Category: ट्रेवल

  • Pawapuri : पावापुरी सिर्फ एक प्राचीन भारतीय सांस्कृतिक तीर्थ स्थल

    Pawapuri : पावापुरी सिर्फ एक प्राचीन भारतीय सांस्कृतिक तीर्थ स्थल

    पावापुरी, भारत के बिहार राज्य के नालंदा ज़िले जिले में राजगीर और बोधगया के समीप स्थित एक शहर है। यह जैन धर्म के अनुयायियों के लिये एक अत्यंत पवित्र शहर है क्यूंकि माना जाता है कि भगवान महावीर को यहीं मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। यहाँ के जलमंदिर की शोभा देखते ही बनती है। संपूर्ण शहर कैमूर की पहाड़ी पर बसा हुआ है। इस लेख मे हम पावापुरी का इतिहास, पावापुरी जैन तीर्थ हिस्ट्री, पावापुरी के प्रमुख जैन मंदिर आदि के बारें में विस्तार से जानेंगे।

     

    माना जाता है की जिस स्थान पर भगवान् महावीर का अंतिम संस्कार किया गया था उस पवित्र स्थान की भस्म व मिट्टी को उठाते-उठाते वहां एक विशाल सरोवर का निर्माण हो गया जिसमे कमल के फूल खिलने लगे इसी वजह से इस सरोवर को कमल सरोवर के नाम से जाना जाता है। आज के समय में इस सरोवर की लम्बाई 1451 फिट व चौड़ाई 1223 फिट है। कहा जाता है की यहाँ एक मंदिर का निर्माण राजा नंदिवर्धन के द्वारा कराया गया जिसमे भगवान् महावीर की चरण पादुका की स्थापना की गई जो इस कमल सरोवर के मध्य स्थित है। इस मंदिर के दायीं तरफ गौतम के गणधर तथा बायीं तरफ सुधर्मा के गणधर के चरण स्थापित है। इस मंदिर में प्रतिवर्ष कार्तिक अमावस्या के दिन निर्वाण लड्डू चढ़ाने की परंपरा है इसी दिन भगवान महावीर का निर्वाण हुआ था।

     

    दीपावली पर भारत के कोने कोने से जैन धर्म के मानने वाले लोग पावापुरी की यात्रा करते है। क्योंकि दीपावली का त्यौहार यहां महावीर स्वामी के परिनिर्वाण की याद में मनाया जाता है। हर साल दीपावली के मौके पर भगवान महावीर की विशेष पूजा की जाती है। इसमें भाग लेने के लिए कई देशों के श्वेताम्बर व दिगंबर जैन श्रद्धालु आते हैं। कार्तिक अमावस्या की मध्य रात्रि में भगवान महावीर का निर्वाण हुआ था। इसी उपलक्ष्य में हर साल दीपोत्सव पर यहां जैन श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है। इस अवसर पर खास यह होता है कि जलमंदिर (अग्नि संस्कार भूमि) में लड्डू चढ़ाने के लिए श्वेताम्बर व दिगंबर श्रद्धालुओं के बीच अलग-अलग बोली लगती है। दोनों संप्रदायों में अलग-अलग जो ज्यादा बोली लगाते हैं उन्हें सबसे पहले निर्वाण लड्डू चढ़ाने का मौका मिलता है।

     

    13वीं शती ई॰ में जिनप्रभसूरीजी ने अपने ग्रंथ विविध तीर्थ कल्प रूप में इसका प्राचीन नाम अपापा बताया है। पावापुरी का अभिज्ञान बिहार शरीफ रेलवे स्टेशन से 9 मील पर स्थित पावा नामक स्थान से किया गया है। यह स्थान राजगृह से दस मील दूर है। भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण का सूचक एक स्तूप अभी तक यहाँ खंडहर के रूप में स्थित है। स्तूप से प्राप्त ईटें राजगृह के खंडहरों की ईंटों से मिलती-जुलती हैं। जिससे दोनों स्थानों की समकालीनता सिद्ध होती है।

     

