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  • सौरमंडल, परम्परागत ग्रह, बौने ग्रह, धूमकेतु, उपग्रह एवं अन्य छोटे खगोलीय पिंड

    सौरमंडल, परम्परागत ग्रह, बौने ग्रह, धूमकेतु, उपग्रह एवं अन्य छोटे खगोलीय पिंड

    सूर्य के चरों ओर चक्कर लगाने वाले विभिन्न ग्रहों, क्षुद्रग्रहों, धूमकेतुओं, उल्काओं तथा अन्य कोशकीय पिंडों के समूह को सौरमंडल (Solar System) कहते हैं! सौरमंडल में सूर्य का प्रभुत्व है, क्योंकि सौरमंडल निकाय के द्रव्य का लगभग 99.999 द्रव्य सूर्य में निहित है! सौरमंडल के समस्त उर्जा का स्रोत भी सूर्य ही है!

     

    सूर्य (Sun) : सूर्य सौरमंडल का प्रधान है! यह हमारी मंदाकिनी दुग्धमेखला के केन्द्र से लगभग 30,000 प्रकाशवर्ष की दूरी पर एक कोने में स्थित है! यह दुग्धमेखला मंदाकिनी के केंद्र के चारों ओर 250 किमी/से की गति से परिक्रमा कर रहा है! इसका परिक्रमा काल 25 करोड़ वर्ष है, जिसे ब्रह्मांड काल कहते हैं! सूर्य अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की ओर घूमता है! इसका मध्य भाग 25 दिनों में व ध्रुवीय भाग 35 दिनों में एक घूर्णन करता है! और पढ़ें : विभिन्न यंत्रों और उपकरणों के अविष्कार और उनके देश

     

    सूर्य एक गैसीय गोला है, जिसमे हाइड्रोजन 71%, हीलियम 26.5% एवं अन्य तत्व 2.5% होता है! सूर्य का केन्द्रीय भाग कोर (Core) कहलाता है, जिसका ताप 1.5 x 10000000 डिग्री C होता है तथा सूर्य के बाहरी सतह का तापमान 6000 डिग्री C है! सूर्य के केंद्र पर चार हाइड्रोजन नाभिक मिलकर एक हीलियम नाभिक का निर्माण करता है! अर्थात् सूर्य के केंद्र पर नाभकीय संलयन होता है जो सूर्य की उर्जा का स्रोत है! सूर्य की दीप्तिमान सतह को प्रकाशमंडल (Photo sphere) कहते हैं! प्रकाशमंडल के किनारे प्रकाशमान नहीं होते, क्योंकि सूर्य का वायुमंडल प्रकाश का अवशोषण कर लेता है! इसे वर्णमंडल (Chromosphere) कहते हैं! यह लाल रंग का होता है! सूर्य ग्रहण के समय सूर्य के दिखाई देनेवाले भाग को सूर्य किरीट (Corona) कहते हैं! सूर्य किरीट X-Ray उत्सर्जित करता है! इसे सूर्य का मुकुट कहा जाता है! पूर्ण सूर्यग्रहण के समय सूर्य किरीट से प्रकाश की प्राप्ति होती है!

     

    सूर्य की उम्र 5 बिलियन वर्ष है! भविष्य में सूर्य द्वारा उर्जा देते रहने का समय 100000000000 वर्ष है! सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में 8 मिनट 16.6 सेकण्ड का समय लगता है! सौर ज्वाला को उतरी ध्रुव पर औरोरा बोरिलियालिस और दक्षिणी ध्रुव पर औरोरा औस्ट्रेलिस कहते हैं! सूर्य के धब्बे का तापमान आसपास से 1500 डिग्री C कम होता है! सूर्य के धब्बों का एक पूरा चक्र 22 वर्षों का होता है, पहले 11 वर्षों तक यह धब्बा बढ़ता है और बाद के 11 वर्षों तक यह धब्बा घटता है! जब सूर्य की सतह पर धब्बा दिखलाई पड़ता है, उस समय पृथ्वी पर चुम्बकीय झंझावत उत्पन्न होते हैं! इससे चुम्बकीय सुई की दिशा बदल जाती है एवं रेडियो, टेलीविज़न, बिजली चालित मशीन आदि में गड़बड़ी उत्पन्न हो जाती है! सूर्य का व्यास 13 लाख 92 हजार किमी है, जो पृथ्वी के व्यास का लगभग 110 गुना है! सूर्य हमारी पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है, और पृथ्वी को सूर्यताप का 2 अरबवां भाग मिलता है!

     

    सौरमंडल के पिंड – सौरमंडल के मौजूद पिंडों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया है!

    परम्परागत ग्रह : बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण

    बौने ग्रह : प्लूटो, चेरॉन, सेरस, 2003  यूबी 313

    लघु सौरमंडलीय पिंड : धूमकेतु, उपग्रह एवं अन्य छोटे खगोलीय पिंड

     

    ग्रह : ग्रह वे खगोलीय पिंड है जो निम्न शर्तों को पूरा करता है – (i) जो सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करता हो  (ii) उसमें पर्याप्त ग्रुत्वकर्षण बल हो जिससे वह गोल स्वरुप ग्रहण कर सके  (iii) उसके आस पास का क्षेत्र साफ हो यानी उसके आस पास अन्य खगोलीय पिंडों की भीड़ भाड़ न हो! ग्रह की इस परिभाषा के आधार पर यम (Pluto) को ग्रह की श्रेणी से निकाल दिया गया फलस्वरूप परम्परागत ग्रहों की संख्या 9 से घटकर 8 रह गयी! यम को बौने ग्रह की श्रेणी में रखा गया है! ग्रहों को दो भागों में विभाजित किया गया है  –

    (i) पार्थिव या आन्तरिक ग्रह (Terrestrial or Inner Planet) – बुध, शुक्र, पृथ्वी एवं मंगल को पार्थिव ग्रह कहा जाता है, क्योंकि ये पृथ्वी के सदृश होते हैं!

    (ii) वृहस्पतीय या बाह्य ग्रह (Jovean or Outer Planet) – वृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण को वृहस्पतिय ग्रह कहा जाता है!

    कुल आठ ग्रहों में से केवल पाँच को ही नंगी आँखों से देखा जा सकता है जो है – बुध, शुक्र, शनि, वृहस्पति एवं मंगल!

    आकार के अनुसार ग्रहों का क्रम (घटते क्रम में) – वृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण, पृथ्वी, शुक्र, मंगल एवं बुध अर्थात् सबसे बड़ा ग्रह वृहस्पति और सबसे छोटा ग्रह बुध है!

    घनत्व के अनुसार ग्रहों का क्रम (बढ़ते क्रम में) – शनि, युरेनस, वृहस्पति, नेपच्यून, मंगल एवं शुक्र!

    शुक्र एवं अरुण (युरेनस) को छोड़कर अन्य सभी ग्रहों का घूर्णन एवं परिक्रमण की दिशा एक ही है!

     

    बुध (Mercury) : यह सूर्य का सबसे नजदीकी ग्रह है, जो सूर्य निकलने के दो घंटा पहले दिखाई पड़ता है! यह सबसे छोटा ग्रह है, जिसके पास कोई उपग्रह नहीं है! इसका सबसे विशिष्ट गुण है, इसमें चुम्बकीय क्षेत्र का होना! यह सूर्य क परिक्रमा सबसे कम समय में पूरी करता है अर्थात् सौरमंडल का सर्वाधिक कक्षीय गति वाला ग्रह है! इसका तापमान लगभग -180 डिग्री C है! इसका घनत्व सभी ग्रहों एवं जल से भी कम है, यानि इसे जल में रखने पर तैरने लगेगा! यहाँ दिन अति गर्म व रातें बर्फीली होती है! इसका तापान्तर सभी ग्रहों में सबसे अधिक (560 डिग्री C) है!

     

    शुक्र (Venus) : यह पृथ्वी का निकटम ग्रह है! यह सबसे चमकीला एवं सबसे गर्म ग्रह है! इसे साँझ का तारा या भोर का तारा कहा जाता है क्योंकि यह शाम में पश्चिम दिशा में तथा सुबह में पूरब दिशा में आकाश में दिखाई देता है! यह अन्य ग्रहों के विपरीत दक्षिणावर्त (Clockwise) चक्रण करता है! इसे पृथ्वी का भगिनी ग्रह कहते हैं! यह घनत्व, आकार एवं व्यास में पृथ्वी के समान है! इसके पास कोई उपग्रह नहीं है! और पढ़ें : विश्व के प्रमुख खनिज, उत्पादक देश एवं उनके स्थान

     

    वृहस्पति (Jupiter) : यह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है! इसे अपनी धुरी पर चक्कर लगाने में 10 घंटा (सबसे कम) और सूर्य की परिक्रमा करने में 12 वर्ष लगते हैं! इसका उपग्रह ग्यानीमीड सभी उपग्रहों में सबसे बड़ा है!

