Category: राजस्थान

  • Narendra Modi LIVE | Bikaner में विकास परियोजना के सुभारम्भ पर PM Modi का भाषण | Operation Sindoor

    Narendra Modi LIVE | Bikaner में विकास परियोजना के सुभारम्भ पर PM Modi का भाषण | Operation Sindoor

    Narendra Modi LIVE | Bikaner में विकास परियोजना के सुभारम्भ पर PM Modi का भाषण | Operation Sindoor

    इस मौके पर मोदी ने कहा – 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने धर्म पूछकर हमारी बहनों की मांग का सिंदूर उजाड़ दिया था, ऑपरेशन सिन्दूर के जरिए न्याय किया गया. ऑपरेशन सिन्दूर नये भारत का न्याय है, ये भारत का स्वरुप है. अब हम आताकियों और उनके आकाओं में कोई भेद नहीं करेंगे.

  • 100 साल में बना था ये जयपुर का ऐतिहासिक किला, बयां करता है राजपूतों की कहानी!

    Jaipur Amer Fort | राजस्थान भारत का एक ऐसा राज्य है जहां पर राजा-महाराजाओं का वास रहा है। जब भी बहादुरी के किस्से और इतिहास की बात आती है तो इसमें सबसे पहले राजस्थान का ही नाम सामने आता है। क्योंकि यहां पर ऐसे कई किले और धरोहर है जो राजा महाराजाओं का इतिहास बताती है। यही वजह है कि राजस्थान में हर साल लाखों विदेशी घूमने के लिए आते हैं।

     

    इसी फेहरिस्त में आज हम जानेंगे राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित एक ऐसे किले के बारे में जो अपने आप में बहुत अनोखा है। इस किले की इतनी विशेषताएं हैं कि जब आप इसके बारे में जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे। यदि आप इतिहास प्रेमी है तो फिर आप एकदम सही पोस्ट पर आए हैं। आज हम आपको इस वीडियो में बताएंगे कि आखिर आमेर का किला इतना प्रसिद्ध क्यों है और दूर-दूर से लोग इसे देखने क्यों आते हैं? तो चलिए शुरू करते हैं दोस्तों आगे की दास्तां..

     

    बात की जाए आमेर के किले के निर्माण के बारे में तो कहा जाता है कि 16वीं शताब्दी के अंत में राजा मानसिंह ने इसे बनवाया था। हालांकि इसका निर्माण अधूरा रह गया था जिसके बाद इसे सवाई जयसिंह द्वितीय और राजा जयसिंह प्रथम द्वारा पूरा किया गया। कहा जाता है कि इस किले को बनाने के लिए 100 साल का समय लग गया था। वैसे आप इस किले की भव्यता देखकर यह समझ भी जाएंगे कि आखिर इस किले को बनने में इतने साल क्यों लगे? क्योंकि इसकी बनावट बहुत ही सुन्दर है और इस किले की हर एक दीवार कुछ ना कुछ बोलती है।

     

    आमेर के किले में आपको शीला देवी मंदिर भी मिलेगा जिसकी कहानी बहुत दिलचस्प। इतिहासकारों के मुताबिक ऐसा कहा जाता है कि राजा मानसिंह के सपने में देवी काली ने दर्शन दिए थे और उन्होंने राजा मानसिंह को बांग्लादेश के पास एक मूर्ति तलाशने के लिए कहा था। राजा मानसिंह ने भी ठीक वैसेवैसा ही किया जैसा उन्हें देवी काली ने निर्देश दिया था। कहते हैं यहां पर खुदाई के बाद मां की मूर्ति तो नहीं मिली लेकिन राजा मानसिंह कोई बड़ा सा पत्थर मिला जिसे लेकर वह आमेर लौट आए। इसके बाद इसी पत्थर के नाम पर एक मंदिर स्थापित कर दिया गया जिसे शीला देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है।

     

