Patna Zoo | पटना चिड़ियाघर में एक दिन | Sanjay Gandhi Biological Park | Patna Chidiyaghar | Sanjay Gandhi Jaivik Udyan | कवरेज के दौरान हमारी टीम पहुंची पटना! तो आज हम आपको बताएँगे पटना का मुख्य आकर्षण में से एक संजय गांधी जैविक उद्यान में. बिहार में इसके अतिरिक्त एक और चिड़ियाघर प्रस्तावित है लेकिन फ़िलहाल यह बिहार का एकमात्र चिड़ियाघर है। इसे आम तौर पर ‘पटना जू’, ‘पटना चिड़ियाखाना’ या ‘पटना चिड़ियाघर’ के नाम से जाना जाता है।
संजय गांधी जैविक उद्यान, पटना की स्थापना सन 1969 – 1970 में बिहार सरकार के वन विभाग द्वारा राजभवन के 34 एकड़ भूमि पर वनस्पति उद्यान के रूप में की गई थी। तब इसका नाम गार्डन अर्थात उद्यान रखा गया था. सन 1972 में वन विभाग द्वारा इसका नाम बदलकर जैविक उद्यान कर दिया गया और बाद में अन्य विभागों की भूमि को वन विभाग को हस्तांतरित कर मौजूदा जैविक उद्यान में जोड़ दिया गया। इस प्रकार, जैविक उद्यान का क्षेत्रफल लगभग 153 एकड़ हो गया। और सन 1973 में इसे चिड़ियाघर के रूप में घोषित करके आम लोगों के लिए खोल दिया गया.
23 जून 1980 को विमान हादसे में संजय गांधी की मौत हो गई. उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और संजय गांधी की मां इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थी. तब बिहार में भी कांग्रेस की सरकार थी और बिहार के मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा थे, तब सन 1980 में चिड़ियाघर का नाम जैविक उद्यान के बदले संजय गांधी बायोलॉजिकल पार्क कर दिया गया.
इस चिड़ियाघर में मौजूद जंगली जानवरों की लगभग 108 विभिन्न प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से 50 प्रजातियाँ तो लुप्तप्राय श्रेणी में हैं। पटना चिड़ियाघर में मौजूद जानवरों और पक्षियों की कुल संख्या 1160 से अधिक बताई जाती है। जिसे देखने के लिए हर साल लगभग 25 लाख से अधिक पर्यटक इस चिड़ियाघर को देखने आते हैं. संजय गांधी जैविक उद्यान के अंदर का नजारा बेहद खुबसूरत और हरियाली से भरा होता है. इस वजह से रोजाना मोर्निंग वाक के लिए भी हजारों स्थानीय नागरिक यहाँ आते हैं, जिसके लिए जू प्रशासन की तरफ से पास जारी किया जाता है.
आइए अब हम आपको इस चिड़ियाघर में मौजूद जीवों की प्रजातियों से परिचय करवाते हैं.
पटना चिड़ियाघर में मौजूद जानवरों में एक सींग वाले गैंडा, रॉयल बंगाल टाइगर, व्हाइट टाइगर, ब्लैक बीयर, जिराफ़, साही, तेंदुआ, दरियाई घोड़ा, मगरमच्छ, हाथी, हिमालयी काले भालू, सियार, काले हिरन, चित्तीदार हिरण, मोर, पहाड़ी मैना, घड़ियाल, अजगर, गैंडा, चिंपांज़ी, जिराफ़, ज़ेबरा, एमू और सफ़ेद मोर आदि शामिल हैं।
इस चिड़ियाघर को नंदन कानन चिड़ियाघर, भुवनेश्वर से मार्च के पहले सप्ताह में एक सफेद बाघ मिला था। इसके अलावे इस चिड़ियाघर में ज़ेबरा भी है, जिसे चहलकदमी करते हुए देखना काफी आकर्षक होता है। यहाँ जिराफ की भी अच्छी संख्या है जिन्हें मैदान में घूमते देखना काफी अच्छा लगता है. इस चिड़ियाघर में घड़ियालों की भी अच्छी संख्या है. बताया जाता है की पिछले पांच वर्षों में यहाँ घड़ियालों की संख्या 13 से 129 हो गई है।
पटना का संजय गांधी जैविक उद्यान लुप्तप्राय जानवरों की श्रेणी में शामिल एक सींग वाले गैंडों का भी बसेरा बना हुआ है. यहां ऐसे दस गैंडे हैं, जिसमें से पांच नर और पांच मादा गैंडे हैं. बताया जाता है की यहाँ से अधिक सिर्फ अमरीका के कैलिफोर्निया स्थित सैन डिएगो चिड़ियाघर में ही इस प्रजाति के ग्यारह गैंडे हैं. इस चिड़ियाघर में भारतीय गैंडों के अलावा गैंडों की दूसरी प्रजातियां भी मौजूद हैं. ज़ू के पास अभी गैंडों की ‘चार ब्लड लाइन’ मौजूद है.