     

    मंगल (Mars) : इसे लाल ग्रह (red planet) कहा जाता है, इसका रंग लाल, आयरन ऑक्साइड के कारण है! यहाँ पृथ्वी के समान दो ध्रुव हैं तथा इसका कक्षातली 25 डिग्री के कोण पर झुका हुआ है, जिसके कारण यहाँ पृथ्वी के समान ऋतु परिवर्तन होता है! इसके दिन का मान एवं अक्ष का झुकाव पृथ्वी के समान है! यह अपनी धुरी पर 24 घंटे में एक बार पूरा चक्कर लगाता है! इसके दो उपग्रह है – फोबोस (Phobos) और डीमोस (Deimos)! सूर्य की परिक्रमा करने में इसे 687 दिन लगते हैं! सौरमंडल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी ओलिपस मेसी एवं सौरमंडल का सबसे ऊँचा पर्वत निक्स ओलम्पिया जो माउंट एवेरेस्ट से तीन गुना अधिक ऊँचा है, इसी ग्रह पर है! मंगल पर बर्फ छात्र्कों और हिमशीतित जल की उपस्थिति है, इसलिए पृथ्वी के अलावा यह एकमात्र ग्रह है जिस पर जीवन की संभावना व्यक्त की जाती है!

     

    शनि (Saturn) : यह आकार में दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है! यह आकाश में पीले तारे की तरह दिखाई पड़ता है! इसकी विशेषता है, इसके तल के चारो ओर वलय का होना! वलय की संख्या 7 है! शनि का सबसे बड़ा उपग्रह टाइटन है जो सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह है, यह आकार में बुध के बराबर है! टाइटन एकमात्र ऐसा उपग्रह है, जिसका पृथ्वी जैसा स्वयं का सघन वायुमंडल है! फ़ोबे नामक शनि का उपग्रह इसकी कक्षा में घुमने की विपरीत दिशा में परिक्रमा करता है!

     

    अरुण (Uranus) : यह आकार में तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है! इसका तापमान लगभग -215 डिग्री C है! इसकी खोज 1781 ई० में विलियम हर्शेल द्वारा की गई थी! इसके चरों ओर नौ वलयों में पांच वलयों का नाम अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा एवं इप्सिलौन है! यह अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की ओर घूमता है, जबकि अन्य ग्रह पश्चिम से पूर्व की घूमता है! यहाँ सूर्योदय पश्चिम की ओर एवं सूर्यास्त पूरब की ओर होता है! यह अपनी धुरी पर सूर्य की ओर इतना झुका हुआ है की लेटा हुआ सा दिखलाई पड़ता है, इसलिए इसे लेटा हुआ ग्रह कहा जाता है! इसके सभी उपग्रह भी पृथ्वी की विपरीत दिशा में परिभ्रमण करते हैं! इसका सबसे बड़ा उपग्रह टाईटेनिया है!

     

    वरुण (Neptune) : इसकी खोज 1846 ई० में जर्मन खगोलज्ञ जहॉन गाले ने की है! नई खगोलीय व्यवस्था में यह सूर्य से सबसे दूर स्थित ग्रह है! यह हरे रंग का ग्रह है! इसके चारों ओर अति शीतल मीथेन का बादल छाया हुआ है! इसके उपग्रहों में ट्रीटोन (Triton) प्रमुख है!

     

    पृथ्वी (Earth) : यह आकार में पांचवां सबसे बड़ा ग्रह है! यह सौरमंडल का एकमात्र ग्रह है, जिस पर जीवन है! इसका विषुवत व्यास 12756 किमी और ध्रुवीय व्यास 12714 किमी है! पृथ्वी अपने अक्ष पर साढ़े तेईस डिग्री झुकी हुई है! यह अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर 1610 किमी प्रतिघंटा की चाल से 23 घंटे 56 मिनट और 4 सेकंड में एक चक्कर पूरा लगाती है! पृथ्वी की इस गति को घूर्णन या दैनिक गति कहते हैं! पृथ्वी को परिक्रमा करने में 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट और 4 सेकंड का समय लगता है! सूर्य के चतुर्दिक पृथ्वी के इस परिक्रमा को पृथ्वी की वार्षिक गति या परिक्रमण कहते हैं! पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा करने में लगे समय को सौर वर्ष कहते हैं!

     

    प्रत्येक सौर वर्ष, कैलेंडर वर्ष से लगभग 6 घंटे बढ़ जाता है, जिसे हर चौथे वर्ष में लिप वर्ष बनाकर समायोजित किया जाता है! लिप वर्ष 366 दिन का होता है, जिसके कारण फरवरी माह में 28 दिन के स्थान पर 29 दिन होते हैं! पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन, इसकी अक्ष पर झुके होने के कारण तथा सूर्य के सापेक्ष इसकी स्थिति में परिवर्तन यानि वार्षिक गति के कारण होती है! वार्षिक गति के कारण ही पृथ्वी पर दिन रात छोटा बड़ा होता है! आकार एवं बनावट की दृष्टि से पृथ्वी शुक्र के समान है! जल की उपस्थिति के कारण इसे नीला ग्रह भी कहा जाता है! इसका अक्ष इसकी कक्षा के सापेक्ष 66.5 का कोण बनाता है! सूर्य के बाद पृथ्वी के सबसे निकट का तारा प्रोक्सिमा सेंचुरी है, जो अल्फा सेंचुरी समूह का एक तारा है! यह पृथ्वी से 4.22 प्रकाशवर्ष दूर है! पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह चन्द्रमा है! साइरस या डॉग स्टार पृथ्वी से 9 प्रकाशवर्ष दूर स्थित है एवं सूर्य से दोगुने द्रव्यमान वाला तारा है, यह रात्रि में दिखाई पड़ने वाला सर्वाधिक चमकीला तारा है!

     

    चन्द्रमा (Moon) : चन्द्रमा की सतह और उसकी आंतरिक स्थिति का अध्ययन करने वाला विज्ञान सेलेनोलॉजी कहलाता है! इस पर धूल के मैदान को शांति सागर कहते हैं! यह चन्द्रमा का पिछला भाग है जो अंधकारमय होता है! चन्द्रमा का उच्चतम पर्वत लिबनिटज पर्वत है, जो 35000 फुट ऊँचा है! यह चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित है! चन्द्रमा को जीवाश्म ग्रह भी कहते हैं! चन्द्रमा पृथ्वी की एक परिक्रमा लगभग 27 घंटे 8 दिन में पूरा करता है! और इतने ही समय में अपने अक्ष पर एक घूर्णन करता है! यही कारण है की चन्द्रमा का सदैव एक ही भाग दिखाई पड़ता है! पृथ्वी से चन्द्रमा का 57% भाग को देखा जा सकता है! चन्द्रमा का अक्ष तल पृथ्वी के अक्ष के साथ 58.48 डिग्री का अक्ष कोण बनाता है! चन्द्रमा पृथ्वी के अक्ष के समानान्तर है!

     

    चन्द्रमा का व्यास 3480 किमी तथा द्रव्यमान, पृथ्वी के द्रव्यमान का लगभग 81वाँ भाग है! पृथ्वी के समान इसका परिक्रमण पथ भी दीर्घवृताकार है! सूर्य के संदर्भ में चन्द्रमा की परिक्रमा अवधि 29.53 दिन (29 दिन 12 घंटे 44 मिनट और 2.8 सेकंड) होती है! इस समय को चंद्रमास या साइनोडिक मास कहते हैं! नक्षत्र समय के दृष्टिकोण से चन्द्रमा लगभग साढ़े सताईस दिन (27 दिन 7 घंटे 43 मिनट 11.6 सेकंड) होती है! साढ़े सताईस दिन की यह अवधि नक्षत्र मास कहलाती है! ज्वार उठने के लिए अपेक्षित सौर एवं चन्द्रमा की शक्तियों का अनुपात 11:5 है! और पढ़ें : भारत के संसदीय कार्यप्रणाली से सम्बंधित महत्वपूर्ण शब्दावली

     

    चन्द्रमा भी उतना ही पुराना है, जितना पृथ्वी (लगभग 460 करोड़ वर्ष)! इसकी चट्टानों में टाइटेनियम की मात्र अत्यधिक मात्रा में पाई गयी है! सुपर मून – जब चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है, तो उस स्थिति को सुपर मून कहते हैं! इसे पेरीजी फूल मून भी कहते हैं! इसमें चाँद 14% ज्यादा बड़ा और 30% अधिक चमकीला दिखाई पड़ता है! चन्द्रमा और पृथ्वी के बिच की औसतन दूरी 384365 किमी है! ब्लू मून – एक कैलेंडर माह में जब दो पूर्णिमा हो, तो दूसरी पूर्णिमा का चाँद ब्लू मून कहलाता है! वस्तुतः इसका मुख्य कारण दो पूर्णिमाओं के बिच अन्तराल 31 दिन से कम होना है! ऐसा हर दो तीन साल पर होता है! जब किसी वर्ष विशेष में दो या अधिक माह ब्लू मून के होते हैं, उसे मून इयर कहा जाता है!

     

    बौने ग्रह –

    यम (Pluto) : इसकी खोज 1930 में क्लाड टामवो ने की थी! पहले यह ग्रह में शामिल था, फिर 2006 में प्राग सम्मलेन में इसे ग्रह कहलाने के मापदंड पर खरे नहीं उतरने के कारण ग्रह से अलग कर बौने ग्रह की श्रेणी में रखा गया! लेकिन शायद अब फिर से इसे ग्रह में शामिल करने की बात कही जा रही है! यम को ग्रह की श्रेणी से निकले जाने की प्रमुख वजह थी – (i) आकार में चन्द्रमा से छोटा होना! (ii) इसकी कक्षा का वृताकार नहीं होना! (iii) वरुण की कक्षा को काटना! इसका नया नाम 134340 रखा है!

