लास्क
    डेवार
    यु एस ए
    1714
     माइक्रोमीटर विलियम कोजिन ब्रिटेन 1636
     जेट इंजन
    फ्रेंक ह्विटल ब्रिटेन 1937
     सौर मंडल
    कॉपरनिकस पोलैंड 1540
     ग्रहों की खोज
    केपलर जर्मनी 1601
     स्कूटर जी ब्राडशा ब्रिटेन 1919

     

    भौतिकी संबंधी महत्वपूर्ण खोज :

     खोज वैज्ञानिक
    वर्ष
     परमाणु जॉन डाल्टन 1808
     परमाणु संरचना
    नील वोहर व रदरफोर्ड 1913
     गति विषयक नियम
    न्यूटन 1687
    रेडियो एक्टिवता
    हेनरी बेकरल 1896
     रेडियम मैडम क्युरी 1898

     

     सापेक्षता का सिद्धांत
    अल्बर्ट आइन्स्टीन
    1905
     विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण
    माइकल फैराडे 1831
     रमन प्रभाव
    सी वी रमण 1928
     एक्स (X किरणें)
    विल्हेम रॉन्टन 1895
     क्वांटम सिद्धांत
    मैक्स प्लांक 1900
     प्रकाश विद्युत् प्रभाव
    अल्बर्ट आइन्स्टीन 1905

     

     विद्युत् आकर्षण के नियम
    कुलम्ब
    1779
     फोटोग्राफी (धातु में)
    जे निप्से 1826
     फोटोग्राफी (कागज में)
    फाक्स टालबोट 1835
     फोटोग्राफी (फिल्म में)
    जान कारबट 1888
     आवर्त सारणी
    मैंडलीफ 1869
     विद्युत् प्रतिरोध के नियम
    जी एस ओम 1827

     

     

     तैरने के नियम
    आर्कमिडीज
    _
     तापायनिक उत्सर्जन
    एडिसन
     डायोड बाल्व
    जे एस फ्लेमिंग 1904
     ट्रायोड बाल्व
    ली डी फोरेस्ट 1907
     नाभकीय रिएक्टर
    एनरीको फर्मी 1942
     बेतार का तार
    मार्कोनी 1901
    विद्युत् अपघटन के नियम
    फैराडे

     

    पढ़ें : कौन सी बीमारी में किस विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाते हैं!

     

    उम्मीद है ये रोचक पोस्ट आपको जरुर पसंद आया होगा! पोस्ट को पढ़ें और शेयर करें (पढाएं) तथा अपने विचार, प्रतिक्रिया, शिकायत या सुझाव से नीचे दिए कमेंट बॉक्स के जरिए हमें अवश्य अवगत कराएं! पुराने पोस्ट से संबंधित प्रतिक्रिया आप हमसे हमारे  ट्विटर  और  फेसबुक  पर जुड़कर शेयर कर सकते हैं!

  • जीवधारियों के वैज्ञानिक नाम, चिकित्सा संबंधी अविष्कार एवं उपकरण

    जीवधारियों के वैज्ञानिक नाम, चिकित्सा संबंधी अविष्कार एवं उपकरण

    कुछ जीवधारियों के वैज्ञानिक नाम :

    जीवधारी
    वैज्ञानिक नाम
     मनुष्य (Man)
     Homo Sapiens
     मेंढक (Frog)
    Rana Tigrina
     गाय (Cow)
    Bos Indicus
     मक्खी (Housefly)
    Musca Domestica
     आम (Mango)
    Mangifera indica
     धान (Rice)
    Oryza sativa

     

    गेंहू (Wheat)
     Triticum aestivum
    मटर (Pea)
    Pisum sativum
    चना (Gram)
    Cicer arietinum
    सरसों (Mustard)
    Brassica campestris
    बिल्ली (Cat)
    Felis domestica
    कुत्ता (Dog)
    Canis familiaris

     

    चिकित्सा संबंधी अविष्कार :

     आविष्कार  आविष्कारक
     विटामिन डी
    हॉपकीन्स
     विटामिन बी
    मैकुलन
     स्ट्रैपटोमाइसिन
    बॉम्समैन
     विटामिन फंक
     होम्योपैथी
    हैनीमैन
     ओपन हार्ट सर्जरी
    वाल्टललिलेहल
     प्रथम परखनली शिशु
    एडवर्ड एवं स्टेप्टो

    और पढ़ें : जीवविज्ञान की कुछ प्रमुख शाखाएँ

     

     एंटीजन लैडस्टीनर
     क्लोरोफार्म हैरिसन तथा सिम्पसन
     टेरामाइसिन
    फिनेल
     डायबिटीज बेटिंग
     पोलियो वैक्सीन
    जॉन इ साल्क
     बैक्टेरिया ल्युवेन्हॉक
     आर एन ए
    जेम्स वाटसन तथा आर्थर अर्ग
    मलेरिया परजीवी व चिकित्सा
    रोनाल्ड रॉस

     

     विटामिन ए
    मैकुलन
     विटामिन सी
    होल्कट
     सल्फा ड्रग्स
    डागमैंक
     हृदय प्रत्यारोपण
    क्रिश्चियन बर्नार्ड
     लिंग हारमोन
    स्टेनाच
     गर्भनिरोधक गोलियाँ
    पिनकस
     इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ
    आइन्योवन
     इंसुलिन बेटिंग

     

     चेचक का टीका
    एडवर्ड जेनर
     टी बी बैक्टीरिया
    रोबर्ट कोच
     पेनसिलिन अलेक्जेंडर फ्लेमिंग
     बी सी जी
    यूरिन कालमेट
     रक्त परिवर्तन
    कार्ल लैंडस्टीनर
     डी एन ए
    जेम्स वाटसन तथा क्रिक
     पेचिश तथा प्लेग की चिकित्सा
    कीटाजाटोज
     

     

    प्रमुख चिकित्सा उपकरण :

    पेसमेकर : हृदय गति कम हो जाने पर इसे सामान्य अवस्था में लाने हेतु इसका प्रयोग किया जाता है!

     

    कम्प्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन (CT Scan) : संपूर्ण शरीर में किसी असामान्य या विकृति का पता लगाने हेतु इसका प्रयोग किया जाता है!

     

    इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ : हृदय संबंधी असामान्यताओं का पता लगाने के लिए

     

    आटो एनालाइजर : ग्लूकोज, यूरिया, कोलेस्ट्रोल इत्यादि की जाँच के लिए

     

    इलेक्ट्रोइन्सेफैलोग्राफ : मस्तिष्क की विकृतियों का पता लगाने के लिए

     

    एम आर आई : मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग द्वारा संपूर्ण शरीर में असामान्य या विकृति का पुर्णतः सही पता लगाया जाता है!

     

    पढ़ें : कौन सी बीमारी में किस विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाते हैं!

     

    उम्मीद है ये रोचक पोस्ट आपको जरुर पसंद आया होगा! पोस्ट को पढ़ें और शेयर करें (पढाएं) तथा अपने विचार, प्रतिक्रिया, शिकायत या सुझाव से नीचे दिए कमेंट बॉक्स के जरिए हमें अवश्य अवगत कराएं! पुराने पोस्ट से संबंधित प्रतिक्रिया आप हमसे हमारे  ट्विटर  और  फेसबुक  पर जुड़कर शेयर कर सकते हैं!

  • कौन सी बीमारी में किस विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाते हैं

    कौन सी बीमारी में किस विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाते हैं

    आयुर्विज्ञान ने आज इतनी तरक्की कर ली है की इसमें आज इतनी विविध शाखाएँ हो गई हैं कि कई बार यह तय कर पाना मुश्किल हो जाता है कि किस तकलीफ के लिए किस विशेषज्ञ डॉक्टर के पास जाया जाए। हम किस बीमारी के इलाज के लिए किस डॉक्टर के पास जाएँ, उसके बारे में इतना ज्ञात हो कि वह किस विषय का ज्ञाता है, तो फिर आप आसानी से डॉक्टर का चुनाव कर पाएंगे।

     

    जनरल फिज़ीशियन (General Physician) : जो छोटे-मोटे हर किस्म के मर्ज का इलाज करता है। इसके लिए उसका कम से कम मेडिकल ग्रेजुएट (एम.बी.बी.एस.) होना जरूरी है। ध्यान रहे कि इस देश में कई नीम-हकीम भी अपने को जनरल फिज़ीशियन लिखने से बाज नहीं आते। जब मामला पेचीदा हो जाता है तो जनरल फिजिशियन ही इलाज के लिए विशेषज्ञ के पास भेजता है, या स्पेशलिस्ट से कंसल्ट करने का सुझाव देता है। अलग-अलग विशेषज्ञ अपने-अपने विषय के ज्ञाता होते हैं। उनकी निपुणता उनके प्रशिक्षण और अनुभव पर आधारित होती है। मेडिकल ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने किसी एक खास चिकित्सा शाखा में अध्ययन किया होता है और अनुभव हासिल किया होता है। उनकी दक्षता (Efficiency) किस विषय में है, इसे व्यक्त करने के लिए अलग-अलग शब्दावली काम में लाई जाती है। जैसे –

     

    एनेस्थीसियॉलजिस्ट (Anaesthesiologist) : एनेस्थीसिया देने वाला डॉक्टर। ऑपरेशन के समय यह न सिर्फ रोगी को संवेदनाहारी देता है बल्कि उसके जीवन परी देखभाल करता है। ऑपरेशन से पहले यह रोगी की पूरी जाँच-पटना कर यह भी सुनिश्चित करता है कि रोगी आपरेशन कराने लायक तो है। ऑपरेशन के बाद भी वही रोगी की हालत पर निगरानी रखता है। गंभीर रूप से बीमार रोगी की गहन चिकित्सा कक्ष में देखरेख का दायित्व भी उसी पर होता है।