    जब आप इस किले में जाएंगे तो आपको यहां पर एक शीश महल भी दिखाई देगा जो बहुत अनोखा है। यह शीश महल इतना खास है कि यदि यहां एक लाइट भी जलती है तो पूरा शीश महल जगमगा उठता है। कहा जाता है कि इस शीश महल में कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है। दोस्तों इस शीश महल में बॉलीवुड की मशहूर फिल्म ‘मुग़ल-ए-आज़म’ के गाने ‘प्यार किया तो डरना क्या’ की शूटिंग हो चुकी है।

     

    आमेर के किले की सबसे खास बात यह भी है कि इसकी सुरंग सीधे जयगढ़ किले से मिलती है। जी हां दोस्तों आमेर के किले में 2 किलोमीटर लंबी एक सुरंग बनाई गई थी जो सीधा जयगढ़ किले से मिलती है। कहते हैं कि इस सुरंग को राजा की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। यानी की पहले के राजा महाराजा युद्ध को लेकर काफी सजग रहते थे और सुरक्षा में पुख्ता इंतजाम भी करते थे। यही वजह थी कि उन्होंने सुरक्षित बाहर निकलने के लिए आमेर के किले से जयगढ़ किले तक एक सुरंग बनाई। इसी किले में आपको एक सुहाग मंदिर भी दिखेगा जिस पर कई बड़ी-बड़ी खिड़कियां बनी हुई है। कहते हैं इसी सुहाग मंदिर के झरोखों से रानियां शाही दरबार में आए हुए लोग और इसमें होने वाले कार्यक्रम को देखती थी।

     

    यदि आप भी इस किले की खूबसूरती को नजदीक से निहारना चाहते हैं तो यहां घूमने के लिए अक्टूबर से लेकर मार्च तक का महीना सबसे अच्छा माना जाता है। और यहां पर जाना बहुत ही आसान है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा जैसे बड़े-बड़े शहरों से जयपुर के लिए आपको ट्रेन बस आराम से मिल जाएगी। आप यहां जाने के हवाई जहाज का रास्ता भी अपना सकते हैं। बता दे जयपुर से आमेर का किला लगभग 11 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यहां से आप बस या टैक्सी से आराम से जा सकते हैं।

     

    यदि आप एक बार जयपुर पहुंच जाए तो आमेर का किला देखने के अलावा भी आपको जयपुर में कई महल देखने को मिलेंगे। यहां पर आप हवा महल, जयपुर सिटी पैलेस, जंतर मंतर, नाहरगढ़ किला जैसी जगह भी एक्सप्लोर कर सकते हैं। Jaipur | Amer Fort | Incredible India | Rajasthan History

  • एक साधु के श्राप से बर्बाद हो गया ये ऐतिहासिक किला, राजकुमारी को पाने के लिए किया था काला जादू

    Bhangarh | राजस्थान में ऐसी कई खूबसूरत जगहें है जो अपनी खास बनावट के लिए मशहूर है। यहां राजा-महाराजाओं द्वारा बनाए गए कई महल और कई किले हैं जिनको देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। इसी बीच हम आपके लिए लेकर आए हैं राजस्थान के अलवर जिले से एक ऐसा किला जो काफी रहस्य भरा है। चलिए आगे वीडियो में जानते हैं इस किले की पूरी कहानी और सच्चाई क्या है?

     

    राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ का शानदार किला अपनी खूबसूरती से लोगों का ध्यान खींचता है। इस किले की बनावट कुछ ऐसी है जिसे देखने के बाद आप यह अंदाजा लगा पाएंगे कि पहले किस तरह की कारीगरी की जाती थी। ये किला जितना खूबसूरत है उतना ही रहस्यमयी भी है। कई लोगों का मानना है कि यहां पर कोई तांत्रिक चिल्लाता, तो कभी मदद के लिए गुहार लगाती महिलाएं की आवाज सुनाई देती है। यही नहीं दोस्तों, इस किले में टूटती चूड़ियों की आवाज भी सुनाई देती है। यही वह राज है जिसे जानने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। हालांकि इसका रहस्य आज तक कोई नहीं जान पाया।

     