     

    सेरस (Ceres) : इसकी खोज इटली के खगोलशास्त्री पियाजी ने किया था! इसे बौने ग्रह की श्रेणी में रखा गया है, जहाँ इसे संख्या 1 से जाना जाता है! इसका व्यास बुध के व्यास का पाँचवा भाग है! अन्य बौने ग्रह चेरौन और 2003 UB 313 (इरिस) है!

     

    लघु सौरमंडलीय पिंड –

    क्षुद्र ग्रह (Asteroids) : मंगल और वृहस्पति ग्रह की कक्षाओं के बिच कुछ छोटे छोटे आकाशीय पिंड हैं जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं, उसे क्षुद्र ग्रह कहते हैं! ग्रहों के विस्फोट के फलस्वरूप टूटे टुकड़ों से क्षुद्र ग्रह का निर्माण हुआ है! फोर वेस्टा एकमात्र क्षुद्र ग्रह है जिसे नंगी आँखों से देखा जा सकता है!

     

    धूमकेतु (Comet) : सौरमंडल के छोर पर बहुत ही छोटे छोटे अरबों पिंड विद्यमान हैं, जिन्हें धूमकेतु या पुच्छल तारे कहते हैं! यह गैस एवं धूल का संग्रह है, जो आकाश में लंबी चमकदार पूंछ सहित प्रकाश के चमकीले गोले के रूप में दिखाई देते हैं! धूमकेतु केवल तभी दिखाई पड़ता है जब वह सूर्य की ओर अग्रसर होता है क्योंकि सूर्य की किरणें इसकी गैस को चमकीला बना देता है! धूमकेतु की पूंछ हमेसा सूर्य से दूर होता दिखाई देता है! हैले नमक धूमकेतु का परिक्रमण काल 76 वर्ष है, यह अंतिम बार 1986 में दिखाई दिया था! आगली बार 2062 में दिखाई देगा! धूमकेतु हमेशा के लिए टिकाऊ नहीं होते हैं, फिर भी प्रत्येक धूमकेतु के लौटने का समय निश्चित होता है!

     

    उल्का (Meteors) : उल्काएँ प्रकाश की चमकीली धारी के रूप में दिखती हैं, जो आकाश में क्षण भर के लिए दमकती हैं और फिर लुप्त हो जाती हैं! उल्काएँ क्षुद्र ग्रहों के टुकड़े तथा धूमकेतुओं द्वारा छोड़े गए धूल के कण होते हैं!

     

    ग्रहों से सम्बंधित विवरण :

    ग्रहों के नाम व्यास (किमी) परिभ्रमण समय अपने अक्ष पर परिक्रमण समय सूर्य के चारो ओर उपग्रहों की संख्या
     बुध 4878 58.6 दिन 88 दिन 0
     शुक्र 12104 243 दिन 224.7 दिन 0
     पृथ्वी 12756-12714 23.9 घंटे 365.26 दिन 1
     मंगल 6796 24.6 घंटे 687 दिन 2
     वृहस्पति 142984 9.9 घंटे 11.9 वर्ष 63
     शनि 120536 10.3 घंटे 29.5 वर्ष 62
     अरुण 51118 17.2 घंटे 84 वर्ष 27
     वरुण 49100 17.1 घंटे 164.8 वर्ष 13

     

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  • वायुमंडल की संरचना एवं इसकी विभिन्न परतें

    वायुमंडल की संरचना एवं इसकी विभिन्न परतें

    वायुमंडल की संरचना : वायुमंडल को निम्न परतों में बाँटा गया है – क्षोभमंडल (Troposphere), समतापमंडल (Stratosphere), ओजोनमंडल (Ozonosphere), आयनमंडल (Ionosphere), बहिर्मंडल (Exosphere)!

     

    क्षोभमंडल (Troposphere) : यह वायुमंडल का सबसे निचे वाली परत है! इसकी ऊँचाई ध्रुवों पर 8 किमी तथा विषुवत रेखा पर लगभग 18 किमी होती है! क्षोभमंडल में तापमान की गिरावट की दर प्रति 165 मी० की ऊँचाई पर 1 डिग्री C अथवा 1 किमी की ऊँचाई पर 6.4 डिग्री C होती है! सभी मुखय वायुमंडलीय घटनाएँ जैसे बादल, आँधी एवं वर्षा इसी मंडल में होती है! इस मंडल को संवहन मंडल कहते है, क्योंकि संवहन धाराएं इसी मंडल की सीमा तक सीमित होती है! इस मंडल को अधो मंडल भी कहते हैं! और पढ़ें : विभिन्न यंत्रों और उपकरणों के अविष्कार और उनके देश

     

    समतापमंडल (Stratosphere) : समतापमंडल 18 से 32 किमी की ऊँचाई तक है! इसमें ताप समान रहता है! इसमें मौसमी घटनाएँ जैसे आँधी, बादलों की गरज, बिजली की कड़क, धूल कण एवं जलवाष्प आदि कुछ नहीं होती है! इस मंडल में वायुयान उड़ाने की आदर्श दशा पायी जाती है! समतापमंडल की मोटाई ध्रुवों पर सबसे अधिक होती है, कभी कभी विषुवत रेखा पर इसका लोप हो जाता है! कभी कभी इस मंडल में विशेष प्रकार के मेघों का निर्माण होता है, जिसे मूलाभ मेघ (Mother of pearl cloud) कहते हैं!

     

    ओजोनमंडल (Ozonosphere) : धरातल से 32 किमी से 60 किमी के मध्य ओजोन मंडल है! इस मंडल में ओजोन गैस की एक परत पायी जाती है, जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है! इसलिए इसे पृथ्वी का सुरक्षा कवच कहते हैं! ओजोन परत को नष्ट करने वाली गैस CFC (क्लोरो फ्लोरो कार्बन) है, जो एयर कंडिशनर, रेफ्रिजरेटर आदि से निकलती है! ओजोन परत में क्षरण CFC में उपस्थित सक्रिय क्लोरिन (Cl) के कारण होती है! ओजोन परत की मोटाई नापने में डाब्सन इकाई का प्रयोग किया जाता है! इस मंडल में ऊँचाई के साथ तापमान बढ़ता जाता है, प्रति एक किमी की ऊँचाई पर तापमान में 5 डिग्री C की वृद्धि होती है!

     

    आयनमंडल (Ionosphere) : इसकी ऊँचाई 60 किमी से 640 किमी तक होती है! यह भाग कम वायुदाब तथा पराबैंगनी किरणों द्वारा आयनीकृत होता रहता है! इस मंडल में सबसे नीचे स्थित D-layer से long radiowaves एवं E1, E2 और F1, F2 परतों से short radio wave परावर्तित होती है! जिसके फलस्वरूप पृथ्वी पर रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन एवं रडार आदि की सुविधा प्राप्त होती है! संचार उपग्रह इसी मंडल में अवस्थित होते हैं!

     

    बाह्यमंडल (Exosphere) : 640 किमी से ऊपर के भाग को बाह्यमंडल कहा जाता है! इसकी कोई उपरी सीमा निर्धारित नहीं है! इस मंडल में हाईड्रोजन एवं हीलियम गैस की प्रधानता होती है! और पढ़ें : विश्व के प्रमुख खनिज, उत्पादक देश एवं उनके स्थान

     

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  • विश्व के प्रमुख देश, राजधानी एवं उनकी मुद्रा

    विश्व के प्रमुख देश, राजधानी एवं उनकी मुद्रा

     देश राजधानी
    मुद्रा
     भारत नई दिल्ली रुपया
     बांग्लादेश ढाका टका
     भूटान थिम्पू न्गुल्ट्रम
     नेपाल काठमांडू रुपया
     म्यांमार नेय पईताव क्यात
     पाकिस्तान इस्लामाबाद रुपिया
     अफगानिस्तान काबुल अफगानी

     

    चीन बीजिंग  युआन
     श्रीलंका कोलम्बो रुपया
     ईरान तेहरान रियाल
     इराक बगदाद दीनार
     इंडोनेशिया जकार्ता रुपिया
     बहरीन मनामा दीनार
     मंगोलिया उलनबटोर तुगरिक
     मलेशिया क्वालालंपुर रिंगगिट

    और पढ़ें : नदियों के किनारे बसे विश्व के प्रमुख नगर

     

     मालदीव माले
    रुपया
     लेबनान बेरुत पाउंड
     लाओस वियन्तियान न्यूकिपलाओ
     कुवैत कुवैत सिटी दीनार
     वियतनाम हनोई डाग
     थाईलैंड बैंकाक बहत
     सं० अ० अमीरात
    अबुधावी दिरहम
     ताईवान ताइपे डॉलर

     

     किर्गिस्तान बिश्केक
    सोम
     तुर्की अंकारा लीरा
     इजराइल जेरुसलम न्यू शेकेल
     जॉर्डन अम्मान दीनार
     क़तर दोहा रियाल
     कम्बोडिया न्होमपेन्ह रीएल
     उतर कोरिया
    प्योंगप्यांग वॉन
     दक्षिण कोरिया
    सिओल वॉन

    और पढ़ें : विश्व की प्रमुख फसलें, उत्पादक देश एवं उनके स्थान

     

     मकाउ मकाउ
    पटाका
     जापान टोक्यो येन
     ब्रूनेई बंदरसेरी डॉलर
     साइप्रस निकोसिया पाउंड
     हांगकांग विक्टोरिया डॉलर
     गुआम अगाना डॉलर
     ओमान मस्कट रियाल
     फिलीपिंस मनिला पीसो

     