    और पढ़ें : विभिन्न यंत्रों, उपकरणों के अविष्कार, आविष्कारक और देश

     

    कार्डियॉलजिस्ट (Cardiologist) : हृदय रोग विशेषज्ञ। यानी दिल की बीमारी में मरीज की देखरेख और इलाज करने वाला डॉक्टर।

     

    कार्डियो-थोरेसिक सर्जन (Cardio Surgeon) : दिल, धमनियों, और छाती के ऑपरेशन करने वाला शल्य-चिकित्सक। चाहे बायपास सर्जरी हो, दिल या धमनियों का पैदाइशी विकार हो या दिल के वाल्व की खराबी, ऑपरेशन करने की जिम्मेवारी इसी विशेषज्ञ की होती है।

     

    गाइनिकॉलजिस्ट (Gynaecologist) : महिला रोग विशेषज्ञ, जो स्त्री-जनन-अंगों के रोगों का इलाज करता है। यही ऑबस्टेट्रिशियन की जिम्मेदारी भी पूरी करता है। और जच्चा की पूरी देख रेख करता है।

     

    चेस्ट फिजिशियन (CHEST Physician) : फेफड़ों और पूरी श्वसन प्रणाली की बीमारियों का चिकित्सक जैसे फेफड़ों का टीबी इतियादी।

     

    डर्मेटॉलजिस्ट (Dermatologist) : त्वचा के रोगों का डॉक्टर जैसे फोड़े फूंशी या त्वचा मे किसी और प्रकार की समस्या। यौन-रोगों का इलाज भी यही करता है।

     

    एंडोक्राइनॉलजिस्ट (Endocrinologist) : शरीर की हार्मोनल प्रणाली के विकारों का इलाज करने वाला विशेषज्ञ। डायबिटीज, थायरॉयड ग्रंथि, पीयूष ग्रंथि, एड्रिनल ग्रंथि के विकारों का इलाज यही विशेषज्ञ करता है। । गैस्ट्रो-एंटरॉलॅजिस्ट : शरीर की पाचक प्रणाली के अंगों का इलाज यह विशेषज्ञ करता है।

     

    नेफरॉलजिस्ट (Nephrologist) : गुर्दे की बीमारियों का इलाज करने वाला विशेषज्ञ। गुर्दे काम करना बंद कर दें तो डायलिसिस से यही मरीज के खून को साफ करता है।

     

    न्यूरॉलजिस्ट (Neurologist) : मस्तिष्क, मेरुदंड ( रीड़ की हड्डी) और तांत्रिकीय रोगों का विशेषज्ञ।

     

    न्यूरो सर्जन (Neuro Surgeon) : मस्तिष्क, मेरुदंड ( रीड़ की हड्डी) और तंत्रिकीय तंत्र (Nervous system) के रोगों और चोटा की शल्य-चिकित्सा करने वाला सर्जन।

     

    ऑप्थेल्मॉलजिस्ट (Ophthalmologist) : नेत्र रोग विशेषज्ञ जो आँखों की बीमारियों में दवा और सर्जरी से इलाज करता है

     

    ओटो-लेरिगो-राइनॉलजिस्ट (ENT Specialist) : कान-नाक-गले का चिकित्सक, या कहें ई.एन.टी. सर्जन।

     

    ऑर्थोपीडिक सर्जन (Orthopaedics Surgeon) : हड्डियों और जोड़ों की टूट-फूट, विकृतियों और रोगों की चिकित्सा और शल्य-चिकित्सा करने में निपुण होता है!

     

    रेडियॉलजिस्ट (Radiologist) : विशेषज्ञ डॉक्टर जिसकी निपुणता एक्स-रे, दवा के साथ की गई विशेष एक्स-रे जाँच, अल्ट्रासाउंड, सी.टी. स्कैन और एम. आर. आई. द्वारा रोग का सही निदान करने में होती है।

     

    रेडियोग्राफर (Radiographer) : टेक्नीशियन जो एक्स-रे, ईसीजी लेता है।

     

    ऑन्कॉलजिस्ट (Oncologist) : ट्यूमर और कैंसर चिकित्सा में विशेषज्ञ डॉक्टर। रेडियोथैरेपिस्ट विकिरण से और ऑन्कोसर्जन आपरेशन से कैंसर का इलाज करते हैं।

     

    पीडियट्रिशियन (Pediatrician) : बच्चों का इलाज करने वाला विशेषज्ञ।

     

    पीडियट्रिक सर्जन (Pediatric surgeon) : बच्चों की सर्जरी करने वाला विशेषज्ञ।

     

    प्लास्टिक सर्जन (Plastic Surgeon) : जले हुए रोगियों की चिकित्सा और किसी बाह्य अंग की रचना में सुधार और पुनर्रचना करने वाला. शल्य विशेषज्ञ। कॉस्मेटिक (सौंदर्यवर्धन) सर्जरी इसी की उप-शाखा है।

     

    पैथॉलजिस्ट (Pathologist) : ऊतकीय अध्ययन और मरीज के शरीर से लिए गए द्रव, कोशिकाओं, ऊतकों और स्राव की विधिवत जाँच कर रोग के निदान तक ले जाने वाला विशेषज्ञ चिकित्सक।

     

    साइकियाट्रिस्ट (Psychiatrist) : मन के रोगों की चिकित्सा करने वाला विशेषज्ञ।

     

    साइकॉलॅजिस्ट (Psychologist) : मनोवैज्ञानिक, जो मन को काउंसलिंग से टटोल कर मानसिक और भावनात्मक समस्याओं का समाधान सुझाता है।

     

    सर्जन (Surgeon) : शल्य विशेषज्ञ, जो ऑपरेशन द्वारा रोगी का उपचार करने में दक्ष होता है। कई उप-शाखाएँ बन जाने के कारण अब सर्जन भी अलग-अलग क्षेत्र में पारंगतता हासिल करने लगे हैं। फिर भी एक कुशल जनरल सर्जन लगभग हर किस्म की सर्जरी कर सकता है।

     

    यूरॉलॅजिस्ट (Urologist) : गुर्दे और मूत्रीय प्रणाली के अंगों का शल्य विशेषज्ञ । पुरुष जनन अंगों से जुड़ी समस्याओं का निदान भी यही करता है।

     

    गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट (Gastroenterologist) : गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट पाचन तंत्र के संक्रमण और सूजन और लिवर से जुड़ी समस्या जैसे हेपेटाइटिस, पीलिया जैसी समस्याओ का इलाज़ करने मे स्पेशलिस्ट होते हैं।

     

    पढ़ें : जीव विज्ञान की कुछ प्रमुख शाखाएँ

     

    उम्मीद है ये रोचक पोस्ट आपको जरुर पसंद आया होगा! पोस्ट को पढ़ें और शेयर करें (पढाएं) तथा अपने विचार, प्रतिक्रिया, शिकायत या सुझाव से नीचे दिए कमेंट बॉक्स के जरिए हमें अवश्य अवगत कराएं! पुराने पोस्ट से संबंधित प्रतिक्रिया आप हमसे हमारे  ट्विटर  और  फेसबुक  पर जुड़कर शेयर कर सकते हैं!

  • जीव विज्ञान की कुछ प्रमुख शाखाएँ

    जीव विज्ञान की कुछ प्रमुख शाखाएँ

     शाखाएँ
    संबंधित अध्ययन
    एपीकल्चर (Apiculture) मधुमखियों का अध्ययन
     सेरीकल्चर (Sericulture)
    रेशम किट पालन का अध्ययन
     पीसीकल्चर (Pisciculture)
    मतस्य पालन का अध्ययन
     माइकोलॉजी (Mycology)
    कवकों का अध्ययन
     एंथोलॉजी (Anthology)
    पुष्पों का अध्ययन

     

     फाइकोलॉजी (Phycology)
    शैवालों का अध्ययन
     पोमोलॉजी (Pomology)
    फलों का अध्ययन
     और्निथोलॉजी (Ornithology)
    पक्षियों का अध्ययन
     इक्थ्योलॉजी (Ichthyology)
    मछलियों का अध्ययन
     एंटोमोलॉजी (Entomology)
    कीटों का अध्ययन
     डेंड्रोलॉजी (Dendrology)
    वृक्षों एवं झाड़ियों का अध्ययन
    ओफीयोलॉजी (Ophiology)
    सर्पों का अध्ययन
    सौरोलॉजी (Saurology)
    छिपकलियों का अध्ययन
    सिल्विकल्चर (Silviculture)
    काष्ठी पेड़ों का संवर्धन

     

    विस्तार से :

     एनाटोमी (Anatomy)
    यह जीव विज्ञान की वह शाखा है, जो शरीर की आतंरिक संरचना से संबंधित है!
     एन्थ्रोपोलॉजी (Anthropology)
    यह विज्ञान की वह शाखा है जिसमें मानव के विकास, रीति रिवाज, इतिहास, परंपराओं से संबंधित विषयों का अध्ययन किया जाता है!
     एस्ट्रोलॉजी (Astrology)
    यह विज्ञान मानव के जीवन पर विभिन्न नक्षत्रों के प्रभावों का अध्ययन करता है, इसे ज्योतिषशास्त्र भी कहते हैं!
     सिरेमिक्स (Ceramics)
    यह टेक्नोलॉजी की वह शाखा है जिसमें रासायनिक यौगिकों से उपचार किया जाता है!
     एस्ट्रोनॉमी (Astronomy)
    यह खगोलीय पिंडों का अध्ययन करने वाला विज्ञान  है!
     कीमोथेरेपी (Chemotheraphy)
    यह चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जिसमें रासायनिक यौगिकों से उपचार किया जाता है!
     कॉस्मोलॉजी (Cosmology)
    यह समस्त ब्रह्माण्ड का अध्ययन करने वाली विज्ञान की एक शाखा है!
     क्रायोजेनिक्स (Cryogenics)
    यह निम्न ताप के विभिन्न प्रयोगों तथा नियंत्रणों का अध्ययन करने वाला विज्ञान है!