    आइए जानते हैं पावापुरी के प्राचीन मंदिरों के बारे में –

    जल मंदिर पावापुरी (Jal temple pawapuri) – यह मंदिर यहां का मुख्य मंदिर है। यहां पर भगवान महावीर स्वामी का दाह संस्कार हुआ था। माना जाता है कि भगवान महावीर स्वामी जी का पुरा शरीर कपूर बनकर उड़ गया था। केवल बाल और नाखून का ही अग्नि संस्कार किया गया था। कहते है कि महावीर स्वामी जी के दाह संस्कार में इतने लोग एकत्रित हुए कि राख उठाते उठाते मिट्टी उठाने लगे। इससे एक छोटे तालाब का रूप बन गया। जिसकों बाद मे बड़ा तालाब का रूप दे दिया गया जो अब 85 बीघे में है। और इसके बीच कमल सरोवर पर एक भव्य मंदिर बनाया गया जो जल मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

     

    श्वेताम्बर जैन मंदिर (Swetamber jain template) – भगवान महावीर स्वामी की इस स्थान पर मृत्यु हुई थी। यहां से भगवान महावीर स्वामी के पार्थिव शरीर को दाह संस्कार के लिए जल मंदिर वाले स्थान पर लाया गया था।

     

    समोसरन मंदिर (Samosaran temple) – भगवान महावीर स्वामी इस स्थान पर उदेश दिया करते थे। उन्होंने इसी स्थान पर प्रथम और अंतिम उपदेश दिया था। अंतिम उपदेश देकर वे यहां से श्वेतांबर जैन मंदिर वाले स्थान पर चले गए थे। जहां उनका देहांत हो गया था।

     

    दिग्म्बर जैन मंदिर (Digambar jain temple) – इस मंदिर के स्थान पर भगवान महावीर स्वामी जी ध्यान करते थे।

     

    दादा गुरूदेव का मंदिर (Dada gurudev temple) – इस मंदिर को दादा बाड़ी मंदिर भी कहते है। यहाँ पर भगवान महावीर स्वामी जी के बाताए गए रास्ते पर चलने वाले गुरूओं का मंदिर है। इस मंदिर में भगवान महावीर स्वामी के प्रथम गणधर, पंचम गणधर श्री सुधर्मा स्वामी तथा भगवान वर्द्धमान तीर्थंकर की मूर्तियां है। यह मंदिर श्री जैन श्वेताम्बर समोसरन मंदिर के निकट है। दोनों मंदिर एक ही जगह में है। यह भगवान महावीर स्वामी जी का आराधना मंदिर भी है।

     

    पहुँचाने के रास्ते –

    सड़क मार्ग – पटना, राजगीर, गया या बिहार के किसी भी शहर से सड़क मार्ग से जुड़ा है, टैक्सी या बस से पावापुरी घुमने आया जा सकता है। रेलमार्ग – पावापुरी बिहार शरीफ रेलवे स्टेशन से लगभग 25 किमी, नालंदा से लगभग 24 किमी तथा राजगीर से 37 किमी की दूरी पर स्थित है, लेकिन निकटतम सुविधाजनक रेलवे स्टेशन पटना में है जो 90 किमी की दूरी पर स्थित है। वायुमार्ग – वैसे तो गया में एक हवाई अड्डा है, लेकिन निकटतम सुविधाजनक हवाई अड्डा पटना है जो लगभग 101 किमी पर है। भारतीय एयरलाइंस पटना को कलकत्ता, बॉम्बे, दिल्ली, रांची और लखनऊ से जोड़ती है।

  • भारत के पर्वतीय भ्रमण स्थल नगर और सम्बंधित राज्य

    भारत के पर्वतीय भ्रमण स्थल नगर और सम्बंधित राज्य

    भारत के प्रमुख पर्वतीय भ्रमण स्थल और उससे सम्बंधित राज्यों की सूचि –

     

     पर्वतीय नगर
    राज्य
     गुलमर्ग जम्मू कश्मीर
     शिमला हिमाचल प्रदेश
     दार्जलिंग पश्चिम बंगाल
     लैंसडाउन
    उत्तराखंड
     मसूरी उत्तराखंड
     मुक्तेश्वर उत्तराखंड
     कसौली हिमाचल प्रदेश

     

     गंगटोक सिक्किम
     रानीखेत उत्तराखंड
     मिरिक पश्चिम बंगाल
     कोटलिम तमिलनाडु
     अल्मोड़ा उत्तराखंड
     सोलन हिमाचल प्रदेश
     येरकार्ड
    तमिलनाडु
     कालिम्पोंग पश्चिम बंगाल