     सीरिया दमिश्क
    पाउंड
     सऊदी अरब
    रियाद रियाल
     सिंगापूर सिंगापूर डॉलर
     उज्बेकिस्तान ताशकंद सुम
     कजाकिस्तान अलमाटा टेनगे
     यमन साना रियाल
     ताजकिस्तान दुशानावे सोमोनी
     तुर्कमेनिस्तान अशखाबाद मनात

     

     अंगोला लुआंडा
    क्वांजा
     अल्जीरिया अल्जीयर्स दीनार
     मॉरिशस पोर्ट लुईस रुपया
     मोरक्को रबात दिरहम
     मोजाम्बिक मपुतो मेटिकल
     नामीबिया विंडहॉक रैंड
     मालागासी अन्ताननरिबो फ्रैंक
     मलावी लिलोंग्वे क्वाचा

     

     बोत्सवाना गेबोरोन
    पुला
     बुरुंडी बुजुमबुरा फ्रैंक
     कैमरून याओंडे फ्रैंक
     कांगो ब्राजाविले (CFA) फ्रैंक
     नाइजर नियामी फ्रैंक
     नाइजीरिया लागोस नैरा
     रवांडा किगाली फ्रैंक
     सेनेगल डकार फ्रैंक

     

     सोमालिया मोगाडिशु
    शिलिंग
     द० अफ्रीका
    प्रिटोरिया रैंड
     सूडान खारतूम पाउंड
     तंजानिया डोडोमा शिलिंग
     सेशेल्स विक्टोरिया रुपया
     ट्यूनीशिया ट्यूनीश दीनार
     युगांडा कंपाला शिलिंग
     जांबिया लुसाका क्वाचा

     

     जिम्बाब्वे हरारे
    डॉलर
     कांगो (लो ग)
    किंशासा जैरे
     टोगो लोमे फ्रैंक
     मिस्र काहिरा पाउंड
     इथिओपिया अदिस अबाबा बिर्र
     घाना अक्रा केडी
     गिनी कोनाक्रे फ्रैंक
     केन्या नैरोबी शिलिंग

     

     लीबिया हून (त्रिपोली)
    दीनार
     बेनिन पोर्टो नोवो फ्रैंक
     माली
    बमाको फ्रैंक
     स्वाजीलैंड म्बाबने लिलान्ग्नी
     लाइबेरिया मोनरोविआ फ्रैंक
     गांबिया बंजुल दलासी
     जिबूती जिबूती फ्रैंक
     गुयाना मालाबो फ्रैंक

     

     कनाडा ओटावा
    डॉलर
     क्यूबा हवाना पीसो
     पनामा पनामा सिटी बाल बोआ
     बरमूडा हेमिल्टन डॉलर
     बहामाज नसाऊ डॉलर
     बारबाडोस ब्रिजटाउन डॉलर
     कोस्टारिका सान जोस कोलन
     बेलीज बेलमोपन डॉलर

     

     मैक्सिको मैक्सिको सिटी
    पीसो
     सं राज्य अमेरिका
    वाशिंगटन (डी सी) डॉलर
     डोमिनिक रोसोऊ डॉलर
     डोमिनियन गणराज्य
    सैंटो डोमिंगो पीसो
     होंडुरस तेगुसिगल्पा लेम्पिरा
     नीदरलैंड एंटिल्स
    ब्लेम्स्टड गिल्डर
     जमैका किंग्स्टन डॉलर
     ग्रीनलैंड नूक क्रोन

     

     हैती पोर्ट ओ प्रिंस
    गोर्डे
     एंटीगुआ एवं बरबुडा
    सेंट जोंस कोलन
     ब्राजील साओ पाउलो रीएल
     चिली सांतियोगी पीसी
     इक्वाडोर क्वेटो सुक्रे
     सूरीनाम परामरिबो गिल्डर
     वेनेजुएला काराकस बोलिवर
     अर्जेंटीना ब्यूनस आयर्स अर्जेंटीनो

    और पढ़ें : विश्व के प्रमुख औद्योगिक नगर एवं वहाँ के प्रमुख उद्योग

     

     त्रिनिदाद व टोबैगो
    पोर्ट ऑफ़ स्पेन
     डॉलर
     पेरू लिमा न्यू सोल
     कोलंबिया बोगोटा पीसो
     गुयाना जॉर्ज टाउन डॉलर
     पराग्वे असनश्यान गुआरानी
     उरुग्वे मोंटेविडिओ पीसो
     अरुबा ओरंजेस्टेड गिल्डर
     बोलीविया लापाज बोलीवियानों

     

     फ्रेंच गुयाना
    कोयेन्ने
    फ्रैंक
     रूस मास्को रूबल
     स्पेन मैड्रिड पेसेटा (अब यूरो)
     पोलैंड वारसा ज्लोती
     नार्वे ओस्लो क्रोन
     पुर्तगाल लिस्बन एस्कुडो (अब यूरो)
     फ्रांस पेरिस फ्रैंक (अब यूरो)
     जर्मनी बर्लिन ड्यूश मार्क (अब यूरो)

     

     यूनान एथेंस
    ड्राचमा (अब यूरो)
     हंगरी बुडापेस्ट फ्रोरिंट
     डेनमार्क कोपहेगन क्रोन
     लिथुआनिया
    विल्नियस लितास
     एस्तोनिया ताल्लिन क्रून (अब यूरो)
     स्वीडन स्टॉकहोम क्रोना
     स्विट्ज़रलैंड बर्न फ्रैंक
     ग्रेट ब्रिटेन
    लंदन पाउंड

    और पढ़ें : विश्व के प्रमुख खनिज, उत्पादक देश एवं उनके स्थान

     

     मेसेडोनिया स्कोपजे
    दीनार
     स्लोबेनिया
    ल्युकिल्यान दीनार (अब यूरो)
     सर्बिया बेलग्रेड दीनार
     युक्रेन कीव हिरविनिया
     फ़िनलैंड हेलसिंकी मारक्का (अब यूरो)
     नीदरलैंड्स
    एम्स्टरर्डम गिल्डर (अब यूरो)
     आइसलैंड
    रिक्याविक क्रोना
     ऑस्ट्रिया वियाना शिलिंग

     

     आर्मेनिया येरेवान
    रूबल
     चेक गणराज्य
    प्राग कोरुना
     रोमानिया बुखारेस्ट ल्यु
     माल्टा वालेटा पाउंड (अब यूरो)
    अजरबैजान
    बाकू मनात
     जॉर्जिया तिब्लिसी लारी
     आयरलैंड डबलिन पाउंड (अब यूरो)
     लक्जमबर्ग लक्जमबर्ग फ्रैंक (अब यूरो)

     

    बेल्जियम
    ब्रुसेल्स
    फ्रैंक (अब यूरो)
     बुल्गारिया सोफ़िया लेवा (अब यूरो)
     अल्बानिया तिराना लेक
     बेलारूस मिन्स्क रूबल
     क्रोशिया जागरेव दीनार
     इटली रोम लीरा
     स्लोवाक गणराज्य
    ब्रातिस्लावा क्राउन
     ऑस्ट्रेलिया केनबरा डॉलर

     

     न्यूजीलैंड
    वेलिंगटन
    डॉलर
     फिजी सुवा डॉलर
     मार्शल द्वीप
    मजुरो डॉलर
     सोलोमन द्वीपसमूह
    होनियारा डॉलर
     पापुआ न्यू गिनी
    पोर्ट मोरेस्वी किना
     किरिबाती बैरिकी डॉलर

    और पढ़ें : विभिन्न यंत्रों और उपकरणों के अविष्कार और उनके देश

     

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  • नदियों के किनारे बसे विश्व के प्रमुख नगर

    नदियों के किनारे बसे विश्व के प्रमुख नगर

     शहर / नगर
    नदी
    बगदाद (इराक)
    टाइग्रिस
     बर्लिन (जर्मनी)
    स्प्रि
     पर्थ (ऑस्ट्रेलिया)
    स्वान
     वारसा (पोलैंड)
    विस्चुला
     बेलग्रेड डेन्यूब
     बुडापेस्ट (हंगरी)
    डेन्यूब
     वाशिंगटन (USA)
    पोटोमेक

     

     वियना (ऑस्ट्रिया)
    डेन्यूब
     अस्वान (मिस्र)
    नील
     सेंट लुईस (अमेरिका)
    मिसिसिपी
     रोम (इटली)
    टाइबर
     लंदन टेम्स
     पेरिस सीन
     मास्को मोस्कावा
     प्राग विंतावा

    और पढ़ें : विश्व की प्रमुख फसलें एवं उनके उत्पादक देश

     

     बोन (जर्मनी)
    राइन
     खारतूम (सूडान)
    नील
     हांकोव (चीन)
    यांग्तिसिक्यंग
     काहिरा (मिस्र)
    नील
     ब्यूनस आयर्स (अर्जेंटीना)
    लाप्लाटा
     अंकारा (टर्की)
    किजिल
     डुंडी (स्कॉटलैंड)
    टे
     लिवरपूल (इंग्लैंड)
    मर्सी

     

     कोलोन (जर्मनी)
    राइन
     मांट्रियल (कनाडा)
    सेंट लारेंस
     सिडनी डार्लिंग
     कीव (रूस)
    निपर
     मौलमिन (म्यांमार)
    सालविन
     कैंटन (चीन)
    सिक्यांग
     टोकियो (जापान)
    अराकावा
     शंघाई (चीन)
    यांतिसिक्यांग

     