    कहा जाता है कि भानगढ़ के इस किले को 17वीं शताब्दी में राजा माधव सिंह द्वारा बनवाया गया था। माधव सिंह अंबर के महान मुगल सेनापति मानसिंह के छोटे भाई थे। भानगढ़ के इस किले में बड़े-बड़े पांच दरवाजे थे जो इसको संरक्षित रखते थे। इस शाही महल के अलावा यहां पर 9 हजार से भी अधिक घर थे लेकिन धीरे-धीरे यहां की आबादी कम होती गई। इसके बाद यहां पर केवल भव्य रूप से बनी हुई हवेलियां, मंदिर ही रह गए। साथ ही यह किला रह गया जिसमें भूतों का गढ़ माना जाता है।

     

    कहा जाता है कि, इस किले में भूतों का निवास है। यही वजह है कि सूर्य उदय से पहले और सूर्य अस्त के बाद इस किले में पर्यटकों का जाना वर्जित माना गया है। दोस्तों, हम सबसे पहले यह जानते हैं कि आखिर इस किले को भूतिया किला क्यों कहा जाता है? इसके पीछे कई कहानियां है जिसमें से एक कहानी सबसे ज्यादा प्रचलित हुई।

     

    मान्यता है कि यहां पर बाबा बलाऊ नाथ नाम के एक साधु रहा करते थे। बाबा बलाऊ नाथ इस किले के पास ही ध्यान किया करते थे। जब उन्हें पता चला कि यहां पर कीला बनाने का फैसला हुआ तो उन्होंने राजा के सामने एक शर्त रख दी। दरअस, किला बनाने के दौरान साधु ने कहा था कि भानगढ़ में किला या उसके अंदर की कोई भी इमारत उनके घर से ऊंची नहीं होनी चाहिए।

     

    बाबा ने चेतावनी दी थी कि अगर किसी संरचना की छाया साधु के घर पर पड़ती है तो किले के साथ साथ पूरा शहर नष्ट हो जाएगा। लेकिन माधव सिंह के पोते अजब सिंह ने इस चेतावनी को बड़ी आसानी से नजर अंदाज कर दिया और किले की ऊंचाई इतनी ज्यादा बढ़ा दी कि साधु के घर पर इसकी छाया पड़ने लगी। कहते हैं कि साधु का श्राप लग गया और धीरे-धीरे पूरा शहर नष्ट हो गया।

     

    इस किले की कहानी राजकुमारी रत्नावती से भी जुड़ी हुई है। कहा जाता है दोस्तों, राजकुमारी रत्नावती बहुत ही सुंदर थी। इतनी सुंदर कि उन्हें देखने के बाद कोई भी उन्हें पसंद करने लगता था। हर कोई उन्हें पाने की इच्छा रखता था। खैर वे राजकुमारी ठहरी उन्हें पाना हर किसी के बस की बात नहीं। इसी बीच एक तांत्रिक की नजर राजकुमारी पर पड़ी और उसे प्यार हो गया। कहते हैं जब राजकुमारी अपनी सहेलियों के साथ मेले में खरीदारी करने पहुंची तो उस जादूगर ने इत्र खरीदते हुए राजकुमारी को देखा।

     

    तांत्रिक ने बहुत ही होशियारी के साथ राजकुमारी के इस इत्र को ‘लव पोशन’ से बदल दिया। दोस्तों लव पोशन एक जादुई लिक्विड का नाम है। इसके संपर्क में आने के बाद व्यक्ति में शख्स के प्रति प्यार की भावना पैदा कर देता है। लेकिन राजकुमारी उस तांत्रिक से दो गुना तेज निकली और उन्हें तांत्रिक की चाल के बारे में पहले ही पता चल गया। ऐसे में उन्होंने इस इत्र को तुरंत एक बड़े पत्थर पर फेंक दिया और उस लिक्विड का जादू इस पत्थर पर देखने को मिला।

     