     

     ऊँटी तमिलनाडु
     पहलगांव जम्मू कश्मीर
     कोडाईकनाल
    तमिलनाडु
     डलहौजी हिमाचल प्रदेश
     कोटगिरि
    तमिलनाडु
     नैनीताल उत्तराखंड
     कुन्नूर तमिलनाडु
     मनाली हिमाचल प्रदेश

     

     रांची झारखंड
     श्रीनगर जम्मू कश्मीर
     भुवाली उत्तराखंड
     शिलांग मेघालय
     नंदी हिल्स
    कर्नाटक
     महाबालेश्वर उत्तराखंड
     धर्मशाला हिमाचल प्रदेश
     कुल्लू हिमाचल प्रदेश

    और पढ़ें : विश्व की प्रमुख वनस्पति, जनजातियाँ और उनके आवास

     

     पंचगनी महाराष्ट्र
     पंचमढ़ी मध्यप्रदेश
     केमानगुंडी
    कर्नाटक
     मंडी हिमाचल प्रदेश
     खंडाला महाराष्ट्र
     माउंट आबू
    राजस्थान
     मन्नार केरल
     सपुतारा गुजरात

     

     पेरियार केरल
     लोनावाला महाराष्ट्र

     

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  • भारत के प्रमुख रमणीय और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल

    भारत के प्रमुख रमणीय और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल

    भारत एक बहुत सुंदर देश और प्राचीनं सभ्यता है! यहाँ प्राचीन ऐतिहासिक और रमणीय पर्यटन स्थलों की भरमार है! आइए जानते हैं भारत के प्रमुख ऐतिहासिक और रमणीय पर्यटन स्थल कौन कौन से हैं –

     

    पर्यटन स्थल  स्थान
    केन्हेरी की गुफाएँ मुंबई (महाराष्ट्र)
    एलिफैन्टा की गुफाएँ मुंबई (महाराष्ट्र)
    अजंता की गुफाएँ औरंगाबाद (महाराष्ट्र)
    एलोरा की गुफाएँ औरंगाबाद (महाराष्ट्र)
    कंदरिया महादेव खजुराहो (मध्यप्रदेश)
    मदन महल जबलपुर (मध्यप्रदेश)
    मृगनयनी का महल ग्वालियर (मध्यप्रदेश)

     

    धार का किला  धार (मध्यप्रदेश)
    गोलकुंडा का किला
    हैदराबाद (तेलंगाना)
     कोचीन का किला
    केरल
     विजय स्तंभ
    चित्तौडगढ़ (राजस्थान)
     कुतुबमीनार दिल्ली
     ढाई दिन का झोपड़ा
    अजमेर (राजस्थान)
     हौज खास
    दिल्ली
     तुगलकाबाद दिल्ली

     

     किशोर सागर
    कोटा (राजस्थान)
     अन्ना सागर
    अजमेर (राजस्थान)
     फिरोज शाह कोटला
    दिल्ली
     बूंदी का किला
    बूंदी (राजस्थान)
     हिलती मीनारें
    अहमदाबाद (गुजरात)
     पिछोला झील
    उदयपुर (राजस्थान)
     काकरिया झील
    अहमदाबाद (गुजरात)
     दरगाह अजमेर शरीफ
    अजमेर (राजस्थान)

     

    मेहरगढ़ दुर्ग
     जोधपुर (राजस्थान)
     गगरून का किला
    झालवाड़ (राजस्थान)
     मुसी रानी की छतरी
    अलवर (राजस्थान)
     फतह सागर
    उदयपुर (राजस्थान)
     जय समंद
    उदयपुर (राजस्थान)
     डीग महल
    डीग (राजस्थान)
     सहेलियों की बाड़ी
    उदयपुर (राजस्थान)
     रानी की बाड़ी
    बूंदी (राजस्थान)

     

