Category: बिहार

  • सम्राट चौधरी से मिले गौतम अदाणी, बिहार में 60,000 करोड़ के निवेश का ऐलान

    सम्राट चौधरी से मिले गौतम अदाणी, बिहार में 60,000 करोड़ के निवेश का ऐलान

    बिहार के सारण जिले के मस्‍तीचक में अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल में अदाणी आई केयर प्रोजेक्‍ट की शुरुआत हो गई है. इस प्रोजेक्‍ट के उद्घाटन के लिए अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी (Gautam Adani) और अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन गौतम अदाणी की पत्नी प्रीति अदाणी रविवार सुबह बिहार पहुंचे. अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल के उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा कि अगले 3 से 4 सालों में बिहार में 60 हजार करोड़ का निवेश किया जाएगा.

     

    सारण में अस्पताल का उद्घाटन करने के बाद गौतम अदाणी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास पर उनसे मिलने पहुंचे. गौतम अदाणी के साथ हुई मुलाकात की जानकारी सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया एक्स पर दी. उन्होंने अपने X अकाउंट पर लिखा “देश के प्रसिद्ध उद्योगपति एवं अदानी समूह के चेयरमैन श्री गौतम अदाणी जी ने शिष्टाचार मुलाकात की. उन्होंने बिहार के विकास के लिए हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया.”

     


    अस्पताल उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान गौतम अदाणी ने कहा कि अदाणी ग्रुप का लक्ष्य अगले तीन से चार सालों के अंदर बिहार के इन्फ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह बदलने का है इसके लिए ग्रुप राज्य में 50,000 करोड़ रुपये से लेकर 60,000 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम निवेश करने जा रहा है.

    गौतम अदाणी ने आगे कहा,”बिहार में अपार संभावनाएं हैं. हम यहां के इन्फ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और सोशल सेक्टर को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. भागलपुर जिले के पीरपैंती में 2,400 मेगावाट के पावर प्रोजेक्ट का शिलान्यास पहले ही किया जा चुका है और इस पर काम तेजी से चल रहा है. इसके साथ ही राज्य में कई रोड प्रोजेक्ट्स पर भी हमारा ग्रुप तेजी से काम कर रहा है.”

  • Bihar Election | सीटों के पेंच में उलझे NDA के जातीय समीकरण में Tejashwi Yadav की सेंधमारी

    Bihar Election | सीटों के पेंच में उलझे NDA के जातीय समीकरण में Tejashwi Yadav की सेंधमारी

    Bihar Election | सीटों के पेंच में उलझे NDA के जातीय समीकरण में Tejashwi Yadav की सेंधमारी | बिहार के चुनाव में पहले चरण के लिए नामांकन शुरू हो चूका है लेकिन दोनों तरफ के गठबंधन के बिच अभी सीटों का बंटवारा नहीं हो पाया है. NDA और महागठबंधन के दलों के बिच सीटों के बंटवारे को लेकर अभी भी खींचतान का दौर जारी है. जहाँ शुरुआत में NDA का जातिय समीकरण काफी मजबूत दिख रहा था, वहीँ राजद के नेतृत्व में महागठबंधन, जातिय समीकरण की रेस में पिछड़ता दिख रहा था. लेकिन बदलते समीकरणों के बिच बिहार का चुनाव अब दूसरी करवट लेने लगा है. ये चुनाव अब कहीं से भी NDA के लिए आसन नहीं दिख रहा है.

     

    इसकी एक बड़ी वजह है तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) का ग्राउंड लेवल पर माइक्रो मैनेजमेंट और कागजों पर मजबूत दिख रहे NDA के जातिय समीकरण में सेंध लगाने की रणनीति. जहाँ एक तरफ NDA की मीटिंग और रणनीति सिर्फ बड़े जातिय नेताओं को साधने तक सिमित हो चुकी है, वहीँ तेजस्वी अपनी नई रणनीति के तहत जमीनी और क्षेत्रीय लेवल के सामाजिक नेताओं और NDA के वोट बैंक वाले स्थानीय नेताओं को साधने पर काम कर कर रहे हैं.