     रंगून (म्यांमार)
    इरादावी
     ओटावा (कनाडा)
    सेंट लारेंस
     न्यूयॉर्क (अमेरिका)
    हडसन
     मैड्रिड (स्पेन)
    मैजेनसेस
     लिस्बन (पुर्तगाल)
    टंगस
     लाहौर (पाकिस्तान)
    रावी
     करांची (पाकिस्तान)
    सिंधु
     डबलिन (आयरलैंड)
    लिफें

    और पढ़ें : विश्व के प्रमुख खनिज, उत्पादक देश एवं उनके स्थान

     

     दिल्ली (भारत)
    यमुना
     चटगाँव (बांग्लादेश)
    मैयानी
     हैम्बर्ग (जर्मनी)
    एल्ब
     शिकागो (अमेरिका)
    शिकागो
     ब्रिस्टल (इंग्लैंड)
    एवन
     बसरा (इराक)
    दजला और फरात
     क्यूबेक (कनाडा)
    सेंट लारेंस
     लेनिनग्राद (रूस)
    नेवा

     

     स्तालिनग्राद (रूस)
    वोल्गा
     अकयाब (म्यांमार)
    इरादावी
     डेजिंग (जर्मनी)
    विस्टुला
     अहमदाबाद (भारत)
    साबरमती
     लखनऊ (भारत)
    गोमती
     पाटलिपुत्र (भारत)
    गंगा
     बंगलौर (भारत)
    वृषभावती
     हैदराबाद (भारत)
    मूसी

    और पढ़ें : विभिन्न यंत्रों और उपकरणों के अविष्कार और उनके देश

     

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  • विश्व के प्रमुख औद्योगिक नगर और उसके प्रमुख उद्योग

    विश्व के प्रमुख औद्योगिक नगर और उसके प्रमुख उद्योग

    दुनियां के बहुत सारे नगर ऐसे हैं जो अपने किसी खास उद्योग के लिए प्रसिद्द हैं! वैसे तो उस शहर में और भी बहुत तरह के उद्योग धंधे हैं लेकिन कुछ खास उद्योग के लिए वो शहर पूरे दुनियां में जाना जाता है! आइए जानते हैं की कौन सा नगर किस उद्योग के लिए पूरे दुनियां में प्रसिद्द है :

     

     नगर उद्योग
     बेलफ़ास्ट जहाज निर्माण
     बर्मिंघम लोहा एवं इस्पात
     एसेन
    लोहा एवं इस्पात
     हवाना सिगार

    और पढ़ें : विश्व के प्रमुख खनिज, उत्पादक देश एवं उनके स्थान

     लॉस एंजिल्स
     पेट्रोलियम, फिल्म
     कोबे लोहा इस्पात
     लियोन्स सिल्क उद्योग
     मिलान सिल्क वस्त्र उद्योग
     प्लेमाउथ
    जहाज निर्माण

     

     चेलियाबिंस्क
     लोहा एवं इस्पात
     डेट्रायड
    ऑटो मोबाइल
     ग्लासगो जहाज निर्माण
     हॉलीवुड फिल्म उद्योग
     कंशास मांस उद्योग

     

     कीव  इन्जिनीरिंग उद्योग
     मैनचेस्टर सूती वस्त्र उद्योग
     फिलाडेल्फिया लोकोमोटिव
     पिट्सबर्ग लोहा एवं इस्पात
     शेफील्ड कैंची, छुरी

    और पढ़ें : विश्व की प्रमुख फसलें और उनके उत्पादक देश

     

     वेनिस  काँच उद्योग
     वेलिंगटन डेरी उद्योग
     ढाका कालीन उद्योग
     नागोया जहाज निर्माण, सूती वस्त्र
     सिएटल वायु निर्माण

     

     व्लादिवोस्तक  जहाज निर्माण
     मुल्तान मिटटी के बरतन
     म्यूनिख लेंस निर्माण
     ओसका सूती वस्त्र उद्योग, लोहा इस्पात
     —-

    और पढ़ें : विभिन्न यंत्रों और उपकरणों के अविष्कार और उनके देश

     

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  • विश्व की प्रमुख वनस्पति, जनजातियाँ और उनके आवास

    विश्व की प्रमुख वनस्पति, जनजातियाँ और उनके आवास

    कबीलाई मानवों के कुछ प्रमुख आवास :

    • ऑल (Aul) – यह यूरोप के काकेशस पर्वतीय एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली मानव प्रजाति का तम्बुनुमा आवास है! यह लकड़ी के ऊपर चमड़ा मढ़कर वृताकार ढांचे में बना होता है!
    • इग्लू (Igloo) – यह टुंड्रा प्रदेश के एस्किमो प्रजातियों द्वारा बर्फ से बनाया गया अर्द्ध गोलाकार आवास है!
    • इज्बा (Izba) – यह उतरी रूस के ग्रामीण क्षेत्रों में तिकोनी रंगीन दीवारों से बना मानव आवास है!
    • क्राल (Kral) – यह अफ्रीका के वांटू एवं काफ़िर तथा नेटाल के जुलू प्रजातियों द्वारा घास से बनाया मानव अधिवास है!
    • टिपि (Tipi) – यह रॉकी पर्वत के पूर्वी भागों में निवास करने वाले रेड इंडियन द्वारा निर्मित तम्बू के आकार का आवास है, जो मुख्यतः बिसन बैल के चमड़े से बनाया जाता है!
    • युर्त (Yurt) – यह मध्य एशिया के स्टेपी क्षेत्र के निवासियों खिरगीज, कालमुख और कज्जाक द्वारा पशुओं की खालों से निर्मित अस्थायी मानव आवास है! और पढ़ें : विश्व की प्रमुख फसलें और उनके उत्पादक देश

     

    विश्व की प्रमुख जनजातियाँ :

     जनजाति संबंधित देश/क्षेत्र
     एस्किमो ग्रीनलैंड, कनाडा
     खिरगीज मध्य एशिया
     माओरी
    न्यूजीलैंड
     मसाई पूर्वी अफ्रीका
     वेद्दास श्रीलंका
     नीग्रो मध्य अफ्रीका

     

     सेमांग  मलेशिया
     युकाधिर साइबेरिया
     आइनू जापान
     बुशमैन कालाहारी मरुस्थल (बोत्स्वाना)
     रेड इंडियन
    अमेरिका
     पिग्मिज कांगो बेसिन
     बोरो ब्राज़ील

    और पढ़े : प्रमुख धातुएं एवं उनके अयस्कों की सूचि

     

     इंकाथा  दक्षिण अफ्रीका
     हैदा अमेरिका
     तार्तार साइबेरिया
     बददु अरब
     पपुआन्स न्यू गिनी
     याकू टुंड्रा प्रदेश
     जुलू नेटाल प्रांत (दक्षिण अफ्रीका)

     

    प्रमुख वनस्पति :

     ट्रोपोफाइट
     उष्ण कटिबंधीय जलवायु वाली घास एवं वनस्पति
     हाइग्रोफाइट
    दलदली एवं भूमध्य रेखीय उष्ण आर्द्रता वाली वनस्पति
     जेरोफाइट
    उष्ण कटिबंधीय मरुस्थलीय क्षेत्रों की वनस्पति
     हाइड्रोफाइट
    जलप्लावित क्षेत्रों की वनस्पति
     मेसोफाइट
    शीतोष्ण कटिबंध क्षेत्र की वनस्पति
    क्रायोफाइट टुंड्रा एवं शीत प्रधान क्षेत्रों की वनस्पति
    हैलोफाइट नमकीन क्षेत्र में पायी जाने वाली वनस्पति
    लिथोफाइट कड़ी चट्टानों में उगने वाली वनस्पति

    और पढ़ें : जीव विज्ञान की कुछ प्रमुख शाखाएँ

     

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  • विश्व के प्रमुख खनिज, उत्पादक देश एवं उनके स्थान

    विश्व के प्रमुख खनिज, उत्पादक देश एवं उनके स्थान

    किसी भी देश के अर्थव्यवस्था में वहाँ पाए जाने वाले खनिज सम्पदा का बड़ा महत्व होता है! किसी भी देश के समृधि में उस देश के खनिज उत्पादों का बड़ा योगदान रहता है! इन खनिज उत्पादों के निर्यात से ही इन देशो की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है जिससे वहाँ के नागरिको की भी आर्थिक सम्रद्धि होती है! आइये जानते है विश्व के प्रमुख खनिज उत्पादक देशो के बारे में –

     

     खनिज उत्पादक देश
     लोहा (Iron)
    युक्रेन, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, चीन, अमेरिका, रूस आदि
     तांबा (Copper)
    चिली, अमेरिका, रूस, कनाडा, जायरे, जाम्बिया, पोलैंड, पेरू आदि
     मैंगनीज (Manganese)
    युक्रेन, दक्षिण अफ्रीका, चीन, ऑस्ट्रेलिया, गैबोन, ब्राजील, भारत, आदि
     बॉक्साईट (Bauxite)
    ऑस्ट्रेलिया, चीन, गिनी, जमैका, ब्राजील, सूरीनाम, ग्रीस, भारत, आदि

    और पढ़ें : प्रमुख धातुएं और उसके अयस्कों की सूचि

     

     जस्ता (Zinc)
     कनाडा, जापान, USA, पोलैंड, चीन, ऑस्ट्रेलिया, पेरू, मैक्सिको आदि
     टिन (Tin)
    मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, चीन, बोलीविया आदि
     सोना (Gold)
    द. अफ्रीका, पेरू, कनाडा, चीन, आस्ट्रेलिया, रूस आदि
     चाँदी (Silver)
    मैक्सिको, पेरू, कनाडा, बोलीविया आदि
     हीरा (Diamond)
    अफ्रीका महाद्वीप, रूस, बोत्सवाना, कांगो