     छत्र महल
    बूंदी फोर्ट (राजस्थान)
     जूनागढ़ किला
    बीकानेर (राजस्थान)
     कानपुर महल
    धौलपुर (राजस्थान)
     अनिरुद्ध का महल
    बूंदी फोर्ट (राजस्थान)
     जन्तर मन्तर
    जयपुर (राजस्थान), दिल्ली में भी
     नाहरगढ़ फोर्ट
    जयपुर (राजस्थान)
     जगमोहन महल
    कोटा (राजस्थान)
     भरतपुर का किला
    भरतपुर (राजस्थान)

     

     हवामहल जयपुर (जयपुर (राजस्थान)
     सुख निवास
    बूंदी (राजस्थान)
     उम्मेद भवन
    जोधपुर (राजस्थान)
     आराम बाग़
    आगरा (उत्तर प्रदेश)
     लाल किला
    दिल्ली
     हुमायूँ का मकबरा
    दिल्ली
     शालीमार बाग़
    श्रीनगर
     सेंट जार्ज किला
    चेन्नई

     

     शेरशाह का मकबरा
    सासाराम (बिहार)
     डच महल
    कोच्चि (केरल)
     फतेहपुर शिकरी
    आगरा (उत्तर प्रदेश)
     आगरा फोर्ट
    आगरा
     पुराना किला
    दिल्ली
     सती बुर्ज
    मथुरा (उत्तर प्रदेश)
     जहाँगीर महल
    आगरा फोर्ट (उत्तर प्रदेश)
    अकबर का मकबरा
    सिकन्दरा (उत्तर प्रदेश)

     

    अकबर का किला
    इलाहबाद (उत्तर प्रदेश)
     चश्मा शाही
    जम्मू कश्मीर
     इतमादुद्दौला का मकबरा
    आगरा (उत्तर प्रदेश)
     ताजमहल आगरा (उत्तर प्रदेश)
     निशांत बाग़
    जम्मू कश्मीर
     चीनी का रौजा
    आगरा (उत्तर प्रदेश)
     शीश महल
    आगरा
     खास महल
    आगरा

     

     दीवाने ख़ास
    आगरा फोर्ट (उत्तर प्रदेश)
     हाई कोर्ट
    मुंबई (महाराष्ट्र)
     बड़ा इमामबाड़ा
    लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
     छोटा इमामबाड़ा
    लखनऊ
     टीपू का महल
    बंगलुरु (कर्नाटक)
     लाल बाग़
    बंगलुरु
     गोलघर पटना (बिहार)
     पादरी की हवेली
    पटना

     

     विलियम फोर्ट
    कोलकाता (प. बंगाल)
     बीवी का मकबरा
    औरंगाबाद (महाराष्ट्र)
     सफदरजंग का मकबरा
    दिल्ली
     जन्तर मन्तर
    दिल्ली
     विवेकानंद रॉक मेमोरियल
    तमिलनाडु
     वेलुर मठ
    कोलकाता (प. बंगाल)
     आनंद भवन
    इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)
     लक्षमण झुला
    ऋषिकेश (उत्तराखंड)

     

     शांति निकेतन
    पश्चिम बंगाल
     तारापुर का मछली घर
    मुंबई
     साबरमती आश्रम
    अहमदाबाद
     प्रिंस ऑफ़ वेल्स म्यूजियम
    मुंबई
     गेटवे ऑफ़ इंडिया
    मुंबई
     जिम कार्बेट पार्क
    नैनीताल
     इंडिया गेट
    नई दिल्ली
     राष्ट्रपति भवन
    दिल्ली

     

     अफगान चर्च
    मुंबई
     बोटनीकल पार्क
    शिवपुर (कोलकाता)
     सनसेट पॉइंट
    माउंट आबू (राजस्थान)
     चारमिनार हैदराबाद
     कांचीपुरम का मंदिर
    चेन्नई
     मान मंदिर
    ग्वालियर
     कोणार्क मंदिर
    पूरी (ओड़िसा)
     जगन्नाथ मंदिर
    पूरी (ओड़िसा)

     

     चौसठ योगनी मंदिर
    खजुराहो
     चेन्ना केशव मंदिर
    वेलुर
     लक्षमण मंदिर
    छतरपुर (मध्य प्रदेश)
     दिलवाड़ा का जैन मंदिर
    माउंट आबू (राजस्थान)
     गोविंद देव का मंदिर
    वृंदावन (उत्तर प्रदेश)
     राधा वल्लभ मंदिर
    वृंदावन
     विष्णुपद मंदिर
    गया (बिहार)
     हरमंदिर
    पटना