    अब उस तांत्रिक ने जो जादू राजकुमारी पर करना चाहा था, वो उस पत्थर पर होने लगा और धीरे-धीरे पत्थर जादूगर की ओर लुढ़कने लगा। फिर क्या था चंद देर में ही तांत्रिक की पत्थर से कुचल जाने से मौत हो गई। कहते हैं इस दौरान तांत्रिक ने शहर को श्राप दिया था कि यह जल्द ही तबाह हो जाएगा और ऐसा हुआ भी। कुछ वक्त के बाद मुगल सेना ने यहां पर कब्जा कर लिया और राजकुमारी रत्नावती सहित किले के कई लोगों को मार डाला।

     

    स्थानीय लोगों का कहना है कि आज भी इस किले से मरे हुए लोगों की आवाज आती है। रात-रात भर यहां पर चूड़ियां छनकाने की भी आवाज सुनाई देती है। कहते हैं आज भी रात को भानगढ़ के किले में लोग भटकते रहते हैं और उनकी आवाज भी सुनाई देती है। वैसे यह एक इत्तेफाक है या फिर कुछ और? ये तो कोई नहीं जानता। लेकिन गुजरे ज़माने से ऐसी कहानी सामने आती रही है।

  • जिंदा इंसान खा गया राजस्थान का ये किला, कई बार आक्रमण से भी नहीं हुआ नष्ट | Kumbhalgarh

    जिंदा इंसान खा गया राजस्थान का ये किला, कई बार आक्रमण से भी नहीं हुआ नष्ट | Kumbhalgarh

    Kumbhalgarh Fort | भारत देश ऐसे ही दुनिया भर में प्रसिद्ध नहीं है। यहां के लोग तो अपने आवभाव से विदेशियों का दिल जीत ही लेते हैं लेकिन यहां की जगह भी ऐसी हैं जो हर किसी को लुभाती है। यही वजह है कि, हर साल कई सैलानी हमारे यहां आते हैं। दोस्तों देश की खूबसूरती की बात हो और इसमें राजस्थान का नाम ना आए ऐसे कैसे हो सकता है? यदि आप राजस्थान के बारे में बात करेंगे तो यहां पर आपको कई ऐसी ऐतिहासिक जगह देखने को मिलेगी जिसकी अपनी एक खासियत होती है। राजस्थान अपनी खूबसूरती के साथ-साथ अपने अनूठी परंपराओं के लिए भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

     

    इसी फेहरिस्त में आज हम आपको बताएंगे राजस्थान में ही स्थित एक ऐसे किले के बारे में जो राजस्थान की शान में भी चार चांद लगाता है। इस किले का नाम है कुंभलगढ़ किला जिसकी खूबसूरती निहारने के लिए लोग दूर-दूर से यहां पर आते हैं। यह किला दिखने में जितना खूबसूरत है उतना ही शानदार इसका इतिहास भी रहा है। यह किला अपनी विशाल दीवारों के लिए जाना जाता है। 36 किलोमीटर तक फैली इसकी दीवारें ‘चीन की ग्रेट वॉल’ के बाद दुनिया की सबसे लंबी दीवारें मानी जाती है।

     

    यह किला राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित अरावली पहाड़ों की पश्चिम श्रृंखला पर उदयपुर से लगभग 84 किलोमीटर दूर है। इस किले का निर्माण 15वीं शताब्दी में मेवाड़ क्षेत्र के शासक राणा कुंभा ने करवाया था। दिलचस्प बात यह है कि यह स्थान महान राजपूत राजा महाराणा प्रताप का जन्म स्थान था। इस किले को इस तरह से बनाया गया था कि इसकी हर एक चीज दुश्मन से बचाने से मदद करती थी। इस किले में 7 दरवाजे हैं, 133 पर्वत चोटियां और कई वाच टावर है जिसके माध्यम से दुश्मनों पर निगरानी रखी जाती थी।

     