     

     अभ्रक (Mica)
     भारत, ब्राजील, रूस, मालागासी, द. अफ्रीका, कनाडा, आदि
     कोयला (Coal)
    चीन, अमेरिका, भारत, जर्मनी, रूस आदि
     खनिज तेल (Mineral Oil)
    USA, रूस, सउदी अरब, चीन, मैक्सिको, ग्रेट ब्रिटेन, इराक, ईरान, कुवैत आदि
     युरेनियम (Uranium)
    कनाडा, नाइजर, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका, जायरे, ऑस्ट्रेलिया, मालागासी आदि
     थोरियम (Thorium)
    ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, भारत, आदि

     

    पारा (Mercury) चीन, मेक्सिको, किर्गिस्तान
    सीसा (Lead) चीन, आस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका
    टंगस्टन (Tungsten) चीन, वियतनाम, रूस
    प्लैटिनम (Platinum) दक्षिण अफ्रीका, रूस, जिम्बाब्वे
    क्रोमियम (Chromium) दक्षिण अफ्रीका, कज़ाखस्तान, तुर्की
    सीमेंट (Cement) चीन, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका
    एल्युमीनियम (Aluminum) चीन, रूस, कनाडा

    और पढ़ें : विश्व की प्रमुख फसलें और उनके उत्पादक देश

     

    कोबाल्ट (Cobalt) कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, रूस, ऑस्ट्रेलिया
    ग्रेफाइट (Graphite) चीन, भारत, ब्राजील
    जिप्सम (Gypsum) चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, ईरान
    पोटाश (Potash) कनाडा, रूस, बेलारूस
    गंधक (Sulfur) कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस
    नमक (Salt) चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत
    सुरमा (Antimony) चीन, रूस, बोलीविया, तजाकिस्तान

     

    निकिल (Nickel)  इंडोनेशिया,फिलीपींस. कनाडा
    क्रोमाइट (Chromite) दक्षिण अफ्रीका, कजाखस्तान, भारत
    बेंटोनाइट (Bentonite) संयुक्त राज्य अमेरिका, तुर्की, भारत
    फेल्सपार (Feldspar) इटली, तुर्की, चीन
    कैडमियम (Cadmium) चीन, जापान, दक्षिण कोरिया

     

    विश्व के प्रमुख खनिज उत्पादक देश की सूची में देशों के नाम भी स्थान के अनुसार दिये गये है! सूचि क्रम के अनुसार :

     खनिज प्रथम स्थान
    द्वितीय स्थान
    तृतीय स्थान
    चतुर्थ स्थान
     लोहा (Iron)
    चीन ऑस्ट्रेलिया ब्राजील भारत
     तांबा (Copper)
    चिली चीन पेरू अमेरिका
    मैंगनीज (Manganese) दक्षिण अफ्रीका चीन ऑस्ट्रेलिया गैबोन
    बॉक्साइट (Bauxite) आस्ट्रेलिया चीन ब्राजील गुयाना
    जस्ता (Zinc) चीन पेरू ऑस्ट्रेलिया अमेरिका
     सोना (Gold)
    चीन ऑस्ट्रेलिया रूस अमेरिका
     चाँदी (Silver)
    मैक्सिको चीन पेरू ऑस्ट्रेलिया
     कोयला (Coal)
    चीन अमेरिका भारत ऑस्ट्रेलिया
     युरेनियम (Uranium)
    कजाकिस्तान कनाडा ऑस्ट्रेलिया नाइजर
      खनिज तेल (Mineral Oil)
    सऊदी अरब संयुक्त राज्य अमेरिका रूस चीन

    और पढ़ें : विभिन्न यंत्रों और उपकरणों के अविष्कार और उनके देश

     

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  • वैज्ञानिक उपकरण एवं यंत्र और उनके उपयोग

    वैज्ञानिक उपकरण एवं यंत्र और उनके उपयोग

    वैज्ञानिक उपकरण और यंत्र से हमारे काम आसानी से हो जाते हैं। वैज्ञानिक उपकरण किसी विज्ञान के कार्य को करने में सुविधा या सरलता या आसानी प्रदान करते हैं। यह उन कार्यों को भी सहजता से कर सकते हैं जो उनके बिना सम्भव ही नहीं होता। वैज्ञानिक उपकरणों एवं उसके उपयोग की सूचि :

     

     वैज्ञानिक उपकरण
    उपयोग / कार्य
    अक्युमुलेटर (Accumulater) : इस उपकरण के द्वारा विद्युत् उर्जा का संग्रह किया जाता है, इस विद्युत् को आवश्यकता पड़ने पर उपयोग किया जा सकता है!
    एयरोमीटर (Aerometer) : इस उपकरण का प्रयोग वायु एवं गैस का भार तथा घनत्व ज्ञात करने में होता है!
    अल्टीमीटर (Altimeter) : इसका उपयोग उड़ते हुए विमान की ऊँचाई नापने के लिए किया जाता है!
    आमीटर (Ammeter) : इसका उपयोग विद्युत् धारा को मापने के लिए किया जाता है!
    अनिमोमीटर (Anemometer) : यह उपकरण हवा की शक्ति तथा गति को मापता है!
    ऑडियोमीटर (Audiometer) : यह उपकरण ध्वनि की तीव्रता मापने के काम में आता है!

     

    ऑडियोफोन (Audioohone) : इसका उपयोग लोग सुनने में सहायता के लिए काम में लगाने के लिए करते हैं!
    बैलिस्टिक गैल्वानोमीटर (Ballistic Galvanometer) : इसका उपयोग लघु धारा को मापने के लिए किया जाता है!
    बैरोग्राफ (Barograph) : इसके द्वारा वायुमंडल के दाब में होने वाले परिवर्तन को मापा जाता है!
    बैरोमीटर (Barometer) : यह उपकरण वायु दाब मापने के काम में आता है!
    बाईनोक्यूलर (Binocular) : यह उपकरण दूर की वस्तुओं को देखने के काम इस्तेमाल होता है!
    कैलीपर्स (Calipers) : इसके द्वारा बेलनाकार वस्तुओं के अंदर तथा बाहर के व्यास मापे जाते हैं तथा इससे वस्तुओं की मोटाई भी मापी जाती है!
    कैलोरीमीटर (Calorimeter) : यह उपकरण ताम्बे का बना होता है और ऊष्मा की मात्र ज्ञात करने के काम में आता है!

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    कारबुरेटर (Carburetter) : इस उपकरण का प्रयोग अंतःदहन पेट्रोल इंजन में होता है! इस यंत्र से पेट्रोल और हवा का मिश्रण बनाया जाता है!
    कार्डियोग्राम (Cardiogram) : इसके द्वारा हृदय गति की जांच की जाती है! इसको इलेक्ट्रो कार्डियोग्राम भी कहा जाता है!
    क्रोनोमीटर (Chronometer) : यह उपकरण जलयानों पर लगा होता है! इससे सही समय का पता चलता है!
    सिनेमाटोग्राफ (Cinematograph) : इस उपकरण को छोटी छोटी फिल्म को बड़ा करके परदे पर लगातार क्रम में प्रक्षेपण के इए प्रयोग किया जाता है!
    कम्पास बॉक्स (Compass Box) : इस उपकरण के द्वारा किसी स्थान पर उत्तर दक्षिण दिशा का ज्ञान होता है!
    कंप्यूटर (Computer) : यह एक प्रकार की गणितीय यांत्रिक व्यवस्था है! इसका उपयोग गणितीय समस्याओं एवं गणनाओं को हल करने में होता है!
    साइकलोट्रोन (Cyclotron) : इस उपकरण की सहायता से आवेशित कणों जैसी नाभिक कण प्रोटोन, इलेक्ट्रान आदि को त्वरित किया जाता है!

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    डेनसिटीमीटर (Densitymeter) : इस उपकरण का प्रयोग घनत्व ज्ञात करने में किया जाता है!
    डीक्टाफोन (Dictaphone) : इसका उपयोग अपनी बात तथा आदेश दुसरे व्यक्ति को सुनाने के लिए रिकॉर्ड किया जाता है! यह प्रायः ऑफिसों में प्रयोग किया जाता है!
    नमनमापी : यह उपकरण किसी स्थान पर नमन कोण मापने के लिए प्रयोग किया जाता है!
    डायनेमोमीटर (Dynamometer) : इस यंत्र का प्रयोग इंजन द्वारा उत्पन्न की गई शक्ति को मापने में होता है!
    ऐपीडास्कोप (Epidiascope) : इसका प्रयोग चित्रों को पर्दे पर प्रक्षेपण के लिए किया जाता है!
    फैदोमीटर (Fathometer) : यह समुद्र की गहराई मापने के काम आता है!
    गैल्वेनोमिटर (Galvanometer) : इस यंत्र का उपयोग छोटे विद्युत् परिपथों में विद्युत् धारा की दिशा एवं मात्रा ज्ञात करने में किया जाता है!