     

     स्वर्णमंदिर की स्वर्णछत
    अमृतसर
     काली मंदिर
    कोलकाता
     जैन मंदिर
    अजमेर
     रंगजी का मंदिर
    वृंदावन
     शाहजी का मंदिर
    वृंदावन
     लक्ष्मी नारायण मंदिर
    दिल्ली
     द्वारिकाधीश का मंदिर
    मथुरा
     खिड़की मस्जिद
    दिल्ली

     

     शेरशाही मस्जिद
    पटना
     मक्का मस्जिद
    हैदराबाद
     जामा मस्जिद
    आगरा और दिल्ली
     मोती मस्जिद
    आगरा फोर्ट, दिल्ली फोर्ट
     हजरतबल मस्जिद
    श्रीनगर
     चरार-ए-शरीफ
    श्रीनगर
     विक्टोरिया मेमोरियल
    कोलकाता
     केंद्रीय सचिवालय
    नई दिल्ली

     

     बराबर की गुफाएँ एवं प्राचीन सिद्धेश्वर नाथ शिव मंदिर
     बराबर (बिहार)
     महाबोधि मंदिर
    बोध गया (बिहार)
     जैन जल मंदिर
    पावापुरी (बिहार)
     प्राचीन नालंदा विश्विद्यालय
    नालंदा (बिहार)
     सप्त कुंड, बौद्ध स्तूप, जरासंध का अखाड़ा
    राजगृह (बिहार)
     बाबा वैद्यनाथ धाम मंदिर
    बाबा धाम (झारखंड)

     

    इसके अलावे भी भारत में बहुत कुछ घुमने लायक है! भारत एक बहुत सुंदर देश है! अगर आप किसी और स्थान को इस लिस्ट में शामिल करना चाहते हैं तो हमसे सम्पर्क करें – Contact Here, Join Us on Twitter  Facebook  Koo  Instagram  Telegram  and  Youtube  or Mail – info@ganganews.com

  • Barabar : बराबर की सप्त गुफाएं, महाभारत कालीन प्राचीन सिद्धेश्वर नाथ मंदिर

    Barabar : बराबर की सप्त गुफाएं, महाभारत कालीन प्राचीन सिद्धेश्वर नाथ मंदिर

    बराबर ( बाणावर ) भारत के बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। ये दो वजहों से प्रसिद्द है, एक तो महाभारत कालीन प्राचीनतम शिवमंदिरों में एक बाबा सिद्धेश्वर नाथ मंदिर के लिए, और दूसरा बराबर की गुफाओं के लिए, जो चट्टानों को काटकर बनाया गया भारत के प्राचीनतम गुफाओं में से एक है। जिनमें से ज्यादातर का संबंध मौर्य काल से है और कुछ में अशोक के समय के शिलालेखों को देखा जा सकता है। ये गुफाएं भारत के बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में गया से 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।

     

    बाणावर की गुफाओं में बराबर की चार गुफाएं और नागार्जुनी तीन गुफाएं जुड़वां पहाड़ियों में स्थित हैं, जिसे सातघर या सतघरवा भी कहा जाता है। पहाड़ों को सावधानी से काट कर हजारों साल पहले इंसान ने इन बेहद सुंदर गुफाओं को बनाया है। बराबर में ज्यादातर गुफाएं दो कक्षों की बनी हैं जिन्हें पूरी तरह से ग्रेनाईट को तराशकर बनाया गया है, जिनमें एक उच्च-स्तरीय पॉलिश युक्त आतंरिक सतह और गूंज का रोमांचक प्रभाव मौजूद है। इस स्थान पर चट्टानों से निर्मित कई बौद्ध और हिंदू मूर्तियां भी पायी गयी हैं। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार पर्वत पर बनी गुफाएं प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों के ध्यान साधना लगाने हेतु सुरक्षा के दृष्टिकोण से बनाई गई थी।

     

