Category: UTTARAKHAND

  • नाबालिग बच्ची से रेप करने वाले 65 साल के मोहम्मद उस्मान के पक्ष में हाई कोर्ट का फैसला, घर पर बुलडोजर एक्शन पर लगाई रोक

    नाबालिग बच्ची से रेप करने वाले 65 साल के मोहम्मद उस्मान के पक्ष में हाई कोर्ट का फैसला, घर पर बुलडोजर एक्शन पर लगाई रोक

    नैनीताल में नाबालिग बच्ची से रेप करने वाले 65 साल के मोहम्मद उस्मान के पक्ष में आया हाई कोर्ट का फैसला, घर पर बुलडोजर एक्शन पर लगाई रोक! 10 साल की बच्ची से रेप करने वाले 65 साल के मोहम्मद उस्मान के खिलाफ उबल रहा है पूरा नैनीताल शहर! आरोपी मोहम्मद उस्मान फिलहाल जेल में है।

     

    नैनीताल में नाबालिग से रेप के आरोपित मोहम्मद उस्मान को हाई कोर्ट से राहत मिली है। हालाँकि नगर पालिका ने भी माना कि नोटिस जारी करने में सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन नहीं किया गया। उस्मान को सिर्फ 3 दिन का समय दिया गया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट के द्वार बनाए गए नए नियम के अनुसार 15 दिन का नोटिस देना जरूरी है। नगर पालिका ने उस्मान को अतिक्रमण हटाने का जो नोटिस दिया था, उसे वापस लेगी।

     

    उस्मान के वकील ने हाई कोर्ट में इस नोटिस को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की विशेष पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई में हाई कोर्ट ने रेप के आरोपी उस्मान की गिरफ्तारी के बाद नैनीताल में हुए विरोध प्रदर्शन पर भी नाराजगी जताई और पुलिस को फटकार लगाई। कोर्ट ने ऐसे मामलों में सख्ती बरतने की सलाह दी है।

     

    इसा फैसले से कई सवाल भी उठ रहे हैं, क्या अब आम जनता को प्रदर्शन का भी अधिकार नहीं? प्रदर्शन करने, आगजनी करने और हिंसा करने का भी अधिकार क्या अब सिर्फ विशेष लोगों का ही होगा? और हर अपराधी, आतंकी और बलात्कारी के समर्थन में हमारी व्यवस्थाएं क्यों खड़ी हो जाती है? सवाल वाजिब है, चुभने वाली है, लेकिन सवाल का जवाब व्यवस्था से नहीं मिलने वाला है. जनता खुद जवाब ढूंढे!

  • प्रकृति की गोद में बसा हुआ ये अद्भुत और अलौकिक नाग मंदिर, सांपों का रहता है डेरा

    Nag Devta Temple | Naglok | Pithoragarh | हिमालय की गोद में ऐसी कई अनोखी और अनदेखी जगह मौजूद है जहां आप अपने दोस्तों के साथ पहुंच जाए तो वापस आने का मन ही नहीं करेगा। जगह खूबसूरत है यह अलग बात है लेकिन इन जगहों की भी अपनी खासियत है जिनके कारण यह दुनिया भर में प्रसिद्ध है। आज हम इसी क्रम में आपको बताएंगे उत्तराखंड में मौजूद एक ऐसी आलौकिक जगह के बारे में जिसे देखने के बाद आपका दिल खुश हो जाएगा। तो चलिए जानते हैं इस खास जगह के बारे में.

     

    जिस जगह के बारे में हम बात कर रहे हैं वो पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। यही वजह है कि यह चोटी सैलानियों के बीच काफी लोकप्रिय है। ये उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है। यह समुद्र तल से 1860 मीटर की ऊंचाई पर माैजूद है और अपने प्राकृतिक सौंदर्य और प्राचीन नाग मंदिरों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इस जगह का नाम बैरी नाग है जिसमें नाग देवता के मंदिर है। इस मन्दिर की लोकप्रियता के कारण आसपास वाले इलाके में इस जगह को बेणीनाग कहा जाने लगा। समय बीतने के साथ-साथ इसके नाम में भी बदलाव होते रहे हैं। ये बेणीनाग से बेड़ीनाग हुआ, और फिर ब्रिटिश काल मे बेड़ीनाग से बदलकर बेरीनाग हो गया जो अभी भी इसी नाम से प्रचलित है।

     