     

    अगर पिछले दिनों राष्ट्रिय जनता दल में नेताओं के शामिल होने के ट्रेंड को देखें तो इस रणनीति की झलक साफ़ तौर पर देखी जा सकती है. इनमें ज्यादातर नेता वो हैं जिनकी पकड़ अपने क्षेत्र में अपनी जाति या समुदाय पर काफी है, और दिलचस्प बात ये है की ये सभी वर्ग पारंपरिक रूप से भाजपा या जदयू का वोटर रहा है. पिछले दिनों बांका के मौजूदा जदयू सांसद गिरधारी यादव (Girdhari Yadav) के बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन (Chanakya Prakash Ranjan) ने तेजस्वी यादव की राष्ट्रीय जनता दल का दामन थाम लिया। जदयू के ही संतोष कुशवाहा (Santosh Kushwaha) और राहुल शर्मा (Rahul Sharma) ने भी राजद ज्वाइन कर लिया. खबर तो ये भी है की कभी लोजपा सांसद रहे बाहुबली नेता सूरजभान सिंह (Surajbhan Singh) भी परिवार के साथ राजद ज्वाइन करने वाले हैं. ये सभी वो नेता हैं जिनका अपने क्षेत्र में और अपने समाज पर काफी प्रभाव है. ये लोग न सिर्फ अपने क्षेत्र में बल्कि आस पास की सीटों पर भी NDA का खेल ख़राब कर सकते हैं. इसके आलावा राजद, जनता के बिच भी ये संदेश देने में भी सफल दिख रहा है की राजद अब सिर्फ कुछ जातियों सिमित नहीं है, बल्कि सर्वसमाज के प्रतिनिधित्व के साथ आगे बढ़ेगी.

     

    दूसरी बड़ी वजह जो NDA के लिए चुनौती बन रही है वो है, वर्तमान समय में चल रहे जातिय ध्रुवीकरण वाली राजनीति, जो खासकर भाजपा के लिए हमेशा से चुनौती रही है. जब जब जातिय ध्रुवीकरण हुआ है भाजपा को हार मिली है. भाजपा हमेशा अपना चुनावी दंगल हिंदुत्व और हिन्दू एकता के अखाड़े में लड़ना चाहती है. लेकिन मध्यप्रदेश प्रकरण से लेकर CJI जूता काण्ड तक जो जातिय ध्रुवीकरण शुरू हुआ है वो भी भी NDA की परेशानी एक बड़ी वजह बन रही है.

     

    शायद यही वजह है जिसने कभी आराम से बिहार का चुनाव जीतने के प्रति आश्वस्त दिख रहे NDA को चुनाव से पहले विचलित कर दिया है. NDA नेतृत्व इस रणनीति की काट खोजने में लग गयी है. नए नए जातिय और स्थानीय नेताओं की जोइनिंग की रणनीति बनाई जा रही है. टिकट कटने से नाराज राजद नेताओं के जोइनिंग पर भी विचार चल रहा है. हालाँकि वास्तविकता ये है की NDA अभी भी सीटों के खींचतान में ही उलझी हुई दिख रही है.

     

    NDA के नेता उपेन्द्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) ने अपने एक पोस्ट से NDA के दलों के बिच सीटों का समझौता फाइनल होने के दावे की पोल खोल दी. उपेन्द्र कुशवाहा ने अपने पोस्ट में लिखा “’इधर-उधर की खबरों पर मत जाइए। वार्ता अभी पूरी नहीं हुई है। इंतजार कीजिए! मीडिया में कैसे खबर चल रही है, मुझको नहीं पता। अगर कोई खबर प्लांट कर रहा है तो यह छल है, धोखा है। आप लोग ऐसे ही सजग रहिए”. उपेंद्र कुशवाहा की इस पोस्ट ने न सिर्फ बिहार चुनाव के बिच सियासी खलबली मचा दी, NDA के दलों के बिच सहमती बनने के उस दावे की भी हवा निकाल दी, जिसमें ये दावा किया जा रहा था की की NDA बिच सहमती बन गयी है. जिसमें नीतीश कुमार की जेडीयू 101 सीट, बीजेपी 100 सीट, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास 26 सीट, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा 7 सीट और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा 6 सीट पर चुनाव लड़ेगी।

     

    अगर सबकुछ तय हो ही गया है तो NDA के सभी सहयोगी दल के नेता क्षेत्र में जाने के बजाय दिल्ली में क्यों जुट रहे हैं? केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी (Jitanram Manjhi) ने पोस्ट कर लिखा की “एनडीए में सीट बंटवारे पर फैसला होना है। हम एनडीए के गठबंधन सहयोगी हैं, एनडीए के नेता दिल्ली में हैं, और हम भी अब दिल्ली जा रहे हैं। हम अनुशासित लोग हैं और हम अनुशासन में ही रहेंगे।”

     

