अक्षर, विभाजन, बलाघात, अनुतान, संगम और वर्ण विच्छेद

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अक्षर ( Akshar : Alphabate ) : अक्षर उस छोटी से छोटी इकाई को कहते हैं, जिसका उच्चारण एक झटके में किया जाता है! पाया, नहा, चलो, आ, चढ़ आदि अक्षर हैं! ये शब्द तो हैं परंतु इनका उच्चारण एक साथ एक झटके में किया जाता है, इसलिए ये अक्षर हैं!

 

हिंदी के अक्षर (Alphabates of Hindi) :

हिंदी के प्रमुखतः निम्नलिखित अक्षर हैं –

  1. स्वर : ओ, आ-ओ
  2. स्वर-व्यंजन : इस्
  3. व्यंजन-स्वर : प (प्+आ)
  4. व्यंजन-स्वर-वयंजन : फट्
  5. व्यंजन-व्यंजन-स्वर : क्या
  6. व्यंजन-व्यंजन-व्यंजन-स्वर : स्त्री
  7. व्यंजन-व्यंजन-स्वर-व्यंजन : प्यास्
  8. स्वर-व्यंजन-व्यंजन : अंत्
  9. स्वर-व्यंजन-व्यंजन-व्यंजन : अस्त्र्
  10. व्यंजन-स्वर-व्यंजन-व्यंजन : संत्
  11. व्यंजन-स्वर-व्यंजन-व्यंजन-व्यंजन : वस्त्र्
  12. व्यंजन-व्यंजन-स्वर-व्यंजन-व्यंजन : प्राप्त्

 

अक्षर विभाजन (Division of Alphabates) :

अक्षर कई प्रकार के होते हैं! हिंदी में एक अक्षरी और अनेक अक्षरी शब्द होते हैं!

हिंदी के लेखन और उच्चारण में अंतर होता है! हिंदी के अक्षरों के अंत में आने वाले ‘अ’ का उच्चारण नहीं होता है! इसका प्रयोग केवल लिखने में होता है! जैसे लेखक – लेख्+क् का उच्चारण होता है, ख्अ क्अ का उच्चारण नहीं होता है! और पढ़ें : वर्तनी व्यवस्था, वर्तनी की अशुद्धियाँ और वर्तनी का मानक रूप

 

बलाघात ( Balaghat : Accent ) :

बलाघात से तात्पर्य है किसी अक्षर या शब्द पर बल देना! किसी शब्द का उच्चारण करते समय अक्षर विशेष पर बल दिया जाता है! वाक्य का उच्चारण करते समय किसी शब्द पर बल दिया जाता है, यही बलाघात है!

 

अनुतान ( Anutaan : Intonation ) :

किसी शब्द अथवा वाक्य का उच्चारण करते समय उसमें सुर के उतार चढ़ाव को अनुतान कहते हैं! अनुतान से तात्पर्य है शब्दों या वाक्यों को उनके भावों के अनुसार बोलना! जैसे – पंडित जसराज आ गएl, पंडित जसराज आ गए?, पंडित जसराज आ गए! तीनों वाक्यों में समान शब्द हैं परंतु तीनों भिन्न भिन्न प्रकार के वाक्य हैं! इनका उच्चारण भिन्न भिन्न रूपों में होगा! अनुतान के कारण इन वाक्यों के अर्थों में परिवर्तन आ गया! विराम चिह्नों के प्रयोग से शब्दों और वाक्यों में अनुतान होता है!

 

संगम ( Sangam : Confluence ) :

दो शब्दों के मध्य दिए जाने वाले विराम को संगम कहते हैं! इसका महत्व उच्चारण और लेखन दोनों की दृष्टियों से महत्वपूर्ण होता है! जिस प्रकार भाषा के मौलिक रूप में शब्दों के अर्थों को स्पष्ट करने के लिए यथासंभव विराम देना आवश्यक होता है! उसी प्रकार भाषा के लिखित रूप में भी शब्दों के मध्य विराम देना आवश्यक होता है! जैसे – पूजाघर में घंटियाँ बजने लगी! पूजा घर चली गई! पूजाघर – पूजा घर का भिन्न भिन्न अर्थ है!

 

वर्ण विच्छेद (Disection of Alphabate ) :

जब किसी शब्द में प्रयुक्त वर्णों को अलग अलग किया जाता है तो उसे वर्ण विच्छेद कहते हैं! जैसे कमल – क्+अ+म्+अ+ल्+अ! वर्तनी की अशुद्धियों से बचने के लिए वर्ण विन्यास का ज्ञान होना बहुत आवश्यक है!

 

‘र’ के विभिन्न रूप :

 

बिंदु ( _._ ) :

हिंदी में बिंदु (अनुस्वार) का प्रयोग बढ़ रहा है! अनुस्वार का चिह्न बिंदु होता है!

 

अर्धचन्द्राकार :

हिंदी में कुछ अंग्रेजी ध्वनियाँ स्थान पा चुकी है! ‘ऑ’ अंग्रेजी की स्वर ध्वनि है! इसका प्रयोग अंग्रेजी के शब्दों में होता है! यह ध्वनि आ और ओ के मध्य की ध्वनि है! जैसे – डॉक्टर, कॉटेज, ऑफिस, फुटबॉल!

 

नुक्ता ( Nukta ) :

अरबी, फारसी, उर्दू, अंग्रेजी भाषा से आए कुछ आगत शब्दों के शुद्ध उच्चारण के लिए उनमें नुक्ता लगाया जाता है!

 

और पढ़ें (Next Post) : हिंदी शब्दों के उच्चारण संबंधी अशुद्धियाँ और उनका निराकरण

 

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