    और पढ़ें : विभिन्न यंत्रों उपकरणों के आविष्कार, आविष्कारक और देश

     

     इकोलॉजी (Ecology)
    यह विज्ञान वनस्पतियों तथा प्राणियों के पर्यावरण या प्रकृति से संबंधों का अध्ययन करता है!
     एन्टोमोलॉजी (Entomology)
    जंतु विज्ञान की यह शाखा कीट पतंगों का व्यापक अध्ययन करती है!
     एपिडिमियोलॉजी (Epidemiology)
    चिकित्सा विज्ञान की यह शाखा महामारी और उनके उपचार से संबधित है!
     एक्स बायोलॉजी (Ex-Biology)
    इस विज्ञान के द्वारा पृथ्वी को छोड़कर अन्य ग्रहों व उपग्रहों पर जीवन की संभावनाओं का अध्ययन किया जाता है!
     जियोलॉजी (Geology)
    भूगर्भ संबंधी अध्ययन, उसकी बनावट, संरचना आदि का अध्ययन इस विज्ञान के द्वारा किया जाता है!
     जिरोंटोलॉजी (Gerontology)
    वृद्धावस्था से संबंधित तथ्यों का अध्ययन इस विज्ञान के द्वारा किया जाता है!
     हॉर्टिकल्चर (Horticulture)
    फल फूल व साग सब्जी उगाने, बाग़ लगाने, पुष्प उत्पादन का अध्ययन इस विज्ञान के द्वारा किया जाता है!
     हाइड्रोपैथी (Hydropathy)
    इस विज्ञान के द्वारा पानी से रोगों की चिकित्सा होती है!

     

     हाइजीन (Hygiene)
    स्वास्थ्य की देखभाल करने वाला यह स्वास्थ्य का विज्ञान है!
     होलोग्राफी (Holography)
    यह लेसर पुंज की सहायता से त्रिविमीय चित्र बनाने वाली एक विधि है!
     होरोलॉजी (Horology)
    यह समय मापने वाला विज्ञान है!
     मैमोग्राफी (Maemmography)
    यह स्त्रियों में पाए जाने वाले ब्रेस्ट कैंसर की जाँच करने वाले चिकित्सा विज्ञान की शाखा है!
     मिट्रीयोलॉजी (Metreology)
    मौसम की दशाओं में होने वाली क्रियाओं तथा परिवर्तनों का अध्ययन इस विज्ञान के द्वारा किया जाता है!
     मॉर्फोलॉजी (Morphology)
    पृथ्वी पर पाए जाने वाले प्राणियों तथा पौधों की संरचना, रूप, प्रकार आदि का अध्ययन इस विज्ञान के द्वारा किया जाता है!
     न्यूरोलॉजी (Neurology)
    मानव शरीर की नाड़ियों या तंत्रिकाओं का अध्ययन तथा उपचार इस विज्ञान के द्वारा किया जाता है!
     ओडोन्टोग्राफी (Odontography)
    दांतों का अध्ययन करने वाली चिकित्सा विज्ञान की यह एक शाखा है!

     

     ऑप्टिक्स (Optics)
    प्रकाश के प्रकार एवं गुणों का अध्ययन करने वाले भौतिकशास्त्र की यह एक शाखा है!
     ओर्निथोलॉजी (Ornithology)
    इस विज्ञान में पक्षियों से संबंधित अध्ययन किया जाता है!
     ऑस्टियोलॉजी (Osteology)
    प्राणिविज्ञान की इस शाखा में हड्डियों का अध्ययन किया जाता है!
     पोमोलॉजी (Pomology)
    यह विज्ञान फलों के अध्ययन से संबंधित है!
     सिसमोलॉजी (Seismology)
    विज्ञान की इस शाखा द्वारा भूकम्पों का अध्ययन किया जाता है!
     एरोनॉटिक्स (Aeronautics)
    इस विज्ञान की शाखा के अंतर्गत वायुयान संबंधी तथ्यों का अध्ययन किया जाता है!
     एस्थेटिक्स (Asethetics)
    इस शाखा के अंतर्गत सौंदर्य शास्त्र का अध्ययन होता है!
     अग्रोस्टोलॉजी (Agrostolgy)
    यह घासों से संबंधित विज्ञान की शाखा है!

     

     अर्बोरीकल्चर (Arbori Culture)
    यह वृक्ष उत्पादन संबंधी विज्ञान की शाखा है!
     आर्कियोलॉजी (Archaeology)
    यह पुरातत्व संबंधी विज्ञान की शाखा है!
     एस्ट्रोफिजिक्स (Astrophysics)
    यह नक्षत्रों के भौतिक रूप से संबंधित खगोलीय अर्थात खगोल भौतिकी विज्ञान की शाखा है!
     कैलिस्थेनिक्स (Calisthenics)
    इस शाखा के अंतर्गत शारीरिक सौंदर्य एवं शक्तिवर्धन व्यायामों की विधियाँ संबंधी ज्ञान का अध्ययन होता है!
     कान्कोलॉजी (Conchology)
    इस शाखा के अंतर्गत शंखविज्ञान का अध्ययन किया जाता है!
     कोस्मोगोनी (Cosmogony)
    इस शाखा के अंतर्गत ब्रह्मांडोत्पत्ति सिद्धांत का अध्ययन होता है!
     कॉस्मोग्राफी (Cosmography)
    इस शाखा के अंतर्गत विश्व रचना संबंधी ज्ञान का अध्ययन होता है!
     क्रिप्टोग्राफी (Cryptography)
    इस शाखा के अंतर्गत गूढ़लेखन या बीजलेखन संबंधी ज्ञान का अध्ययन होता है!

     

     एपीग्राफी (Epigraphy)
    इस शाखा के अंतर्गत शिलालेख संबंधी ज्ञान का अध्ययन किया जाता है!
     एथनोग्राफी (Ethnography)
    इस शाखा के अंतर्गत मानव जाति का अध्ययन किया जाता है!
     इथोलॉजी (Ethology)
    इस शाखा के अंतर्गत प्राणियों का आचार व्यवहार का अध्ययन होता है!
     जियोडेसी (Geodesy)
    इस शाखा के अंतर्गत भूगणित ज्ञान का अध्ययन किया जाता है!
     जेनिकोलॉजी (Genecology)
    इस शाखा के अंतर्गत जीवों की जातियों के विभेदों का अध्ययन होता है!
     जियोमेडीशिन (Geomedicine)
    यह औषधि शास्त्र की वह शाखा है जो जलवायु तथा वातावरण का स्वास्थ्य पर प्रभाव का अध्ययन करती है!
     हिलियोथेरेपी (Heliotherapy)
    सूर्य के प्रभाव से चिकित्सा करने की प्रक्रिया है!
     हाइड्रोपोनिक्स (Hydroponics)
    इस शाखा के अंतर्गत जल संवर्धन का अध्ययन किया जाता है!

     

     हाइड्रोस्टेटिक्स (Hydrostatics)
    इस शाखा के अंतर्गत द्रवस्थैतिक का अध्ययन किया जाता है!
     लेक्सिकोग्राफी (Lexicography)
    यह शब्दकोश संकलन तथा लिखने की कला है!
     न्युमेरोलॉजी (Numerology)
    यह विज्ञान की वह शाखा है जिसमें अंकों का अध्ययन किया जाता है!
     न्युमिसमेटिक्स (Numismatics)
    उस विज्ञान की शाखा के अंतर्गत पुराने सिक्कों का अध्ययन होता है!
     फीकोलॉजी (Phycology)
    इन शाखा के अंतर्गत शैवालों का ध्ययान होता है!
     सेलिनोलॉजी (Selinology)
    इस शाखा के अंतर्गत चन्द्रमा के मूल स्वरुप तथा गति केवर्णन का अध्ययन होता है!
     सेरीकल्चर (Sericulture)
    इस शाखा के अंतर्गत रेशम के कीड़े पालन और उनसे रेशम के उत्पादन का अध्ययन होता है!
     टेलीपैथी (Telepathy)
    इस शाखा के अंतर्गत मानसिक संक्रमण की प्रक्रिया का अध्ययन होता है!
    हिप्नोलॉजी (Hypnology)
    नींद का अध्ययन
    टोक्सिकोलॉजी (Toxicology)
    इस शाखा के अंतर्गत विषों के बारे में अध्ययन होता है!

     

    पढ़ें : कौन सी बीमारी में किस विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाते हैं!

     

    उम्मीद है ये रोचक पोस्ट आपको जरुर पसंद आया होगा! पोस्ट को पढ़ें और शेयर करें (पढाएं) तथा अपने विचार, प्रतिक्रिया, शिकायत या सुझाव से नीचे दिए कमेंट बॉक्स के जरिए हमें अवश्य अवगत कराएं! पुराने पोस्ट से संबंधित प्रतिक्रिया आप हमसे हमारे  ट्विटर  और  फेसबुक  पर जुड़कर शेयर कर सकते हैं!