    जब इन गुफाओं की दीवारों को देखते हैं, तो लगता है जैसे उन्हें अभी पॉलिश किया गया हो। यह पॉलिश एकदम नयी सी लगती है। इनमें से कई गुफाओं की दीवारों को देखकर आप तब दंग रह जाएंगे जब पाएंगे कि उनकी चिकनाई आज के समय में लगाई जाने वाली टाइल्स से कम नहीं हैं। इसे देखकर यह मानना मुश्किल हो जाता है कि, ये गुफाएँ 2400 साल से ज्यादा पुरानी हैं। मौर्य काल की यह स्थापत्य कला पर्यटकों को आश्चर्य से भर देती है। इन गुफाओं के कारीगरों ने इतनी बड़ी चट्टान को काटकर, उसे तराशकर इतना अच्छा और सुंदर गुबंद न जाने कैसे बनाया होगा, ये अपने आप में एक आश्चर्य जैसा लगता है। बारबर पहाड़ में अवस्थित इन गुफाओं को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है।

     

    बराबर की चार गुफाएँ –

    बराबर पहाड़ी में चार गुफाएं शामिल हैं – कर्ण चौपड़, लोमस ऋषि की गुफा, सुदामा गुफा और विश्व झोपड़ी। सुदामा और लोमस ऋषि गुफाएँ भारत में चट्टानों को काटकर बनायीं जाने वाली गुफाओं की वास्तुकला के सबसे आरंभिक उदाहरण हैं, जिनमें मौर्य काल में निर्मित वास्तुकला संबंधी विवरण मौजूद हैं और बाद की सदियों में यह महाराष्ट्र में पाए जाने वाले अजंता और कार्ला की गुफाओं में चलन के रूप में दीखता है। इसने चट्टानों को काटकर बनायी गयी दक्षिण एशियाई वास्तुकला की परंपराओं को भी काफी हद तक प्रभावित किया है।

    लोमस ऋषि की गुफा – इस गुफा का निर्माण अशोक ने करवाया था। लोमस ऋषि की गुफा एकमात्र ऐसी गुफा है जिसके प्रवेश द्वार पर उत्कीर्णन का काम किया हुआ है। इसके प्रवेश द्वार पर बने मेहराब पर ऐसे दो अर्धवृत्त हैं, जिनमें से ऊपरी अर्धवृत्त पर जाली का काम किया गया तो निचले अर्धवृत्त पर हाथियों की पंक्ति उत्कीर्णित है। मेहराब की तरह के आकार वाली ये लोमस ऋषि गुफा, लकड़ी की समकालीन वास्तुकला से प्रेरित है। इन गुफाओं का निर्माण, इसकी उच्च स्तरीय पॉलिश और बारीक उत्कीर्णन उस समय के भारतीय कारीगरों के उत्कृष्ट कलाकारी एवं वास्तु विशेषज्ञता का एक अद्भुत नमूना है। यहां कई गुफाओं के अंदर भी गुफाएं है जहां तक पहुंचना काफी मुश्किल है।

    सुदामा गुफा – इस गुफा का निर्माण मौर्य सम्राट अशोक द्वारा अपने राज्याभिषेक के बारहवें वर्ष में आजीवक साधुओं के लिए करवाई गयी थी और इसमें एक आयताकार मण्डप के साथ वृत्तीय मेहराबदार कक्ष बना हुआ है।

    कर्ण चौपड़ – इस गुफा का निर्माण अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 19वें वर्ष में कराया था। यह पॉलिश युक्त सतहों के साथ एक एकल आयताकार कमरे के रूप में बना हुआ है जिसमें उस समय के शिलालेख मौजूद है। शिलालेखों के अनुसार इस पहाड़ी को सलाटिका के नाम से भी जाना जाता था। कर्ण चौपड़ गुफा को सुप्रिया गुफा भी कहा जाता था।

    विश्व झोपड़ी – इसमें दो आयताकार कमरे मौजूद हैं जहां चट्टानों में काटकर बनाई गई अशोका सीढियों द्वारा पहुंचा जा सकता है।

     

    नागार्जुनी तीन गुफाएं –

    नागार्जुन के आसपास की गुफाएं बराबर गुफाओं से छोटी एवं नयी हैं। यह गुफाएं बराबर की गुफाओं से थोड़ी दूरी पर स्थित नागार्जुनी पहाड़ी पर स्थित हैं। इनमें तीन गुफाएं शामिल हैं –