चिड़ियागहर में मौजूद विभिन्न आकर्षणों में एक चिम्पैंजी भी है. चिंपांज़ी जिसका वैज्ञानिक नाम है पैन ट्रोग्लोडाइट्स. ऐसा मन जाता है की चिम्पांजी हमारे सबसे करीबी जीवित रिश्तेदार हैं, जो उप-सहारा अफ्रीका के मूल निवासी हैं और कांगो के जंगल में पाए जाते हैं। चिम्पांजी को एक सामाजिक प्राणी भी कहा जाता है और ऐसा माना जाता है कि मानव और चिम्पांजी का पूर्वज एक ही है। चिड़ियाघर में एक नर और एक मादा चिम्पांजी हैं जिनका नाम क्रमशः कार्तिक और सुभद्रा है। इन दोनों जानवरों को 2012 में पशु विनिमय के माध्यम से नंदनकानन चिड़ियाघर, भुवनेश्वर से लाया गया था। इस चिड़ियाघर में एक सांप घर भी है. बताया जाता है की इस सांप घर में 5 प्रजाति के 32 सांप मौजूद हैं।
जानवरों के आलावा इस चिड़ियाघर में पक्षियों की भी अच्छी खासी संख्या संख्या है, जिसमें विभिन्न प्रकार और रंगों के तोता, मैना, चिल, गिद्ध आदि शामिल हैं. यह स्थान पक्षि प्रेमियों के लिए भी एक अच्छा दृश्य प्रदान करता है। इस चिड़ियाघर में बच्चों का मुख्य आकर्षण एक्वेरियम अर्थता मछली घर है जिसका उद्घाटन सन 1993 में हुआ था। मछलीघर में मछलियों की विभिन्न प्रकार के प्रजातियों को देखने का अवसर मिलता है. सफ़ेद, काला, लाल, गुलाबी, पिला विभिन्न रंगों की मछलियाँ जल में अठखेली करते हुए बच्चों को काफी आकर्षित करता है. मछली में थाई एल्बिनो मांगुर, ओरांडा गोल्डफिश, डॉलर मछली, ज़ेबरा मछली, गुलाबी बार्ब मछली जैसे अनेक प्रजातियाँ मौजूद है. बताया जाता है की एक्वेरियम में मछलियों की लगभग 35 प्रजातियां हैं. इस मछलीघर को देखने के लिए प्रवेश टिकट के अतिरिक्त अलग से टिकट लगता है. जो सामान्य प्रवेश शुल्क के बाद सबसे बड़ा राजस्व जनरेटर है।
इसके अतिरिक्त पर्यटकों के आकर्षण का एक केंद्र नौकायन भी है. यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए नौका विहार की सुविधा भी उपलब्ध है। उद्यान के अंदर मौजूद तालाब के आकर का जल उद्यान में नौका की सुविधा भी उपलब्ध है. जो अतिरिक्त शुल्क पर पर्यटकों को उपलब्ध कराइ जाती है.
इस चिड़ियाघर की स्थापना एक वनस्पति उद्यान के रूप में की गई थी, जिसे बाद में चिड़ियाघर में बदला गया. लेकिन अभी भी ये चिड़ियाघर अपने अंदर पेड़ों, जड़ी बूटियों और झाड़ियों की 300 से अधिक प्रजातियों को समेटे हुए है। पौधों के संरक्षण और विकास के लिए यहाँ औषधीय पौधों के लिए एक नर्सरी, एक जलीय उद्यान, एक आर्किड घर, एक फ़र्न हाउस, ग्रीन हाउस, एक ग्लास हाउस और एक गुलाब उद्यान शामिल हैं। खासकर गुलाब उद्यान तो प्रेमी जोड़ों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहता है.
इस चिड़ियाघर में बच्चों के मुख्य आकर्षण के केंद्र हुआ करता था, टॉय ट्रेन. टॉय ट्रेन का ट्रैक कुछ इस तरह बिछाया गया था की ये टॉय ट्रेन चिड़ियाघर के हर एक हिस्से को कवर करता था. टॉय ट्रेन में बैठकर लोग चिड़ियाघर में पशु पक्षी और जानवरों को देखने का आनंद लिया करते थे, लेकिन पिछले कई सालों से तकनिकी कारणों से टॉय ट्रेन बंद है. हालाँकि चिड़ियाघर प्रशासन ये पहल कर रही है की उद्यान में इलेक्ट्रिक टॉय ट्रेन शुरू की जाए. आगंतुकों के लिए चिड़ियाघर प्रशासन की तरफ से यहाँ शौचालय, कैंटीन, पेयजल जैसी सार्वजनिक उपयोगिता की सुविधाओं की भी ठीकठाक व्यवस्था की गई है.
अगर आप पटना जाएं तो एकबार संजय गाँधी जैविक उद्यान (Patna Zoo) घुमा जा सकता है. इसकी रोड, रेल और एयर कनेक्टिविटी बहुत अच्छी है. यह पटना शहर के प्रमुख सड़क बेली रोड पर स्थिति है. इसके आलावा पटना के जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से मात्र पंच मिनट की दुरी पर है. रेल कनेक्टिविटी की बात करें तो पटना जंक्शन से बीस मिनट तो दानापुर रेलवे स्टेशन से मात्र पंद्रह मिनट की दुरी पर है. रेलवे स्टेशन, और एअरपोर्ट से ऑटो, कैब और बस की अच्छी सुविधा है.