  • भारत संघ की राजभाषा और लिपि

    भारत संघ की राजभाषा और लिपि

    संविधान के भाग – 17 के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है! भारतीय संविधान के अनुच्छेद – 344 में राष्ट्रपति को राजभाषा से संबंधित कुछ विषयों में सलाह देने के लिए एक आयोग की नियुक्ति का प्रावधान है! राष्ट्रपति ने इस अधिकार का प्रयोग करते हुए 1955 ई० में श्री बी जी खरे की अध्यक्षता में प्रथम राजभाषा आयोग का गठन किया! इस आयोग ने 1956 ई० में अपना प्रतिवेदन दिया!

     

    संविधान की आठवीं अनुसूची के अनुसार निम्नलिखित भाषाओँ को राजभाषा के रूप में मान्यता प्राप्त है, जो इस प्रकार है – असमिया, बंगला, गुजरती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली, मैथिलि, संथाली, डोगरी, बोडो!

     

    राज्य की भाषा :

    संविधान के अनुच्छेद 345 के अधीन प्रत्येक राज्य के विधानमंडल को यह अधिकार दिया गया है की वह आठवीं अनुसूची में अंतर्विष्ट भाषाओँ में से किसी एक या अधिक को सरकारी कार्यों के लिए राज्य की सरकारी भाषा के रूप में अंगीकार कर सकता है! किंतु राज्यों के परस्पर संबंधों में संघ तथा राज्यों के परस्पर संबंधों में संघ की राजभाषा को ही प्राधिकृत भाषा माना जाएगा!

     

    उच्चतम और उच्च न्यायालयों तथा विधानमंडलों की भाषा :

    संविधान में प्रावधान किया गया है की जब तक संसद द्वारा कानून बनाकर अन्यथा प्रावधान न किया जाए, तब तक उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की भाषा अंग्रेजी होगी और संसद तथा राज्य विधानमंडलों द्वारा पारित कानून अंग्रेजी में होंगे!

    और पढ़ें : राज्य के निति निर्देशक सिद्धांत और मौलिक अधिकार

     

    उम्मीद है ये रोचक पोस्ट आपको जरुर पसंद आया होगा! पोस्ट को पढ़ें और शेयर करें (पढाएं) तथा अपने विचार, प्रतिक्रिया, शिकायत या सुझाव से नीचे दिए कमेंट बॉक्स के जरिए हमें अवश्य अवगत कराएं! पुराने पोस्ट से संबंधित प्रतिक्रिया आप हमसे हमारे  ट्विटर  और  फेसबुक  पर जुड़कर शेयर कर सकते हैं!

  • भारत के राष्ट्रीय चिह्न, प्रतिक, ध्वज, गीत, राष्ट्रगान

    भारत के राष्ट्रीय चिह्न, प्रतिक, ध्वज, गीत, राष्ट्रगान

    राष्ट्रीय प्रतिक (National Symbol) : भारत का राष्ट्रीय प्रतिक सारनाथ स्थित अशोक के सिंह स्तंभ के शीर्ष भाग की अनुकृति है! भारत सरकार ने इसे 26 जनवरी 1950 ई० को अपनाया! प्रतिक के निचे मुंडकोपनिषद में लिखा सूत्र ‘सत्यमेव जयते’ देवनागरी लिपि में अंकित है! शासकीय कार्यों में प्रयोग में लाये जाने वाले राष्ट्रीय प्रतिक अलग अलग रंग के होते हैं! नीला राष्ट्रीय प्रतिक भारत के मंत्रियों द्वारा, लाल राष्ट्रीय प्रतिक राज्य सभा के सदस्यों व अधिकारीयों द्वारा, हरा राष्ट्रीय प्रतिक लोक सभा के सदस्यों द्वारा उपयोग में लाया जाता है!

     

    राष्ट्रीय ध्वज (National Flag) : तीन पट्टियों वाला तिरंगा, गहरा केसरिया (ऊपर), सफ़ेद (बिच) और हरा रंग (सबसे निचे) है! सफ़ेद पट्टी के बिच में नीले रंग का चक्र है, जिसमें 24 तीलियाँ हैं तथा इसे सारनाथ में अशोक के सिंह स्तंभ पर बने चक्र से लिया गया है! ध्वज की लम्बाई एवं चौड़ाई का अनुपात 3:2 है! भारत के संविधान सभा ने राष्ट्र ध्वज का प्रारूप 22 जुलाई 1947 ई० को अपनाया! राष्ट्रीय ध्वज का केसरिया रंग जाग्रति, शौर्य तथा त्याग का, सफ़ेद रंग सत्य एवं पवित्रता का एवं हरा रंग जीवन समृद्धि का प्रतिक है! भारतीय ध्वज संहिता 2002 के अनुसार सभी भारतीय नागरिकों एवं निजी संस्थाओं आदि को भी राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शन का अधिकार है! जनवरी 2004 को एक महत्वपूर्ण विनिर्णय में उच्चतम न्यायालय (मुख्य न्यायाधीश बी एन खरे की अध्यक्षता में) ने यह घोषणा की की संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (अ) के अधीन राष्ट्रीय ध्वज फहराना नागरिकों का मूल अधिकार है! राष्ट्रीय ध्वज को शोक के समय झुका दिया जाता है! राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति के निधन हो जाने पर संपूर्ण देश में राष्ट्रीय ध्वज को 12 दिनों तक झुका दिया जाता है! पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व उपराष्ट्रपति के निधन हो जाने पर 7 दिनों के लिए राष्ट्रीय ध्वज को झुका दिया जाता है! भारत के राष्ट्रीय ध्वज का पहली बार प्रदर्शन 14 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि में हुआ!

     

    राष्ट्रगान (National Anthem) : रविन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित जन गण मन को संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 ई० को भारत का राष्ट्र गान स्वीकार किया! इसके गायन का समय 52 सेकंड है तथा संक्षिप्त अवधि 20 सेकंड है जिसमें इसकी प्रथम और अंतिम पंक्तियाँ गायी जाती हैं! यह सर्वप्रथम 27 दिसम्बर 1911 को भारतीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गाया गया! इसे रविन्द्रनाथ ठाकुर ने 1912 ई० में ‘तत्व बोधिनी’ में भारत भाग्य विधाता शीर्षक से प्रकाशित किया था तथा 1919 में Morning Song of India के नाम से अंग्रेजी अनुवाद किया! राष्ट्रगान के वर्तमान संगीतमय धुन बनाने का श्रेय कैप्टन राम सिंह ठाकुर (INA) को जाता है!

    और पढ़ें : संविधान द्वारा प्रदात मौलिक अधिकार एवं कर्त्तव्य

     

    राष्ट्र गीत (National Song) : बंकिमचंद्र चटर्जी के उपन्यास ‘आनंदमठ’ में उन्हीं के द्वारा रचित ‘वन्दे मातरम’ को राष्ट्र गीत के रूप में 26 जनवरी 1950 ई० को स्वीकार किया गया! इसे सर्वप्रथम 1896 ई० में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था! इस गीत को गाने का समय का 1 मिनट और पांच सेकंड है! किसी भी व्यक्ति को राष्ट्र गीत गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है! भारतीय संसद के अधिवेशन का प्रारंभ जन गण मन से और समापन वन्दे मातरम के गायन से होता है!

     

    राष्ट्रीय कैलेंडर : गिगेरियन कैलेंडर के साथ देश भर के लिए शक संवत पर आधारित राष्ट्रीय पंचांग को सरकारी प्रयोग के लिए 22 मार्च 1957 ई० को अपनाया गया! इसका पहला महिना चैत्र है! यह सामान्यतः सामान्य वर्ष में 21 मार्च को और लिप वर्ष में 22 मार्च को प्रारंभ होता है!

     

    राष्ट्रीय पुष्प : भारत का राष्ट्रीय पुष्प कमल है!

    राष्ट्रीय पक्षी : भारत का राष्ट्रीय पक्षी मयूर है!

    राष्ट्रीय पशु : भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है!

    राष्ट्रीय फल : भारत का राष्ट्रीय फल आम है!

    राष्ट्रीय वृक्ष : भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद है!

    राष्ट्रीय जल जीव : 5 अक्टूबर 2009 को डॉलफिन को राष्ट्रीय जल जीव घोषित किया गया!

    राष्ट्रीय खेल : भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी है!

     

    उम्मीद है ये रोचक पोस्ट आपको जरुर पसंद आया होगा! पोस्ट को पढ़ें और शेयर करें (पढाएं) तथा अपने विचार, प्रतिक्रिया, शिकायत या सुझाव से नीचे दिए कमेंट बॉक्स के जरिए हमें अवश्य अवगत कराएं! पुराने पोस्ट से संबंधित प्रतिक्रिया आप हमसे हमारे  ट्विटर  और  फेसबुक  पर जुड़कर शेयर कर सकते हैं!

  • भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन में वरीयता अनुक्रम

    भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन में वरीयता अनुक्रम

    भारतीय राजव्यवस्था में विभिन्न पदाधिकारियों का वरीयता अनुक्रम (Warrant of Precedence) इस प्रकार हैं –

     

    (1) राष्ट्रपति, (2) उपराष्ट्रपति, (3) प्रधानमंत्री, (4) राज्यों के राज्यपाल, अपने राज्य में, (5) भूतपूर्व राष्ट्रपति, (5 क) उप प्रधानमंत्री, (6) भारत का मुख्य न्यायाधीश तथा लोकसभाध्यक्ष, (7) केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री अपने राज्य में, योजना आयोग का उपाध्यक्ष, पूर्व प्रधानमंत्री तथा संसद के विपक्ष का नेता, (7 क) भारत रत्न सम्मान धारक, (8) राजदूत, (9) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश, (9 क) मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा भारत का नियंत्रक महालेखा परीक्षक, (10) राज्यसभा का उपसभापति, लोकसभा का उपाध्यक्ष, योजना आयोग के सदस्य तथा केंद्र में राज्यमंत्री!