     

    गाइगर मूलर काउंटर (Geiger Muller Counter) : इस उपकरण की सहायता से रेडियो एक्टिव स्रोत के विकिरण की गणना की जाती है!
    ग्रेवीमीटर (Gravimeter) : इस यंत्र के द्वारा पानी की सतह पर तेल की उपस्थिति ज्ञात की जाती है!
    जाइरोस्कोप (Gyroscope) : इस यंत्र से घुमती हुई वस्तुओं की गति एवं दिशा को ज्ञात किया जाता है!
    हाइड्रोमीटर (Hydrometer) : इस उपकरण के द्वारा द्रवों का आपेक्षिक घनत्व ज्ञात करते हैं!
    हाइड्रोफोन (Hydrophone) : यह पानी के अंदर ध्वनि तरंगों की गणना करने में काम आने वाला उपकरण है!
    हाइग्रोमीटर (Hygrometer) : इसकी सहायता से वायुमंडल में व्याप्त आर्द्रता मापी जाती है!
    स्क्रुगेज : इसका प्रयोग बारीक़ तारों के व्यास नापने के काम आता है!

     

    किलोस्कोप : टेलीवीजन द्वारा प्राप्त चित्रों को इस उपकरण के ऊपर देखा जाता है!
    कैडिलोस्कोप : इसके द्वारा रेखा गणितीय आकृति भिन्न भिन्न प्रकार की दिखाई देती है!
    लाइटिंग कंडक्टर : यह उपकरण ऊँची इमारतों के ऊपर उनके ऊँचे भागों पर लगा दिया जाता है, जिससे बिजली का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है और इमारतें सुरक्षित रहती है!
    मेगाफोन : इस उपकरण से ध्वनि को दूर स्थान पर ले जाया जाता है!
    मेनोमीटर : गैस का दाब ज्ञात करने में इसकी मदद ली जाती है!
    माइक्रोमीटर : यह एक प्रकार का पैमाना है जिसकी सहायता से मिमी के हजारवें भाग को ज्ञात कर सकते हैं!
    माइक्रोस्कोप : यह एक प्रकार का पैमाना है जिसकी सहायता से मिमी के हजारवें भाग को ज्ञात कर सकते हैं!

     

    ओडोमीटर : पहिए वाली गाड़ी द्वारा चली दूरी नापने के काम आता है!
    ओसिलोग्राफ : विद्युत् तथा यांत्रिक कम्पनों को ग्राफ पर चित्रित करने वाला उपकरण है!
    पेरिस्कोप : पनडुबियों में उपयोग होने वाला ऐसा उपकरण, जिसकी सहायता से पानी में डूबे हुए को पानी के ऊपर का दृश्य दिखाई पड़ता है!
    पोटेनशियोमीटर : यह विद्युत् वाहक बलों की तुलना करने में, लघु प्रतिरोधों को मापन में तथा वोल्टमीटर व आमीटर के कैलिब्रेशन में काम आता है!
    पायरोमीटर : दूर स्थित वस्तुओं के ताप को ज्ञात करने हेतु इस यंत्र का प्रयोग किया जाता है!
    फोनोमीटर : ध्वनि लेखन के काम आने वाले उपकरण है!
    फोटामीटर : यह दो स्रोतों की प्रदीपन तीव्रता की तुलना करने के काम आता है!

     

    फोटो टेलीग्राफ : यह फोटोग्राफ एक स्थान से दुसरे स्थान पर पहुँचाने वाला उपकरण है!
    साइटोट्रोन : यह कृत्रिम मौसम उत्पन्न करने के काम आने वाला उपकरण है!
    रडार : यह यंत्र अंतरिक्ष में आने जाने वाले वयुयानों के संसूचक और उनकी स्थिति ज्ञात करने के काम आता है!
    रेनगेज : यह वर्षा नापने के काम आने वाला उपकरण है!
    रेडियोमीटर : इस यंत्र का उपयोग विकिरण की माप करने के लिए किया जाता है!
    रेडियो टेलिस्कोप : यह एक ऐसा उपकरण है, जिसकी सहायता से दूर स्थान की घटनाओं बेतार प्रणाली से दुसरे स्थान पर देखा जा सकता है!
    रिफ्रक्ट्रोमीटर : यह पारदर्शक माध्यमों का अपवर्तनांक ज्ञात करने वाला उपकरण है!

     

    सिस्मोग्राफ : यह भूकंप का पता लगाने वाला उपकरण है!
    सेफ्टी लैंप : यह प्रकाश के लिए खानों में उपयोग होने वाला उपकरण है! इसकी सहायता से खानों में होने वाले विस्फोट को बचाया जा सकता है!
    सेक्सटेंट :  यह किसी ऊँचाई को नापने में काम आने वाला उपकरण है!
    स्ट्रोवोस्कोप : आवर्तित गति से घूमने वाली वस्तुओं की चाल को इस उपकरण की सहायता से ज्ञात करते हैं!
    स्पीडो मीटर : यह गति को प्रदर्शित करने वाला उपकरण है, जो की कार, ट्रक आदि में लगाया जाता है!
    सबमेरीन : यह पानी के अंदर चलने वाला छोटा जलयान है, जिसकी सहायता से समुद्र की सतह पर होने वाली हलचल का भी ज्ञान होता है!
    स्फेरोमीटर : यह गोलीय तल की वक्रता की त्रिज्या ज्ञात करने के काम आता है!

     

    विस्कोमीटर : यह द्रवों की श्यानता ज्ञात करने के काम आने वाला उपकरण है!
    टेली फोटोग्राफी : इस उपकरण की सहायता से गतिशील वस्तु का चित्र दुसरे स्थान पर प्रदर्शित किया जा सकता है!
    टेलीप्रिंटर : यह समाचार प्राप्त करने का उपकरण है! इसकी सहायता से स्वतः ही समाचार टाइप होते रहते हैं!
    टेलेक्स : इसके अंतर्गत दो स्थानों के मध्य समाचारों का सीधा आदान प्रदान होता है!
    टेलिस्कोप : इस उपकरण की सहायता से दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देखा जा सकता है!
    टेलस्टार : अंतरिक्ष में स्थित ऐसा उपकरण है, जिसकी सहायता से महाद्वीपों के आर पार टेलीविजन तथा बेतार प्रसारण भेजे जाते हैं, इस उपकरण को अमेरिका ने अंतरिक्ष में स्थापित किया है!
    थर्मोस्टेट : इसके प्रयोग से वस्तु का ताप एक निश्चित बिंदु तक बनाए रखा जाता है!

     

    थियोडोलाइट : यह अनुप्रस्थ तथा लम्बवत कोणों की माप ज्ञात करने के काम आने वाला उपकरण है!
    एक्टियोमीटर : सूर्य किरणों की तीव्रता का निर्धारण करने वाला उपकरण है!
    होबरक्राफ्ट : एक वाहन जो वायु की मोटी गद्दी पर चलता है, यह साधारण भूमि, दलदली, बर्फीले मैदानों, रेगिस्तानों पर तीव्र गति से भाग सकता है!
    टैकोमीटर : यह वायुयान तथा मोटर नाव के इंजन की गति को नापने वाला उपकरण है!

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  • विश्व की प्रमुख फसलें एवं उनके उत्पादक देश

    विश्व की प्रमुख फसलें एवं उनके उत्पादक देश

    विश्व की प्रमुख फसलें और उनके उत्पादक देशों की सूचि! उत्पादन की दृष्टि से किस फसल के उत्पादन में किस देश का कौन सा स्थान है! मोटे अनाज के उत्पादन में प्रथम स्थान पर अमेरिका, दूसरे स्थान पर चीन और तीसरे स्थान पर भारत है!

     

    फसल उत्पादक देश
     चावल चीन, भारत, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, थाईलैंड, म्यांमार
     गेंहू चीन, भारत, सं. रा. अमेरिका, फ्रांस, कनाडा, रूस, युक्रेन
     मक्का सं. रा. अमेरिका, चीन, ब्राजील, मैक्सिको, भारत, पाकिस्तान
     तिलहन ब्राजील, चीन, अर्जेंटीना, भारत

     

    मूंगफली  चीन, भारत, सं. रा. अमेरिका, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, ब्राजील, कोरिया
     कपास चीन, भारत, अमेरिका, पाकिस्तान, सूडान, ब्राजील
     जौ रूस, कनाडा, जर्मनी, स्पेन
     जई रूस, कनाडा, जर्मनी, स्पेन
     सोयाबीन अमेरिका, ब्राजील, अर्जेंटीना, चीन

    और पढ़े : प्रमुख धातुएं एवं उनके अयस्कों की सूचि

     

    मोटे अनाज  अमेरिका, चीन, भारत, रोमानिया
     चाय भारत, चीन, श्रीलंका, कीनिया, जापान, बांग्लादेश, टर्की, युगांडा, मोजाम्बिक
     चुकंदर रूस, फ़्रांस, जर्मनी, अमेरिका
     कहवा ब्राजील, कोलंबिया, आइवरी कोस्ट, मैक्सिको, कीनिया, क्यूबा, भारत
     रबड़ थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, भारत, श्रीलंका

     

    तम्बाकू  चीन, अमेरिका, भारत, ब्राजील, हंगरी, बुल्गारिया, क्यूबा, जिम्बाब्वे
     नारियल मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, नाइजीरिया
     सूर्यमुखी रूस, युक्रेन, अर्जेंटीना, चीन, भारत
     गन्ना भारत, ब्राजील, क्यूबा, चीन, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, मॉरिशस, फिजी
     –

     

    प्रमुख फसलें और उत्पादक देशों के स्थान :