    एक तरफ तेजस्वी यादव युवाओं से लेकर सर्वसमाज तक को जोड़कर चुनाव जीतने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. वहीँ दूसरी तरफ NDA अभी तक सीटों के बंटवारे और दलों के दलदल में फंसा हुआ दिख रहा है. हालाँकि बिहार का चुनाव अभी भी काफी खुला हुआ है, लेकिन दोनों गठबंधनों के लिए अभी भी दूर की कौड़ी लग रही है क्योंकि सीटों का पेंच तो अभी महागठबंधन में भी फंसा हुआ है. इसके अलावे बहुत सारी सीटों पर दोनों गठबंधन को नई नवेली जनसुराज से भी चुनौती मिलने वाली है. अब इस तेजी से बदलते समीकरण के बिच बिहार चुनाव का ऊंट किस करवट बैठता है ये तो आने वाला समय ही बताएगा.

  • Patna Zoo | पटना चिड़ियाघर में एक दिन | Sanjay Gandhi Biological Park | Patna Chidiyaghar

    Patna Zoo | पटना चिड़ियाघर में एक दिन | Sanjay Gandhi Biological Park | Patna Chidiyaghar

    Patna Zoo | पटना चिड़ियाघर में एक दिन | Sanjay Gandhi Biological Park | Patna Chidiyaghar | Sanjay Gandhi Jaivik Udyan | कवरेज के दौरान हमारी टीम पहुंची पटना! तो आज हम आपको बताएँगे पटना का मुख्य आकर्षण में से एक संजय गांधी जैविक उद्यान में. बिहार में इसके अतिरिक्त एक और चिड़ियाघर प्रस्तावित है लेकिन फ़िलहाल यह बिहार का एकमात्र चिड़ियाघर है। इसे आम तौर पर ‘पटना जू’, ‘पटना चिड़ियाखाना’ या ‘पटना चिड़ियाघर’ के नाम से जाना जाता है।

     

    संजय गांधी जैविक उद्यान, पटना की स्थापना सन 1969 – 1970 में बिहार सरकार के वन विभाग द्वारा राजभवन के 34 एकड़ भूमि पर वनस्पति उद्यान के रूप में की गई थी। तब इसका नाम गार्डन अर्थात उद्यान रखा गया था. सन 1972 में वन विभाग द्वारा इसका नाम बदलकर जैविक उद्यान कर दिया गया और बाद में अन्य विभागों की भूमि को वन विभाग को हस्तांतरित कर मौजूदा जैविक उद्यान में जोड़ दिया गया। इस प्रकार, जैविक उद्यान का क्षेत्रफल लगभग 153 एकड़ हो गया। और सन 1973 में इसे चिड़ियाघर के रूप में घोषित करके आम लोगों के लिए खोल दिया गया.

     

    23 जून 1980 को विमान हादसे में संजय गांधी की मौत हो गई. उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और संजय गांधी की मां इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थी. तब बिहार में भी कांग्रेस की सरकार थी और बिहार के मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा थे, तब सन 1980 में चिड़ियाघर का नाम जैविक उद्यान के बदले संजय गांधी बायोलॉजिकल पार्क कर दिया गया.
    इस चिड़ियाघर में मौजूद जंगली जानवरों की लगभग 108 विभिन्न प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से 50 प्रजातियाँ तो लुप्तप्राय श्रेणी में हैं। पटना चिड़ियाघर में मौजूद जानवरों और पक्षियों की कुल संख्या 1160 से अधिक बताई जाती है। जिसे देखने के लिए हर साल लगभग 25 लाख से अधिक पर्यटक इस चिड़ियाघर को देखने आते हैं. संजय गांधी जैविक उद्यान के अंदर का नजारा बेहद खुबसूरत और हरियाली से भरा होता है. इस वजह से रोजाना मोर्निंग वाक के लिए भी हजारों स्थानीय नागरिक यहाँ आते हैं, जिसके लिए जू प्रशासन की तरफ से पास जारी किया जाता है.

     

    आइए अब हम आपको इस चिड़ियाघर में मौजूद जीवों की प्रजातियों से परिचय करवाते हैं.