    और पढ़ें : भारत के संसदीय कार्यप्रणाली सम्बंधित महत्वपूर्ण शब्दावली

     

    उम्मीद है ये रोचक पोस्ट आपको जरुर पसंद आया होगा! पोस्ट को पढ़ें और शेयर करें (पढाएं) तथा अपने विचार, प्रतिक्रिया, शिकायत या सुझाव से नीचे दिए कमेंट बॉक्स के जरिए हमें अवश्य अवगत कराएं! पुराने पोस्ट से संबंधित प्रतिक्रिया आप हमसे हमारे  ट्विटर  और  फेसबुक  पर जुड़कर शेयर कर सकते हैं!

  • राज्य की कार्यपालिका, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और व्यवस्थाएँ

    राज्य की कार्यपालिका, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और व्यवस्थाएँ

    संविधान के भाग -6 में राज्य शासन के लिए प्रावधान किया गया है! राज्य की कार्यपालिका का प्रमुख राज्यपाल होता है, वह प्रत्यक्ष रूप से अथवा अधीनस्थ अधिकारीयों के माध्यम से इसका उपयोग करता है! प्रत्येक राज्य का एक राज्यपाल होता है, लेकिन एक ही राज्यपाल एक से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है!

     

    राज्यपाल की योग्यता : राज्यपाल पद पर नियुक्ति किये जाने वाले व्यक्ति में निम्न योग्यताएं होना अनिवार्य है – (i) वह भारत का नागरिक हो (ii) वह 35 वर्ष की उम्र पूरा कर चूका हो (iii) वह राज्य विधानसभा का सदस्य चुने जाने योग्य हो!

     

    राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा पाँच वर्षों के लिए किया जाता है, परंतु यह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है! राज्यपाल को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अथवा वरिष्ठतम न्यायाधीश शपथ दिलाते हैं! राज्यपाल अपने पद की शक्तियों के प्रयोग तथा कर्तव्यों के पालन के लिए किसी न्यायालय के प्रति उतरदायी नहीं है! राज्यपाल के पदावधि के दौरान उसके विरुद्ध किसी भी न्यायालय में किसी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई नहीं प्रारंभ की जा सकती है! जब वह पद पर हो तब उसकी गिरफ़्तारी का आदेश किसी न्यायालय द्वारा जारी नहीं किया जा सकता है! राज्यपाल का पद ग्रहण करने से पूर्व या पश्चात उसके द्वारा किए गए कार्य के संबंध में कोई सिविल कार्रवाई करने से पहले उसे दो माह पूर्व सूचना देनी पड़ती है!

    और पढ़ें : भारत के संविधान में केंद्र और राज्य संबंध का वर्णन

     

    राज्यपाल की शक्तियों तथा कार्य :

    (i) राज्य के समस्त कार्यपालिका कार्य राज्यपाल के नाम से किए जाते हैं!

    (ii) राज्यपाल मुख्यमंत्री को तथा मुख्यमंत्री की सलाह से उसकी मंत्रिपरिषद के सदस्यों को नियुक्त करता है, तथा उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाता है!

    (iii) राज्यपाल राज्य के उच्च अधिकारीयों, जैसे महाधिवक्ता, राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य की नियुक्ति करता है, तथा राज्य के उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में राष्ट्रपति को परामर्श देता है!

    (iv) राज्यपाल का अधिकार है की वह राज्य के प्रशासन के संबंध में मुख्यमंत्री से सूचना प्राप्त करे!

    (v) जब राज्य का प्रशासन संवैधानिक तंत्र के अनुसार न चलाया जा रहा हो तो राज्यपाल राष्ट्रपति से राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करता है!

    (vi) राष्ट्रपति शासन के समय राज्यपाल केंद्र सरकार के अभिकर्ता के रूप में राज्य का प्रशासन चलाता है!

    (vii) राज्यपाल राज्य के विश्विद्यालयों का कुलाधिपति होता है तथा उपकुलपतियों को भी नियुक्त करता है!

     

    विधायी अधिकार :

    (i) राज्यपाल विधानमंडल का अभिन्न अंग होता है!

    (ii) राज्यपाल विधानमंडल का सत्रावसान और सत्राह्वान करता है तथा उसका विघटन करता है! राज्यपाल विधानसभा के अधिवेशन अथवा दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करता है!

    (iii) वह राज्य विधान परिषद् की कुल सदस्यों का 1/6 भाग सदस्यों को नियुक्त करता है, जिनका संबंध विज्ञान, साहित्य, कला, समाज सेवा, सहकारी आंदोलन आदि से रहता है!

    (iv) राज्य विधानसभा के किसी सदस्य पर अयोग्यता का प्रश्न उठता है, तो अयोग्यता संबंधी विवाद का निर्धारण राज्यपाल चुनाव आयोग से परामर्श करके आता है!

    (v) राज्य विधान मंडल द्वारा पारित विधेयक राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद ही अधिनियम बन पाता है!

    (vi) यदि विधानसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधि नहीं प्राप्त है, तो राज्यपाल उस समुदाय के एक व्यक्ति को विधानसभा का सदस्य मनोनीत कर सकता है! (अनुच्छेद 333)

    (vii) जब विधान मंडल का सत्र नहीं चल रहा हो और राज्यपाल को ऐसा लगे की तत्काल कार्यवाही की आवश्यकता है, तो वह अध्यादेश जारी कर सकता है, जिसे वही स्थान प्राप्त है, जो विधान मंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम का है! ऐसे अध्यादेश 6 सप्ताह के भीतर विधान मंडल द्वारा स्वीकृत होना आवश्यक है! यदि विधानमंडल 6 सप्ताह के भीतर उसे अपनी स्वीकृति नहीं देता है, तो उस अध्यादेश की वैधता समाप्त हो जाती है!

    (viii) कुछ विशिष्ट प्रकार के विधेयकों को राज्यपाल राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेजता है!

     

    वित्तीय अधिकार :

    (i) राज्यपाल प्रत्येक वित्तीय वर्ष में वित्तमंत्री को विधानमंडल के सम्मुख वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत करने के लिए कहता है!

    (ii) विधानसभा में धन विधेयक राज्यपाल की पूर्व अनुमति से ही पेश किया जाता है!

    (iii) ऐसा कोई विधेयक जो राज्य की संचित निधि से खर्च निकालने की व्यवस्था करता हो, उस समय तक विधान मंडल द्वारा पारित नहीं किया जा सकता जब तक राज्यपाल इसकी संस्तुति न कर दे!

    (iv) राज्यपाल की संस्तुति के बिना अनुदान की किसी भी मांग को विधानमंडल के सम्मुख नहीं रखा जा सकता!

    (v) राज्यपाल धन विधेयक के अतिरिक्त किसी विधेयक को पुनः विचार के लिए राज्य विधान मंडल के पास भेज सकता है! परंतु राज्य विधान मंडल द्वारा इसे दुबारा पारित किये जाने पर वह उसपर अपनी सहमति देने के लिए बाध्य होता है!

     

    न्यायिक अधिकार :

    राज्यपाल को उस विषय संबंधी, जिस विषय पर उस राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है, किसी विधि के विरुद्ध किसी अपराध के लिए सिद्ध दोष ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की अथवा दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की शक्ति प्राप्त है!

     

    राज्यपाल की स्थिति :

    यदि हम राज्यपाल के उपर्युक्त अधिकारों पर दृष्टिपात करें तो ऐसा लगता है की राज्यपाल एक बहुत शक्तिशाली अधिकारी है! किंतु वास्तविकता इससे सर्वथा भिन्न है! हमने संसदीय शासन प्रणाली को अपनाया है, जिसमें मंत्रिपरिषद विधान मंडल के प्रति उत्तरदायी होती है, अतः वास्तविक शक्तियाँ मंत्रिपरिषद विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी होती है, अतः वास्तविक शक्तियाँ मंत्रिपरिषद को प्राप्त होती है, न की राज्यपाल को! राज्यपाल एक संवैधानिक प्रमुख के रूप में कार्य करता है किंतु असाधारण स्थितियों में उसे इच्छानुसार कार्य करने के अवसर प्राप्त हो सकते हैं!

    और पढ़ें : भारत के संविधान में निर्वाचन आयोग की व्यवस्था

     

    विधानसभा : विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष है, किंतु विशेष परिस्थितियों में राज्यपाल को यह अधिकार है की वह इससे पूर्व भी उसको विघटित कर सकता है! विधानसभा के सत्रावसान के आदेश राज्यपाल के आदेश द्वारा दिए जाते हैं! विधानसभा में निर्वाचित होने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 25 वर्ष है!

     

    विधानसभा के अधिकार एवं कार्य :

    विधि निर्माण : इसे राज्य सूचि से संबधित विषयों पर विधि निर्माण का अनन्य अधिकार प्राप्त है! समवर्ती सूचि से सम्बद्ध विषयों पाए संसद की तरह राज्य विधान मंडल भी विधि निर्माण कर सकता है, किंतु यदि दोनों द्वारा निर्मित विधियों में परस्पर विरोध की सीमा तक संसदीय विधि वरणीय है!