    गोपी का गुफा – ये गुफा मौर्यवंशी राजा दशरथ द्वारा आजीविका संप्रदाय के अनुयायियों को समर्पित किया गया था।

    वदिथीका गुफा – यह दरार में स्थित है।

    वापिक गुफा – इसका निर्माण भी मौर्यकालीन माना जाता है। पहाड़ के ऐतिहासिक सप्त गुफाओं में बनी वापिक गुफा में अंकित तथ्यों से ज्ञात होता है कि इसकी स्थापना योगानंद नामक ब्राह्मण ने की थी। इन्हें दशरथ द्वारा आजीविका के अनुयायियों को समर्पित किया गया था।

     

    बराबर और नागार्जुन की गुफाओं की बारे में कुछ प्रचलित जानकारियां –

    • सात गुफ़ाओं में से तीन में अशोक के अभिलेख अंकित हैं।
    • ब्राह्मी लिपि में लिखे अभिलेख इतिहास का जीवंत प्रमाण हैं।
    • नागार्जुन पहाड़ी की तीनों गुफ़ाओं में दशरथ के अभिलेख अंकित हैं।
    • इन गुफ़ाओं में परिवर्ती काल के कुछ अन्य अभिलेख भी हैं।
    • मौर्य काल की बराबर गुफ़ाएँ देश की सबसे पुरानी पत्थरों से काटी गई गुफ़ाएँ हैं।
    • ये गुफ़ाएँ पत्थरों की कटाई वाली वास्तुकला के शानदार उदाहरण हैं।
    • अशोक की प्रमुख गुफ़ाएँ हैं- ‘कर्ण चौपड़’, ‘विश्व झोपड़ी’ और ‘सुदामा गुफ़ा’।
    • दशरथ की गुफ़ाओं में लोमश ऋषि की गुफ़ा तथा गोपिका गुफ़ा उल्लेखनीय है।
    • बराबर पर्वत को मगध का हिमालय भी कहा जाता है।

     

    पातालगंगा तथा अन्य स्पॉट –

    गुफाओं की तरफ बढ़ने से पहले निचे ही पातालगंगा है, जिसका आकार एक छोटे कुंड जैसा है, जो पत्थरों के बिच है। जिसमें बाबा सिद्धेश्वर नाथ के दर्शन करने जाने से पहले श्रद्धालु स्नान करके ही आगे जाना पसंद करते हैं। जहाँ से आगे बढ़ने पर रास्ते में उन्हें प्राचीन सतघरवा गुफाएँ भी मिलती है। फिर थोड़ा आगे बढ़ने पर एक बढ़ा सा तालाब है, जिसमें लोग बोट चलाने का आनंद उठा सकते हैं।

     

    यहां पर एक छोटा सा संग्रहालय भी है, जिसमें इतिहास के विभिन्न पहलुओं को देखा जा सकता है। श्रद्धालु सीढियों से चढ़कर पहाड़ी के ऊपर पहुंचते हैं। ऊपर बाबा सिद्धेश्वर नाथ का मंदिर है, जहाँ पहुँचने के बाद प्रकृति का अद्भुत नजारा दीखता है। आस-पास बिखरी हरियाली प्रकृति के करीब होने का एहसास कराती है। छोटे-बड़े पत्थर कुछ इस तरह से एक दूसरे पर रखे हैं जिसे देखकर लगता है कि प्रकृति ने बड़े ही फुर्सत में इन्हें कलाकृतियों के रूप में सजाया है।

     

    देश का प्राचीन शिव मंदिर बाबा सिद्धेश्वर नाथ –

    सिद्धेश्वर नाथ मंदिर, बराबर पहाड़ियों की सीमा में सबसे ऊंची चोटियों में से एक में स्थित है, जहाँ तक जाने के लिए सीढीयां बनी हुई है। वैसे तो पूरे देश में अनेकों प्राचीन शिव मंदिर हैं, परन्तु जब बात प्राचीनतम शिव मंदिर की हो तो मगध के बराबर पहाड़ पर स्थित सिद्धेश्वर नाथ महादेव मंदिर का नाम सर्वप्रथम आता है। इसे सिद्धनाथ तीर्थ के रूप में भी जाना जाता है। बाबा सिद्धेश्वरनाथ को नौ स्वयंभू नाथों में प्रथम कहा जाता है। इनकी पूजन कथा शिवभक्त वाणासुर से संबंधित होने के कारण इसे ‘वाणेश्वर महादेव भी कहा जाता है।