    इसके 7 प्रवेश द्वारों का नाम अरेट पोल, हनुमान पोल, राम पोल, विजय पोल, निंबू पोल, पाघरा पोल और टॉप खाना पोल है। दोस्तों यह महल तो अपनी खूबसूरती और बनावटी से लोगों को अपनी ओर खींचता ही है। लेकिन इसकी खासियत एक ये भी है कि इस महल के अंदर भी एक और महल है जिसे ‘बादल महल’ कहा जाता है। जी हां… दोस्तों, यह महल किले के सबसे ऊंचे स्थान पर स्थित है जहां से बादलों का बहुत ही मनमोहन दृश्य दिखाई देता है। इस वजह से इस महल को बादल महल भी कहा जाता है।

     

    इसके अलावा इस किले में शिव मंदिर, वेदी मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर और मम्मदेव मंदिर भी स्थित हैं। अपनी खूबसूरती और खूबियां की वजह से कुंभलगढ़ के इस किले को यूनेस्को धरोहर की सूची में भी शामिल कर लिया गया है। जब पर्यटक इस किले की खूबसूरती को निहारने आते हैं तो यहां पर शानदार लाइट और साउंड शो के माध्यम से किले से जुड़े इतिहास का वर्णन किया जाता है।

     

    किले को लेकर ऐसा कहा जाता है कि जब इसका निर्माण चल रहा था तो इसकी लंबी-लंबी दीवारें बार-बार धसने लगी। ऐसे में एक साधु के कहने पर यहां पर मानव बलि दी गई जिसके बाद इस किले का निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया गया। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो कोई नहीं जानता, लेकिन कहा जाता है कि जिस इंसान की बलि दी गई थी उसका नाम मेहर बाबा था। रिपोर्ट के मुताबिक बलि देने के लिए मेहर बाबा का सर धड़ से अलग कर दिया गया और जहां पर मेहर बाबा का सर गिरा था वहां पर मेहर बाबा का मंदिर भी बनाया गया।

     

    समुद्र तल से तकरीबन 1914 की ऊंचाई पर बना इस किले में एक साथ चार घोड़े जा सकते हैं। इसी किले में करीब 360 मंदिर भी मौजूद है। कहते हैं इस किले में सबसे पहले अलाउद्दीन खिलजी के द्वारा हमला किया गया था। इसके बाद दूसरा हमला इस पर अहमद शाह ने किया हालांकि इन सभी को इस पर असफलता हाथ लगी। यही नहीं दोस्तों, साल 1458,1459 और 1467 में महमूद खिलजी ने इस पर बार-बार आक्रमण किया लेकिन वह हमेशा नाकाम रहे। वही मारवाड़ के राजा उदय सिंह, राजा मानसिंह और गुजरात के मिर्जा ने भी इस किले पर कई बार आक्रमण किया है, किंतु इस किले का कुछ भी नहीं बिगाड़ पाए। Kumbhalgarh Fort | Rajasthan History | Rana Kumbha | Incredible India | Gauravshali Bharat

  • Rana Sanga के अपमान पर संसद में संग्राम, Anurag Thakur का Ramji Lal Suman पर पलटवार

    Rana Sanga के अपमान पर संसद में संग्राम, Anurag Thakur का Ramji Lal Suman पर पलटवार

    WATCH : Rana Sanga के अपमान पर संसद में संग्राम, Anurag Thakur का Samajwadi Party के Ramji Lal Suman पर हमला.

    समाजवादी पार्टी के नेता रामजी लाल सुमन द्वारा, वीर राणा सांगा अर्थात महाराणा संग्राम सिंह के, अपमान का मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है. इसे मुद्दे पर सड़क से लेकर, संसद तक में संग्राम छिड़ गया है.भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने इस अपमान पर पलटवार करते हुए संसद में समाजवादी पार्टी पर जमकर हमला बोला.उन्होंने बिना नाम लिए कहा – मेवाड़ शिरोमणि को तुम नीचा क्या दिखाओगे, मुग़लिया सोच की औलादों. आज अगर राणा सांगा ज़िंदा होते, तो तुम जैसे दूर कौने में बैठ कर टोपियाँ सिल रहे होते.