     

    वित्तीय विषयों से संबंधित प्रक्रिया : राज्य विधान मंडल राज्य सरकार की वित्तीय अवस्था को पूर्णतया नियंत्रित करती है! प्रत्येक वर्ष के प्रारंभ में विधान मंडल के सम्मुख वार्षिक वित्तीय विवरण अथवा बजट प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें शासन की आय और व्यय का विवरण रहता है! बजट वित्त मंत्री के द्वारा रखा जाता है!

     

    कार्यपालिका पर नियंत्रण : मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी है! जब कभी मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो समूचा मंत्री परिषद् को त्यागपत्र देना पड़ता है!

     

    संवैधानिक संशोधन : संघीय स्वरुप को प्रभावित करने वाला कोई संविधान संशोधन विधेयक यदि संसद के दोनों सदनों के द्वारा पारित हो जाता है, तो आधे से अधिक राज्यों के विधान मंडलों द्वारा उसकी पुष्टि आवश्यक है!

     

    निर्वाचन संबंधी अधिकार : राष्ट्रपति के निर्वाचन में जितना मताधिकार संसद के दोनों सदनों के सदस्यों को प्राप्त है, उतना ही राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों को प्राप्त है!

     

    मुख्यमंत्री :

    मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है! साधारणतः वैसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाता है जो विधानसभा में बहुमत दल का नेता होता है! मुख्यमंत्री ही शासन का प्रमुख प्रवक्ता है और मंत्रिपरिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है! मंत्रिपरिषद के निर्णयों को मुख्यमंत्री ही राज्यपाल तक पहुंचता है! जब कभी राज्यपाल कोई बात मंत्रिपरिषद तक पहुँचाना चाहता है, तो वह मुख्यमंत्री के द्वारा ही यह कार्य करता है! राज्यपाल के सारे अधिकारों का प्रयोग मुख्यमंत्री ही करता है!

     

    उम्मीद है ये रोचक पोस्ट आपको जरुर पसंद आया होगा! पोस्ट को पढ़ें और शेयर करें (पढाएं) तथा अपने विचार, प्रतिक्रिया, शिकायत या सुझाव से नीचे दिए कमेंट बॉक्स के जरिए हमें अवश्य अवगत कराएं! पुराने पोस्ट से संबंधित प्रतिक्रिया आप हमसे हमारे  ट्विटर  और  फेसबुक  पर जुड़कर शेयर कर सकते हैं!

  • भारत के संसद की वित्तीय तथा कुछ अन्य समितियाँ

    भारत के संसद की वित्तीय तथा कुछ अन्य समितियाँ

    प्राक्कलन समिति : इस समिति में लोकसभा के 30 सदस्य होते हैं! इसमें राज्यसभा के सदस्यों को शामिल नहीं किया जाता है! समिति के सदस्यों का चुनाव प्रत्येक वर्ष अनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से किया जाता है! इसके सदस्य का कार्यकाल 1 वर्ष का होता है! प्रत्येक वर्ष मई में समिति का कार्यकाल प्रारंभ होता है तथा अगले वर्ष 30 अप्रैल को समाप्त हो जाता है! समिति का अध्यक्ष लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा मनोनीत होता है, किंतु यदि लोकसभा का उपाध्यक्ष इस समिति में चुना जाता है तो फिर वही समिति का अध्यक्ष भी चुना जाता है! यह समिति सरकारी खर्च में कैसे कमी लाई जाए, संगठन में कैसे कुशलता लाई जाए, तथा प्रशासन में कैसे सुधार किए जाएं आदि विषयों पर रिपोर्ट देती है! प्राक्कलन समिति के प्रतिवेदन पर सदन में बहस नहीं होती है, परंतु यह समिति अपना कार्य वर्ष भर करती है और अपना दृष्टिकोण सदन के समक्ष रखती है!

     

    लोक लेखा समिति : प्राक्कलन समिति की जुड़वां बहन के रूप में ज्ञात इस समिति में 22 सदस्य होते हैं जिसमें 15 सदस्य लोकसभा द्वारा तथा 7 सदस्य राज्यसभा द्वारा एक वर्ष के लिए निर्वाचित किए जाते हैं! इसे लघु लोकसभा भी कहते हैं! समिति के सदस्यों का संसद द्वारा प्रतिवर्ष आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर एकल संक्रमणीय मत प्रणाली की सहायता से चयन किया जाता है! इस समिति के अध्यक्ष का मनोनयन लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा किया जाता है तथा लोकसभा सचिवालय इस समिति के कार्यालय की भूमिका अदा करता है! 1969 में प्रथम बार श्री मीनू मसानी विरोधी दल के नेता बने, तो उन्हें लोक लेखा समिति का अध्यक्ष भी मनोनीत कर लिया गया और उसी समय से विरोधी दल के सदस्यों में से किसी सदस्य को इस समिति के अध्यक्ष मनोनीत करने की परंपरा की शुरुआत हुई! लोक लेखा समिति में राज्यसभा के सदस्यों को सह सदस्य माना जाता है तथा उन्हें मत देने का अधिकार नहीं प्राप्त है!

     

    लोक लेखा समिति के कार्य :

    1. यह समिति भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक द्वारा दिया गया लेखा परिक्षण संबंधी प्रतिवेदनों की जांच करती है!
    2. भारत सरकार के व्यय के लिए सदन द्वारा प्रदान की गई राशियों का विनियोग दर्शाने वाली लेखाओं की जांच करना!
    3. संसद द्वारा प्रदान की गई धनराशी के अतिरिक्त धनराशी को व्यय किया गया हो तो समिति उन परिस्थितियों की जाँच करती है! जिसके कारण अतिरिक्त व्यय करना पड़ा!
    4. समिति राष्ट्रपति के वित्तीय मामलों के संचालन में अप व्यय, भ्रष्टाचार, अकुशलता में कमी के किसी प्रमाण को खोज सकती है!
    5. लोक लेखा समिति अपना प्रतिवेदन लोक सभा को देती है जिससे की जो अनियमितताएं उसके ध्यान में आई है उन पर संसद में बहस हो और उन पर प्रभावी कदम उठाये जा सके!

    और पढ़ें : भारत के संविधान में निर्वाचन आयोग की व्यवस्था

     

    सरकारी उपक्रमों की समिति : इस समिति के 22 सदस्य होते हैं, जिनमें से 15 लोकसभा तथा 7 राज्यसभा द्वारा अनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत पद्धति द्वारा निर्वाचित किये जाते हैं! समिति का अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नामजद किया जाता है! इस समिति का कार्य है, सरकारी उपक्रमों के प्रतिवेदनों और लेखाओं की तथा उन पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदनों की जांच करना! तथा ऐसे विषयों की जाँच करना जो सदन या अध्यक्ष द्वारा निर्दिष्ट किये जाएं!

     

    कार्य मंत्रणा समिति : लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति में अध्यक्ष सहित 15 सदस्य होते हैं! लोकसभा का अध्यक्ष इसका पदेन अध्यक्ष होता है! राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति में इसकी सभा का सभापति इसका पदेन सभापति होता है!

     

    गैर सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा संकल्प संबंधी समिति : इसका गठन लोकसभा में किया जाता है! इस समिति में 15 सदस्य होते हैं! लोकसभा का उपाध्यक्ष इस समिति का अध्यक्ष होता है!

     

    नियम समिति : लोकसभा की नियम समिति में लोकसभा अध्यक्ष सहित 15 सदस्य होते हैं, जबकि राज्यसभा की नियम समिति में सभापति एवं उपसभापति सहित 16 सदस्य होते हैं! लोकसभा अध्यक्ष एवं राज्यसभा के सभापति अपने अपने सदन की समितियों के पदेन अध्यक्ष होते हैं!

     

    अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों की कल्याण संबंधी समिति : इसमें 30 सदस्य शामिल किये जाते हैं! इसमें 20 लोकसभा तथा 10 राज्यसभा के सदस्य होते हैं!

     

    ग्रंथालय समिति : इसमें 9 सदस्य होते हैं, लोकसभा अध्यक्ष द्वारा मनोनीत 6 सदस्य तथा राज्यसभा के सभापति द्वारा मनोनीत 3 सदस्य शामिल किये जाते हैं! इस समिति का गठन प्रत्येक वर्ष किया जाता है!

     

    उम्मीद है ये रोचक पोस्ट आपको जरुर पसंद आया होगा! पोस्ट को पढ़ें और शेयर करें (पढाएं) तथा अपने विचार, प्रतिक्रिया, शिकायत या सुझाव से नीचे दिए कमेंट बॉक्स के जरिए हमें अवश्य अवगत कराएं! पुराने पोस्ट से संबंधित प्रतिक्रिया आप हमसे हमारे  ट्विटर  और  फेसबुक  पर जुड़कर शेयर कर सकते हैं!

  • भारत के संसदीय कार्यप्रणाली से संबंधित महत्वपूर्ण शब्दावली

    भारत के संसदीय कार्यप्रणाली से संबंधित महत्वपूर्ण शब्दावली

    शून्य काल (Zero Hour) : संसद के दोनों सदनों में प्रत्येक प्रश्नकाल के ठीक बाद के समय को शून्यकाल कहा जाता है! यह 12 बजे प्रारंभ होता है और 1 बजे दिन तक चलता है! शून्यकाल का लोकसभा या राज्यसभा की प्रक्रिया तथा संचालन नियम में कोई उल्लेख नहीं है! इस काल अर्थात 12 बजे से 1 बजे तक के समय को शून्यकाल नाम समाचारपत्रों द्वारा दिया गया! इस काल के दौरान सदस्य अविलंबनीय महत्त्व के मामलों को उठाते हैं तथा इस पर तुरंत कार्यवाही चाहते हैं!