     

    स्थानीय किंवदंतियों में मंदिर के निर्माण का श्रेय बाना राजा (जारसंध का ससुर) को दिया जाता है। लेकिन मंदिर का गुप्त काल के दौरान बनाया (जीर्णोद्धार किया) जाना भी माना जाता है। लेकिन इस स्थान का नाम ‘बाणावर’ होना इसे अपने आप में बाणासुर अर्थात महाभारत काल से जोड़ता है, तथा इसे महाभारत कालीन जीवंत कृतियों में से एक रूप में मान्यता प्रदान करता है। वैसे तो हजारों साल पुराने इस शिव मंदिर में जल चढ़ाने के लिए वर्षभर श्रद्धालु आते हैं लेकिन सावन और शिवरात्रि में तो यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। इसके अलावा यहां पर लगभग एक महीने के लिए मेले का भी आयोजन होता है, जिसमें भी भक्तों की बहुत भीड़ होती है।

     

    बराबर घुमने का प्लान बनाएँ –

    बराबर श्रद्धालुओं, पिकनिक प्रेमियों, पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए एक जबर्दस्त कॉम्बो पैक है। सिद्धेश्वर नाथ मंदिर की वजह से बराबर एक धार्मिक क्षेत्र तो है ही, अपनी प्राकृतिक छटा की वजह से एक पिकनिक स्पॉट भी है, अक्सर पर्यटक यहां पिकनिक मनाने आते है। इसके साथ ही गुफाओं, अभिलेखों और प्राचीनतम ऐतिहासिक साक्ष्यों तथा कलाकृतियों की मौजूदगी की वजह से यह एक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल भी है, इतिहास और सभ्यतों के साक्ष्य तलासने वाले लोग भी यहाँ आते रहते हैं।

     

    वैसे तो आमतौर पर यहां सालों भर शिव भक्तगण व पर्यटक आते रहते हैं, लेकिन श्रावण मास, बसंत पंचमी एवं  महाशिवरात्री अनंत चतुदर्शी में भक्तों व पर्यटकों का आगमन बड़ी संख्या में होता है। मौसम को देखते हुए बराबर घुमने का सबसे उत्तम समय अक्टूबर से लेकर मार्च तक माना जाता है। यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन की ओर से कई इंतजाम किए गए हैं, सुरक्षा के लिए पुलिस रहती है, वहीं खान-पान और ठहरने की सुविधा भी आसानी से मिल जाती है। अगर अपने व्यस्त जिंदगी से खुद के लिए फुर्सत के दो पल निकालकर जीना चाहते हैं तो अपने परिवार के साथ बराबर की यात्रा का प्लान अवश्य बनाइए, आपको जरुर आनंद और ताजगी महसूस होगी।

     

    बराबर ( बाणावर ) पहुँचाने के रास्ते –

    बराबर के सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन बाणावर हाल्ट है, जो पटना गया रेलखंड पर है। ट्रेन के द्वारा पटना से बराबर जाने में दो से ढाई घंटे का समय लगता है, जबकि गया से बराबर जाने में एक से सवा घंटे का समय लगता है। यह पटना, गया, नालंदा और अरवल से सड़क के माध्यम से भी जुड़ा हुआ है। खासकर यह पटना-गया रोड से अच्छी तरह से जुड़ा है। पटना गया रोड से दो जगहों से बराबर जाने का रास्ता जुड़ता है, एक मखदुमपुर के पास बाणावर द्वार से रास्ता जाता है और दूसरा बेला के पास से बराबर के लिए रास्ता जाता है। निकटतम हवाई अड्डा पटना एवं गया का हवाई अड्डा (Airport) है।

     

    बराबर के आसपास के प्रमुख पर्यटक स्थल – बोध गया – महाबोधि मंदिर, गया – विष्णुपद मंदिर, नालंदा- नालंदा विश्वविद्यालय, राजगृह – सप्त कुंड, बौद्ध स्तूप, जरासंध का अखाड़ा।