    मान्यता है कि, इस जगह का नाम नागवेणी राजा बेनीमाधव के नाम पर रखा गया था। ये भी कहा जाता है कि, काकेशियन आर्यों के इस क्षेत्र में आने से पहले यहां पर नाग वंश का शासनकाल था। वहीं कुछ धार्मिक पक्षकार इन्हें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा पराजित किए गए कालीनाग का वंशज मानते हैं। इस मंदिर के आस-पास कई नाग मंदिर हैं। कहा जाता है कि इन मंदिरों में रहने वाले देवताओं को बहुत शक्तिशाली माना जाता है। जो कोई यहां पर जाता है उसकी इच्छा जरुर पूरी होती है, यही वजह है कि लोग यहां पर दर्शन के लिए आते हैं।

     

    जब आप अपने दोस्तों या परिवार के साथ पहाड़ों से होते हुए इस मंदिर तक पहुंचते हैं तो आपको रास्ते में बहुत ही अद्भुत और अलौकिक दृश्य देखने को मिलते हैं। और यह खूबसूरत दृश्य आपका मनमोह लेने के लिए काफी है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर बेरीनाग में स्थित करौली में है जो एक छोटा सा गांव है।

     

    यहां चारों तरफ ऊंचे ऊंचे पहाड़, खूबसूरत वादियां, हरे-भरे जंगल और घास के मैदान आपको दिखाई देंगे जो इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करते हैं। वैसे तो दोस्तों ये एक छोटी सी जगह है लेकिन इस मंदिर और खूबसूरत पहाड़ियों की वजह से इस लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। हर साल इस मंदिर में कई सैलानी पहुंचते है और इन खूबसूरत वादियों का लुफ्त उठाते हैं।

     

    यहां पर मंदिर के अलावा सूर्य उदय और सूर्य अस्त भी काफी मशहूर है। जी हां… सूर्य अस्त और सूर्य उदय के दौरान यहां पर आपको अद्भुत नजारा देखने को मिलता है और इसी नजारे को देखने के लिए लोग दूर-दूर से इस चोटी पर पहुंचते हैं। जब आप नाग देवता मंदिर घूम ले उसके बाद क्वेराली, धनोली, चिनेश्वर जलप्रपात, भाटी गांव, कलिसन मंदिर और बाना गांव भी घूम सकते हैं। यहां आप हसीन वादियों में सुकून भरे पल ब‍िता सकते हैं।। इस पहाड़ी में आप ऊंचे ऊंचे पहाड़ के साथ-साथ बड़े-बड़े देवदार के वृक्ष देख सकते हैं। यहां पर कई सेल्फी प्वाइंट भी बने हुए हैं। आप चाहे तो इस चोटी पर ट्रैकिंग का मजा भी ले सकते हैं।

     

    इस जगह की सबसे खास बात ये है कि, यहां का वातावरण अत्यंत शांत और प्रदूषणमुक्त है। यही नहीं दोस्तों यहां की हरियाली, दुर्लभ पक्षी और वन्य जीव इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं। यदि आप यहां पर पहुँचते हैं तो यह की ठंडी जलवायु और ताजगी से भरी हवा एक नई ऊर्जा प्रदान करती है।

     

    यदि आपने इस स्थान को नहीं देखा है तो बड़ी आसानी से आप यहां जा सकते हैं। इसके लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर और निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है। वहीं सड़क मार्ग से यह हल्द्वानी, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ से जुड़ा हुआ है। बात करें यहां घूमने के समय के बारे में तो आप मार्च से जून और सितंबर से नवंबर के बीच यहां जा सकते हैं। इस दौरान बेरीनाग का मौसम सुहावना रहता है और हिमालय की चोटियां साफ दिखाई देती हैं। Naglok | Uttarakhand | Pithoragarh | Nag Madir

  • ऐसा हुआ तो लुप्त हो सकता है बद्रीनाथ मंदिर? जानें इसके रहस्यमयी तथ्य | Badrinath Temple

    ऐसा हुआ तो लुप्त हो सकता है बद्रीनाथ मंदिर? जानें इसके रहस्यमयी तथ्य | Badrinath Temple

    Badrinath Temple | जब भी बात होती है उत्तराखंड की तो आंखों के सामने बर्फीले पहाड़, खूबसूरत वादियां अपने आप ही आ जाती है। देवभूमि के नाम से मशहूर उत्तराखंड को छोटे चार धाम के रूप में भी जाना जाता है। यहां पर मौजूद बद्रीनाथ मंदिर के बारे में तो आपने सुना ही होगा। यहां पर हर साल एक ऐसी घटना घटित होती है जिसे यह लगता है कि जल्दी ही यह मंदिर नष्ट हो जाएगा लेकिन इस मंदिर को खरोच तक नहीं आती। ये अपने आप में ही एक बड़ा रहस्य है। हर साल ये मंदिर भारी बर्फ से ढक जाता है और फिर इसका पूर्ण रूप से सुरक्षित निकल आना किसी चमत्कार से कम नहीं। चलिए जानते हैं इस मंदिर की विशेषताओं के बारे में.