     

    सदन का स्थगन : सदन के स्थगन द्वारा सदन के काम काज को विनिर्दिष्ट समय के लिए स्थगित कर दिया जाता है! यह कुछ घंटे, दिन या सप्ताह का भी हो सकता है, जबकि सत्रावसान द्वारा सत्र की समाप्ति होती है!

     

    विघटन : विघटन केवल लोकसभा का ही हो सकता है! इससे लोकसभा का अंत हो जाता है!

     

    अनुपूरक प्रश्न : सदन में किसी सदस्य द्वारा अध्यक्ष की अनुमति से किसी विषय, जिसके संबंध में उत्तर दिया जा चूका है, के स्पष्टीकरण हेतु अनुपूरक प्रश्न पूछने की अनुमति प्रदान की जाती है!

     

    तारांकित प्रश्न : जिन प्रश्नों का उतर सदस्य तुरंत सदन में चाहता है उसे तारांकित प्रश्न कहा जाता है! तारांकित प्रश्नों का उत्तर मौखिक दिया जाता है तथा तारांकित प्रश्नों के अनुपूरक प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं! इस प्रश्न पर तारा लगाकर अन्य प्रश्नों से इसका भेद किया जाता है!

     

    अतारांकित प्रश्न : जिन प्रश्नों का उत्तर सदस्य लिखित चाहता है, उन्हें अतारांकित प्रश्न कहा जाता है! अतारांकित प्रश्न का उत्तर सदन में नहीं दिया जाता है और इन प्रश्नों के अनुपूरक प्रश्न नहीं पूछे जाते!

    और पढ़ें : भारतीय संविधान में आपात उपबंध की व्यवस्था

     

    स्थगन प्रस्ताव : स्थगन प्रस्ताव पेश करने का मुख्य उद्देश्य किसी अविलंबनीय लोक महत्व के मामले की ओर सदन का ध्यान आकर्षित करना है! जब इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है, तब सदन अविलंबनीय लोक महत्व के निश्चित मामले पर चर्चा करने के लिए सदन का नियमित कार्य रोक देता है! इस प्रस्ताव को पेश करने के लिए न्यूनतम 50 सदस्यों की स्वीकृति आवश्यक है!

     

    अल्प सूचना प्रश्न : जो प्रश्न अविलंबनीय लोक महत्व का हो तथा जिन्हें साधारण प्रश्न के लिए निर्धारित दस दिन की अवधि से कम सूचना देकर पूछा जा सकता है, उन्हें अल्पसूचना प्रश्न कहा जाता है!

     

    संचित निधि (Consolidated Fund) : संविधान के अनुच्छेद 266 में संचित निधि का प्रावधान है! संचित निधि से धन संसद में प्रस्तुत अनुदान मांगों के द्वारा ही व्यय किया जाता है! राज्यों को करों एवं शुल्कों में से उनका अंश देने के बाद जो धन बचता है, निधि में दाल दिया जाता है! राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक आदि के वेतन तथा भत्ते इसी निधि पर भारित होता है!

     

    आकस्मिक निधि (Contingency Fund) : संविधान के अनुच्छेद 267 के अनुसार भारत सरकार एक आकस्मिक निधि की स्थापना करेगी! इसमें जमा धनराशि का व्यय विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है! संसद की स्वीकृति के बिना इस मद से धन नहीं निकाला जा सकता है! विशेष परिस्थितियों में राष्ट्रपति अग्रिम रूप से इस निधि से धन निकल सकते हैं!

     

    आधे घंटे की चर्चा : जिन प्रश्नों का उत्तर सदन में डे दिया गया हो, उन प्रश्नों से उत्पन्न होने वाले मामलों पर चर्चा लोकसभा में सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार, शुक्रवार को बैठक के अंतिम आधे घंटे में की जा सकती है! राज्यसभा में ऐसी चर्चा किसी दिन, जिसे सभापति निर्धारति करे, सामान्यतः 5 बजे से 5:30 बजे के बिच की जा सकती है! ऐसी चर्चा का विषय पर्याप्त लोक महत्त्व का होना चाहिए तथा विषय हाल के किसी तारांकित, अतारांकित या अल्प सूचना का प्रश्न हो और जिसके उत्तर के किसी तथ्यात्मक मामले का स्पष्टीकरण आवश्यक हो! ऐसी चर्चा को उठाने की सूचना कम से कम तीन दिन पूर्व दी जानी चाहिए!

    और पढ़ें : भारत के संविधान में निर्वाचन आयोग की व्यवस्था

     

    अल्पकालीन चर्चाएँ : भारत में इस प्रथा की शुरुआत 1953 ई० के बाद हुई! इसमें लोक महत्व के प्रश्न पर सदन का ध्यान आकर्षित किया जाता है! ऐसी चर्चा के लिए स्पष्ट कारणों सहित सदन के महासचिव को सूचना देना आवश्यक होता है! इस सूचना पर कम से कम दो अन्य सदस्यों के हस्ताक्षर होना भी आवश्यक है!

     

    विनियोग विधेयक : विनियोग विधेयक में भारत की संचित निधि पर भारित व्यय की पूर्ति के लिए अपेक्षित धन तथा सरकार के खर्च हेतु अनुदान की मांग शामिल होती है! भारत की संचित निधि में से कोई धन विनियोग विधेयक के अधीन ही निकाला जा सकता है!

     

    लेखानुदान : जैसा की विदित है, विनियोग विधेयक के पारित होने के बाद ही भारत की संचित निधि से कोई रकम निकली जा सकती है, किंतु सरकार को इस विधेयक के पारित होने के पहले भी रुपयों की आवश्यकता हो सकती है! अनुच्छेद 116 (क) के अंतर्गत लोकसभा लेखा अनुदान (Vote on Account) पारित कर सरकार के लिए अग्रिम राशि मंजूर कर सकती है, जिसके बारे में बजट विवरण देना सरकार के लिए संभव नहीं है!

     

    वित्त विधेयक (Finance Bill) : संविधान का अनुच्छेद – 112 वित्त विधेयक को परिभाषित करता है! जिन वित्तीय प्रस्तावों को सरकार आगामी वर्ष के लिए सदन में प्रस्तुत करती है, उन वित्तीय प्रस्तावों को मिलाकर वित्त विधेयक की रचना होती है! सामान्यतः वित्त विधेयक उस विधेयक को कहते हैं, जो राजस्व या व्यय से संबंधित होता है! संसद में प्रस्तुत सभी वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं हो सकते! वित्त विधेयक, धन विधेयक है या नहीं, इसे प्रमाणित करने का अधिकार केवल लोकसभा अध्यक्ष को है!

     

    धन विधेयक : संसद में राजस्व एकत्र करने अथवा अन्य प्रकार से धन से संबंध विधेयक को धन विधेयक कहते हैं! संविधान का अनुच्छेद 110 (1) के उपखंड (क) से (छ) तक में उल्लिखित विषयों से संबंधित विधेयकों को धन विधेयक कहा जाता है! धन विधेयक केवल लोकसभा में ही पेश किया जाता है! धन विधेयक को राष्ट्रपति पुनः विचार के लिए लौटा नहीं सकता है!

     

    अनुपूरक अनुदान : यदि विनियोग विधेयक द्वारा किसी विशेष सेवा पर चालू वर्ष के लिए व्यय किये जाने के लिए प्राधिकृत कोई राशि अपर्याप्त पायी जाती है या वर्ष के बजट में उल्लिखित न की गई, और किसी नई सेवा पर खर्च की आवश्यकता उत्पन्न हो जाती है, तो राष्ट्रपति एक अनुपूरक अनुदान संसद के समक्ष पेश करवाएगा! अनुपूरक अनुदान और विनियोग विधेयक दोनों के लिए एक ही प्रक्रिया विहित की गई है!

     

    बजट सत्र : यह सत्र फरवरी के दुसरे या तीसरे सप्ताह के सोमवार को आरंभ होता है! इसे बजट सत्र इसलिए कहते हैं की इस सत्र में आगामी वित्तीय वर्ष का अनुमानित बजट प्रस्तुत, विचारित और पारित किया जाता है!

     

    सामूहिक उत्तरदायित्व : अनुच्छेद – 75 (3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी! इसका अभिप्राय यह है की वह अपने पद पर तब तक बनी रह सकती है जब तक उसे निम्न सदन अर्थात लोकसभा के बहुमत का समर्थन प्राप्त है! लोकसभा का विश्वास खोते ही मंत्रिपरिषद को तुरंत पद त्याग करना होगा!

     

    कटौती प्रस्ताव : सत्तापक्ष द्वारा सदन की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत अनुदान की मांगों में से किसी भी प्रकार की कटौती के लिए विपक्ष द्वारा रखे गये प्रस्ताव को कटौती प्रस्ताव कहा जाता है! सरकार की नीतियों की अस्वीकृति को दर्शाने के लीए विपक्ष द्वारा प्रायः एक रुपया की कटौती का प्रस्ताव किया जाता है जिसका अर्थ यह भी है की प्रस्ताव मांग के मुद्दों का स्पष्ट उल्लेख किया जाए!