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    Home Minister Amit Shah | Loksabha Elections 2024 | Rajasthan | Alwar | राजस्थान के अलवर में गृहमंत्री अमित शाह की रैली

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    राजस्थान के कोटपुतली में PM Narendra Modi की रैली

    राजस्थान के कोटपुतली में PM Narendra Modi की रैली| रैली में उंहोने कहा – पिछले दस सालों में जो हुआ वो बस ट्रेलर था, अभी तो बहुत कुछ करना है| देश को बहुत आगे लेकर जाना है| जब भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हैं तो इनके पेट में दर्द उठता है, लेकिन मोदी रुकने वाला नहीं है| दाल बाटी चूरमा, वोटर मारा सुरमा|

  • Amit Shah का राजस्थान में भाजपा के शक्ति केंद्र प्रमुख सम्मेलन में संबोधन

    Amit Shah का राजस्थान में भाजपा के शक्ति केंद्र प्रमुख सम्मेलन में संबोधन

    Amit Shah | अमित शाह का राजस्थान के जोधपुर में भाजपा के शक्ति केंद्र प्रमुख सम्मेलन में संबोधन, कहा – विपक्ष का एक और एक मिलकर ग्यारह जैसा नहीं, शून्य और शून्य मिलकर शून्य जैसा है

  • दिल्ली के बाद अब राजस्थान में पटाखे बेचने और चलाने पर बैन

    दिल्ली के बाद अब राजस्थान में पटाखे बेचने और चलाने पर बैन

    दिल्ली के बाद अब राजस्थान में भी पटाखों पर पाबंदी लगा दी गई है। सरकार ने कोरोना वायरस की तीसरी लहर की संभावना का हवाला देते हुए अगले साल तक पूरे राज्य में सभी तरह के पटाखों को बेचने और चलाने पर रोक लगाने की घोषणा की है। गुरुवार को राजस्थान के गृह विभाग की ओर से इस संबंध में एडवाइजरी जारी की गई। इसके तहत राज्यभर में पटाखों की बिक्री पर बैन 1 अक्टूबर यानी आज से लागू हो रहा है, जो 31 जनवरी 2022 तक जारी रहेगा।

     

    अहम बात यह है कि पटाखों पर बैन ऐसे समय में लगाया जा रहा है, जब आने वाले समय में दशहरा और दिवाली के त्योहार पड़ने वाले हैं। एडवाइजरी में कहा गया है, ‘विशेषज्ञों ने कोरोना की तीसरी लहर की संभावना व्यक्त की है। आतिशबाजी के धुएं के कारण बूढ़े, बीमार, पीड़ित लोगों को बहुत परेशानी होती है। सीओपीडी हो या अस्थमा और कोविड के मरीज पटाखों के धुएं से इन पर काफी असर पड़ता है। ऐसे में इस साल भी पटाखों पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है।’

     

    राजस्थान के गृह विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को आदेश जारी किए हैं, जिसमें पटाखों के अस्थायी लाइसेंस जारी करने पर भी 31 जनवरी तक रोक लगा दी गई है। जिला स्तर पर दिवाली पर बड़ी संख्या में अस्थायी लाइसेंस जारी किए जाते हैं। कोविड मरीजों के लिए सांस लेने में कठिनाई को देखते हुए पिछले साल आतिशबाजी पर रोक लगाई गई थी। इससे पहले दिल्ली सरकार ने भी प्रदूषण और कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए 1 जनवरी 2022 तक पटाखों पर बैन लगाया है।

     

    हाल में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें 28 सितंबर से 1 जनवरी 2022 तक पटाखों पर बैन लगाने की जानकारी दी गई। एडवाइजरी के अनुसार, दिल्ली के एनसीटी के क्षेत्र में एक जनवरी 2022 तक सभी प्रकार के पटाखे फोड़ने और बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। एडवाइजरी में कहा गया कि पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय कई विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार लिया गया है। विशेषज्ञों ने कोरोना के बढ़ने की संभावना की ओर इशारा किया है, क्योंकि वायरस से बचाव के दिशा-निर्देश जैसे मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन किया जा रहा है। इसके अलावा हवा की गुणवत्ता भी खराब हो रही है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है।