    फसल प्रथम स्थान
    द्वितीय स्थान
    तृतीय स्थान
    चतुर्थ स्थान
     गेंहूँ चीन भारत रूस USA
     चावल चीन भारत इंडोनेशिया बांग्लादेश
     मक्का USA चीन ब्राजील —–
     कपास चीन भारत USA पाकिस्तान
     चाय चीन भारत केन्या श्रीलंका
     गन्ना ब्राजील भारत चीन थाईलैंड

     

    शीर्ष फसल उत्पादक देश :

     फसल
    देश
     वेनीला का सबसे बड़ा उत्पादक
    इंडोनेशिया
     केसर का सबसे बड़ा उत्पादक
    ईरान
     काली मिर्च का सबसे बड़ा उत्पादक
    वियतनाम
     रबड़ का सबसे बड़ा उत्पादक
    थाईलैंड
     मकई का सबसे बड़ा उत्पादक
    संयुक्त राज्य अमेरिका
     इलायची का सबसे बड़ा उत्पादक
    ग्वाटेमाल

     

     काजू का सबसे बड़ा उत्पादक
    वियतनाम
     दालचीनी का सबसे बड़ा उत्पादक
    इंडोनेशिया
     लौंग का सबसे बड़ा उत्पादक
    इंडोनेशिया
     कोको का सबसे बड़ा उत्पादक
    कोटे डी आइवर
     नारियल का सबसे बड़ा उत्पादक
    इंडोनेशिया
     कॉफ़ी का सबसे बड़ा उत्पादक
    ब्राजील
     खजूर का सबसे बड़ा उत्पादक
    मिस्र

     

     संतरे का सबसे बड़ा उत्पादक
    ब्राजील
     पिस्ता का सबसे बड़ा उत्पादक
    ईरान
     क्विनोआ का सबसे बड़ा उत्पादक
    बोलीविया
     स्ट्रॉबेरी का सबसे बड़ा उत्पादक
    चीन
     अखरोट का सबसे बड़ा उत्पादक
    चीन
     खुबानी का सबसे बड़ा उत्पादक
    तुर्की
     बादाम का सबसे बड़ा उत्पादक
    अमेरिका

     

    फसल उत्पादन में भारत का विश्व में स्थान :

     फसल श्रेणी
     बाजरा, नींबू, मौसम्बी, केला, तिल, अदरक, आम, पपीता, जूट, अरंडी के बिज, कुसुम तेल के बिज, कपाससेद
    प्रथम
     गन्ना, गेहूँ, प्याज, आलु, लहसुन, चावल, चाय
    द्वितीय

    और पढ़ें : जीव विज्ञान की कुछ प्रमुख शाखाएँ

     

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  • प्रमुख धातुएं एवं उनके अयस्कों की सूचि

    प्रमुख धातुएं एवं उनके अयस्कों की सूचि

    उन शैलों को अयस्क कहते हैं जिनमें वे खनिज हों जिनमें कोई धातु आदि महत्वपूर्ण तत्व हों, या जिन खनिजों से व्यावसायिक और आर्थिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए धातु निकाले जाते हैं, उन्हें अयस्क कहते हैं, जैसे- बाक्साइट (Al2O32H2O) एल्युमिनियम का एक अयस्क है जिसमें 50-70% एलुमिनियम ऑक्साइड पाया जाता है। अयस्कों को खनन करके बाहर लाया जाता है; फिर इनका शुद्धीकरण करके महत्वपूर्ण तत्व प्राप्त किये जाते हैं। प्रमुख धातुएं और उनके अयस्कों का विवरण निम्नलिखित है –

     

     धातुएं अयस्क
     सोडियम (Na)
    चिली साल्टपीटर, ट्रोना, बोरेक्स, साधारण नमक
     एल्युमिनियम (Al)
    बॉक्साइट, कोरंडम, फेल्सपार, क्रायोलाइट, ऐल्युनाइट, काओलीन
     पोटैशियम (K)
    नाइटर, कार्नेलाइट
     मैग्नेशियम (Mg)
    मैग्नेसाइट, डोलोमाइट, इस्पम लवण, कीसेराइट, कार्नेलाइट
     कैल्सियम (Ca)
    डोलोमाइट, कैलसाइट, जिप्सम, फलोरस्पार, कैल्सियम मैग्नेशियम, सिलिकेट या एस्बेस्टस

    और पढ़ें : विभिन्न यंत्रों और उपकरणों के आविष्कारक और उनके देश

     

     स्ट्रांसियम (Sr)
     स्ट्रांसियनाइट, सिलेसटाइन
     ताम्बा (Cu)
    क्युप्राइट, कॉपर ग्लांस, कॉपर पायराइट
     सिल्वर (Ag)
    रूबी सिल्वर, पायरा गाईराइट, हॉर्न सिल्वर
     सोना (Au)
    काल्वेराइट, सिल्वेनाइट
     बेरियम (Ba)
    बेराइट
     जिंक (Zn)
    जिंक ब्लेंड, कैलेमाइन, जिंकाइट

     

     पारा (Hg)
    सिनेबार
     टिन (Sn)
    केसीटेराइट
     लेड (Pb)
    गैलना
     एन्टिमनी (Sb)
    स्टिबनाइट
     कैडमियम (Cd)
    ग्रिनोकाइट
     बिस्मथ (Bi)
    बिस्मुथईट

     

     लोहा (Fe)
    हेमटाइट, मैग्नेटाइट, लिमोनाइट, सिडेराइट, आयरन पायराइट, कैल्कोपाइराइट
     कोबाल्ट (Co)
    स्मेल्टाइट
     निकेल (Ni)
    मिलेराइट
     क्रोमियम (Cr)
    क्रोमाइट
     मैगनीज (Mn)
    पाइरोल्युसाइट, सिलोमिलिन (मैगनाइट)
     युरेनियम (U)
    कार्नेटाइट, पिंचब्लैड

     

    धातुओं के भौतिक गुण :

    1. धातु चमकदार और तन्य (कोमल) होते हैं अर्थात इन्हें पतले तारों में परिवर्तित किया जा सकता है।
    2. धातु आघातवर्ध्य होते हैं अर्थात इन्हें पतली शीट में परिवर्तित किया जा सकता है।
    3. धातु ठोस होते हैं तथा ऊष्मा और विद्युत के सुचालक होते हैं|
    4. धातु चमकदार होते हैं और इनका घनत्व उच्च होता है।
    5. धातु को द्रव में परिवर्तित किया जा सकता है अर्थात यह गलनशील भी है।

    और पढ़ें : जीव विज्ञान की कुछ प्रमुख शाखाएँ

     

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  • भारत रत्न पुरस्कार और इससे सम्मानित व्यक्ति

    भारत रत्न पुरस्कार और इससे सम्मानित व्यक्ति

    भारत रत्न – यह कला, साहित्य, विज्ञान और बड़े पैमाने पर जनसेवा में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए देश का सबसे बड़ा राष्ट्रिय पुरस्कार है! अब यह पुरस्कार खेल के क्षेत्र में दिया जाने लगा है! इसकी शुरुआत 1954 ई० में हुई थी! यह 26 जनवरी को भारत के राष्ट्रपति के द्वारा ही दी जाती है! इसके मैडल में पीपल के पत्ते के आकार पर सूर्य का चित्र अंकित रहता है! जनता पार्टी द्वारा इस पुरस्कार को 1977 में बंद कर दिया गया था, किंतु 1980 में इसे फिर से शुरू किया गया!

     

    भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति –

     1954  डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, डॉ चंद्रशेखर वेंकटरमण
     1955 डॉ भगवान दास, डॉ मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया, पं० जवाहर लाल नेहरु
     1957 पं० गोविंद वल्लभ पंत
     1958 धुन्धोकेशव कर्वे
     1961 विधान चन्द्र राय, राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन
     1962 डॉ राजेन्द्र प्रसाद
     1963 डॉ जाकिर हुसैन, डॉ पांडुरंग वामन काणे

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     1966  लाल बहादुर शास्त्री (मरणोपरांत पाने वाले पहले प्रथम)
     1971 इंदिरा गाँधी
     1975 वराह वेंकट गिरि
     1976 कुमार स्वामी कामराज (मरणोपरांत)
     1980 मदर टेरेसा
     1983 आचार्य विनोबा भावे (मरणोपरांत)
     1987 खान अब्दुल गफ्फार खान

     

     1988  मखदूम गोपालन रामचंद्रन (मरणोपरांत)
     1990 डॉ भीमराव अम्बेडकर (मरणोपरांत), नेल्सन मंडेला
     1991 राजीव गाँधी (मरणोपरांत), सरदार वल्लभ भाई पटेल (मरणोपरांत), मोरारजी देसाई
     1992 मौलाना अबुल कलाम आजाद (मरणोपरांत), जे आर डी टाटा, सत्यजित राय
     1997 ए पी जे अब्दुल कलाम, गुलजारी लाल नंदा (मरणोपरांत), अरुणा आसिफ अली (मरणोपरांत)
     1998 एम एस सुब्बालक्ष्मी, सी सुब्रह्मण्यम, जयप्रकाश नारायण (मरणोपरांत)
     1999 पंडित रविशंकर, प्रो. अमर्त्य सेन, गोपीनाथ बारदोलोई

     

     2001  लता मंगेशकर, उस्ताद बिस्मिला खां
     2008 भीमसेन जोशी
     2014 सचिन तेंदुलकर, चिंतामणी नगेसा रामचंद्र राव
     2015 मदन मोहन मालवीय, अटल बिहारी बाजपेयी
     2019 प्रणब मुख़र्जी, नानाजी देशमुख, भूपेन हजारिका

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