     

    दुनिया भर में प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम कई रहस्य है। अभी तक आप यहां गए या नहीं गए हैं यह तो हम नहीं जानते लेकिन आपके मन में कभी यह ख्याल आया कि यहां पर ऐसी कई घटनाएं घटित हुई है जिसका कोई वैज्ञानिक कारण नहीं है। जैसे कि, यह 6 महीने के लिए पूरी तरह से बंद हो जाता है, इसके बावजूद इसमें जलने वाली अखंड ज्योति 6 महीने तक जलती रहती है। यह अपने आप में एक बड़ा रहस्य है। सोचने वाली बात है कि क्या यह एक अदृश्य शक्ति है या फिर कुछ और है जो इस दिव्य प्रकाश को 6 महीने तक जलाए रखती है। कपाट बंद होने के बावजूद यह दिव्य शक्ति बुझती नहीं।

     

    जब कपाट खुलते है तो यहां पर ताजे फूल भी मिलते है जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। ऐसे में सवाल पैदा होते है कि, ऐसी कौनसी अदृश्य शक्ति है जो 6 महीने तक इस मंदिर की रक्षा करती है। अक्सर आपने देखा होगा मंदिरों में शंख बजाना शुभ माना जाता है। वही भगवान विष्णु को तो शंख बहुत पसंद है लेकिन भगवान विष्णु को समर्पित बद्रीनाथ के इस मंदिर में कभी भी शंख नहीं बजाया जाता। इसके पीछे बड़ा सवाल निकाल कर आता है कि आखिर ऐसा क्यों? इसकी खास वजह क्या है?

     

    दरअसल, बद्रीनाथ में शंख न बजाने के पीछे कई वैज्ञानिक फैक्ट जुड़े हुए हैं। अगर यहां शंख बजता है तो उसकी ध्वनि पहाड़ों से टकराकर प्रतिध्वनि पैदा करती है। इस कारण बर्फ में दरार पड़ने या फिर बर्फीले तूफान आने की आशंका बन सकती है। वहीं वैज्ञानिकों का मानना है कि, पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड भी हो सकता है।

     

    बात की जाए इस मंदिर की उत्पत्ति के बारे में तो विष्णु पुराण बद्रीनाथ की उत्पत्ति का एक संस्करण बताता है कि यम के दो पुत्र थे नर और नारायण जिन्होंने धर्म के प्रसार के लिए इसी पवित्र स्थान को चुना था। इस मंदिर की स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी। मंदिर के पास एक विशाल वृक्ष भी है। इस दौरान देवी लक्ष्मी ने बेरी के पेड़ के रूप में उनकी रक्षा की थी।

     

    मान्यता है कि, भगवान विष्णु लक्ष्मी की भक्ति से प्रभावित हुए और पेड़ का नाम बद्री विशाल रखा। तीर्थस्थल का नाम इसी पेड़ के नाम पर रखा गया है। बेरी को बद्री के नाम से जाना जाता था और देवी लक्ष्मी ने उस समय भगवान विष्णु का नाम बद्रीनाथ रखा था। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु एक बार इस पेड़ के पास ध्यान करने के लिए बैठे थे। ऐसे में तीर्थ स्थल लोग भी बद्रीनाथ आते हैं तो इस पेड़ के नीचे बैठकर आत्मज्ञान की तलाश में ध्यान लगाते हैं

     

    बद्रीनाथ मंदिर के पास एक गर्म कुंड भी है जिसका पानी हमेशा गर्म रहता है। हैरान कर देने वाली बात यह है कि चारों ओर से बर्फ से ढके इस पहाड़ में आखिर कैसे इस कुंड में गर्म पानी रह सकता है। इसके पीछे कि मान्यता है कि, यह भगवान अग्नि देव का निवास स्थान है जिसके कारण इसका पानी हमेशा गर्म रहता है।

     

    ऐसा भी कहा जाता है कि यह मंदिर जल्द ही विलुप्त हो सकता है। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण यह बताया जाता है कि बद्रीनाथ धाम दो पर्वतों नर और नारायण के बीच स्थित है। बद्रीनाथ मंदिर का जोशीमठ के नरसिम्हा मंदिर से गहरा संबंध बताया जाता है। कहा जाता है कि नरसिंह मंदिर की एक भुजा समय के साथ पतली होती जा रही है। वहीं स्थानीय लोगों ने बताया कि जिस दिन यह टूट जाएगा नर और नारायण पर्वत विलीन हो जाएंगे। उसके बाद बद्रीनाथ मंदिर भी विलुप्त हो जाएगा और शायद ही कोई फिर इसका दर्शन कर पाए। Badrinath Temple | Uttarakhand History | Sanatan Religion | Badrinath History | Badrinath Mystery | Ganga News