     

    अविश्वास प्रस्ताव : अविश्वास प्रस्ताव सदन में विपक्षी दल के किसी सदस्य द्वारा रखा जाता है! प्रस्ताव के पक्ष में कम से कम 50 सदस्यों का होना आवश्यक है तथा प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाने के 10 दिन के अंदर इस पर चर्चा होना भी आवश्यक है! चर्चा के बाद अध्यक्ष मतदान द्वारा निर्णय की घोषणा करता है!

     

    मूल प्रस्ताव : मूल प्रस्ताव अपने आप में संपूर्ण होता है, जो सदन के अनुमोदन के लिए पेश किया जाता है! मूल प्रस्ताव को इस तरह से बनाया जाता है की उससे सदन के फैसले की अभिव्यक्ति हो सके! निम्नलिखित प्रस्ताव मूल प्रस्ताव होते हैं –

    • राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव!
    • अविध्वास प्रस्ताव : इस प्रस्ताव के माध्यम से सदन का कोई सदस्य मंत्रिपरिषद में अपना अविश्वास व्यक्त करता है और यदि यह प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है, तो मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है!
    • लोकसभा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या राज्यसभा के उपसभापति के निर्वाचन के लिए या हटाने के प्रस्ताव!
    • विशेषाधिकार प्रस्ताव : यह प्रस्ताव संसद के किसी सदस्य द्वारा पेश किया जाता है, जब उसे प्रतीत होता है की मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य ने संसद में झूठा तथ्य प्रस्तुत करके सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन किया है!

     

    स्थानापन्न प्रस्ताव : जो प्रस्ताव मूल प्रस्ताव के स्थान पर और उसके विकल्प के रूप में पेश किए जाते हैं, उन्हें स्थानापन्न प्रस्ताव कहा जाता है!

     

    अनुषंगी प्रस्ताव : जो प्रस्ताव की विभिन्न प्रकार के कार्यों की अगली कार्यवाही के लिए नियमित उपाय के रूप में पेश किया जाता है!

     

    प्रतिस्थापन प्रस्ताव : यह किसी अन्य प्रश्न पर विचार विमर्श के दौरान पेश किया जाता है! कोई सदस्य किसी विधेयक पर विचार करने के प्रस्ताव के संबंध में प्रतिस्थापन प्रस्ताव पेश करता है!

     

    संशोधन प्रस्ताव : यह प्रस्ताव मूल प्रस्ताव में संशोधन करने के लिए पेश किया जाता है!

     

    अनियमित दिन वाले प्रस्ताव : जिस प्रस्ताव को अध्यक्ष द्वारा स्वीकार या अस्वीकार किया जा सकता है, लेकिन उस प्रस्ताव पर विचार विमर्श के लिए कोई समय नियत नहीं किया जाता, उसे अनियमित दिन वाला प्रस्ताव कहा जाता है!

     

    अध्यादेश : राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल संसद अथवा विधानमंडल के सत्रावसान की स्थिति में आवश्यक विषयों से संबंधित अध्यादेश का प्रख्यापन करते हैं! अध्यादेश में निहित विधि संसद अथवा विधान मंडल के अगले सत्र की शुरुआत के छह सप्ताह के बाद प्रवर्तन योग्य नहीं रह जाती यदि संसद अथवा विधानमंडल द्वारा उसका अनुमोदन नहीं कर दिया जाता है!

     

    निंदा प्रस्ताव : निंदा प्रस्ताव मंत्रिपरिषद अथवा किसी एक मंत्री के विरुद्ध उसकी विफलता पर खेद अथवा रोष व्यक्त करने के लिए किया जाता है! निंदा प्रस्ताव में निंदा के कारणों का उल्लेख करना आवश्यक होता है! निंदा प्रस्ताव नियमानुसार है या नहीं, इसका निर्णय अध्यक्ष करता है!

     

    धन्यवाद प्रस्ताव : राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद संसद की कार्य मंत्रणा समिति की सिफारिश पर तीन चार दिनों तक धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होती है! चर्चा प्रस्तावक द्वारा आरंभ होती है तथा उसके बाद प्रस्तावक का समर्थक बोलता है! इस चर्चा में राष्ट्रपति के नाम का उल्लेख नहीं किया जाता है, क्योंकि अभिभाषण की विषय वस्तु के लिए सरकार उत्तरदायी होती है! अंत में धन्यवाद प्रस्ताव मतदान के लिए रखा जाता है तथा उसे स्वीकृत किया जाता है!

     

    विश्वास प्रस्ताव : बहुमत का समर्थन प्राप्त होने में संदेह होने की स्थिति में सरकार द्वारा लोकसभा में विश्वास प्रस्ताव लाया जाता है! इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह सिद्ध करना होता है की सदन का बहुमत उसके साथ है! विश्वास प्रस्ताव के पारित न होने की स्थिति में सरकार को त्यागपत्र देना पड़ जाता है!

     

    बैक बेंचर : सदन में आगे के स्थान प्रायः मंत्रियों, संसदीय सचिवों तथा विरोधी दल के नेताओं के लिए आरक्षित रहते हैं! गैर सरकारी सदस्यों के लिए पीछे का स्थान नियत रहता है! पीछे बैठने वाले सदस्यों को ही बैक बेंचर कहा जाता है!

     

    गुलेटिन : गुलेटिन वह संसदीय प्रक्रिया है जिसमें सभी मांगों को जो नियत तिथि तक न निपटायी गई हो बिना चर्चा के ही मतदान के लिए रखा जाता है!

     

    काकस : किसी राजनीतिक दल अथवा गुट के प्रमुख सदस्यों की बैठक को काकस कहते हैं! इस प्रमुख सदस्यों द्वारा तय की गई नीतियों से ही पूरा दल संचालित होता है!

     

    त्रिशंकु संसद : आम चुनाव में किसी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में त्रिशंकु संसद की रचना होती है! त्रिशंकु संसद की स्थिति में दल बदल जैसे कुप्रवृत्तियों को प्रोत्साहन मिलता है!

     

    नियम 193 : इस नियम के अंतर्गत सदस्य अत्यावश्यक एवं अविलंबनीय विषय पर तुरंत अल्पकालिक चर्चा की मांग कर सकते हैं! यह नियम 1953 ई० में बनाया गया था! इससे सदन की नियमावली में अविलम्ब चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव के अतिरिक्त अन्य कोई साधन सदस्यों के पास न था, इसलिए यह नियम बनाया गया!इसके अंतर्गत सदस्य किसी भी सार्वजनिक महत्व के अविलंबनीय विषय पर अल्पकालिक चर्चा के लिए नोटिस डे सकते हैं! यह चर्चा किसी प्रस्ताव के माध्यम से नहीं होती! इस कारण चर्चा के अंत में सदन में मत विभाजन नहीं होता! केवल सभी पक्षों के सदस्यों को सम्बद्ध विषय पर अपने विचार प्रकट करने का अवसर मिलता है!

     

    न्यायिक पुनर्विलोकन : भारत में न्यायपालिका को न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति प्राप्त है! न्यायिक पुनर्विलोकन के अनुसार न्यायालयों को यह अधिकार प्राप्त है की यदि विधान मंडल द्वारा पारित की गयी विधियाँ अथवा कार्यपालिका द्वारा दिए गए आदेश संविधान के प्रतिकूल हैं, तो वे उन्हें निरस्त घोषित कर सकते हैं!

    और पढ़ें : भारत के राष्ट्रिय चिह्न, प्रतिक, ध्वज, गीत एवं राष्ट्रगान

     

    गणपूर्ति (Quorum) : दोनों सदनों में प्रत्येक बैठक के प्रारंभ के एक घंटे तक प्रश्न किये जाते हैं और उनके उत्तर दिए जाते हैं! इसे प्रश्नकाल कहा जाता है! प्रश्न काल के दौरान सदस्यों को सरकार के कार्यों पर आलोचना प्रत्यालोचन का समय मिलता है! इसके दो लाभ हैं – एक तो सरकार जनता की कठिनाइयों एवं अपेक्षाओं के प्रति सजग रहती है! दुसरे, इस दौरान सरकार अपनी नीतियों एवं कार्यक्रमों की जानकारी सदन को देती है!

     

    दबाव समूह : व्यक्तियों के ऐसे समूह जिनके हित समान होते हैं, दबाव समूह कहे जाते हैं! ये ग्रुप अपने हित के लिए शासन तंत्र पर विभिन्न प्रकार से दबाव बनाते हैं!

     

    पंगु सत्र : एक विधानमंडल के कार्यकाल की समाप्ति तथा दुसरे विधानमंडल के कार्यकाल की शुरुआत के बिच के काल में संपन्न होनेवाले सत्र को पंगु सत्र कहा जाता है! यह व्यवस्था केवल अमेरिका में है!

     

    सचेतक (Whip) : राजनीतिक दल में अनुशासन बनाये रखने के लिए सचेतक की नियुक्ति प्रत्येक संसदीय दल द्वारा की जाती है! किसी विषय विशेष पर मतदान होने की स्थिति में सचेतक अपने दल के सदस्यों को मतदान विषयक निर्देश देता है! सचेतक के निर्देशों के विरुद्ध मतदान करने वाले सदस्यों के विरुद्ध दल बदल कानून के अंतर्गत कार्यवाही की जाती है!

     

    उम्मीद है ये रोचक पोस्ट आपको जरुर पसंद आया होगा! पोस्ट को पढ़ें और शेयर करें (पढाएं) तथा अपने विचार, प्रतिक्रिया, शिकायत या सुझाव से नीचे दिए कमेंट बॉक्स के जरिए हमें अवश्य अवगत कराएं! आप हमसे हमसे  ट्विटर  और  फेसबुक  पर भी जुड़ सकते हैं!