    पटना चिड़ियाघर में मौजूद जानवरों में एक सींग वाले गैंडा, रॉयल बंगाल टाइगर, व्हाइट टाइगर, ब्लैक बीयर, जिराफ़, साही, तेंदुआ, दरियाई घोड़ा, मगरमच्छ, हाथी, हिमालयी काले भालू, सियार, काले हिरन, चित्तीदार हिरण, मोर, पहाड़ी मैना, घड़ियाल, अजगर, गैंडा, चिंपांज़ी, जिराफ़, ज़ेबरा, एमू और सफ़ेद मोर आदि शामिल हैं।

     

    इस चिड़ियाघर को नंदन कानन चिड़ियाघर, भुवनेश्वर से मार्च के पहले सप्ताह में एक सफेद बाघ मिला था। इसके अलावे इस चिड़ियाघर में ज़ेबरा भी है, जिसे चहलकदमी करते हुए देखना काफी आकर्षक होता है। यहाँ जिराफ की भी अच्छी संख्या है जिन्हें मैदान में घूमते देखना काफी अच्छा लगता है. इस चिड़ियाघर में घड़ियालों की भी अच्छी संख्या है. बताया जाता है की पिछले पांच वर्षों में यहाँ घड़ियालों की संख्या 13 से 129 हो गई है।

     

    पटना का संजय गांधी जैविक उद्यान लुप्तप्राय जानवरों की श्रेणी में शामिल एक सींग वाले गैंडों का भी बसेरा बना हुआ है. यहां ऐसे दस गैंडे हैं, जिसमें से पांच नर और पांच मादा गैंडे हैं. बताया जाता है की यहाँ से अधिक सिर्फ अमरीका के कैलिफोर्निया स्थित सैन डिएगो चिड़ियाघर में ही इस प्रजाति के ग्यारह गैंडे हैं. इस चिड़ियाघर में भारतीय गैंडों के अलावा गैंडों की दूसरी प्रजातियां भी मौजूद हैं. ज़ू के पास अभी गैंडों की ‘चार ब्लड लाइन’ मौजूद है.

     

    चिड़ियागहर में मौजूद विभिन्न आकर्षणों में एक चिम्पैंजी भी है. चिंपांज़ी जिसका वैज्ञानिक नाम है पैन ट्रोग्लोडाइट्स. ऐसा मन जाता है की चिम्पांजी हमारे सबसे करीबी जीवित रिश्तेदार हैं, जो उप-सहारा अफ्रीका के मूल निवासी हैं और कांगो के जंगल में पाए जाते हैं। चिम्पांजी को एक सामाजिक प्राणी भी कहा जाता है और ऐसा माना जाता है कि मानव और चिम्पांजी का पूर्वज एक ही है। चिड़ियाघर में एक नर और एक मादा चिम्पांजी हैं जिनका नाम क्रमशः कार्तिक और सुभद्रा है। इन दोनों जानवरों को 2012 में पशु विनिमय के माध्यम से नंदनकानन चिड़ियाघर, भुवनेश्वर से लाया गया था। इस चिड़ियाघर में एक सांप घर भी है. बताया जाता है की इस सांप घर में 5 प्रजाति के 32 सांप मौजूद हैं।

     

    जानवरों के आलावा इस चिड़ियाघर में पक्षियों की भी अच्छी खासी संख्या संख्या है, जिसमें विभिन्न प्रकार और रंगों के तोता, मैना, चिल, गिद्ध आदि शामिल हैं. यह स्थान पक्षि प्रेमियों के लिए भी एक अच्छा दृश्य प्रदान करता है। इस चिड़ियाघर में बच्चों का मुख्य आकर्षण एक्वेरियम अर्थता मछली घर है जिसका उद्घाटन सन 1993 में हुआ था। मछलीघर में मछलियों की विभिन्न प्रकार के प्रजातियों को देखने का अवसर मिलता है. सफ़ेद, काला, लाल, गुलाबी, पिला विभिन्न रंगों की मछलियाँ जल में अठखेली करते हुए बच्चों को काफी आकर्षित करता है. मछली में थाई एल्बिनो मांगुर, ओरांडा गोल्डफिश, डॉलर मछली, ज़ेबरा मछली, गुलाबी बार्ब मछली जैसे अनेक प्रजातियाँ मौजूद है. बताया जाता है की एक्वेरियम में मछलियों की लगभग 35 प्रजातियां हैं. इस मछलीघर को देखने के लिए प्रवेश टिकट के अतिरिक्त अलग से टिकट लगता है. जो सामान्य प्रवेश शुल्क के बाद सबसे बड़ा राजस्व जनरेटर है।

     

    इसके अतिरिक्त पर्यटकों के आकर्षण का एक केंद्र नौकायन भी है. यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए नौका विहार की सुविधा भी उपलब्ध है। उद्यान के अंदर मौजूद तालाब के आकर का जल उद्यान में नौका की सुविधा भी उपलब्ध है. जो अतिरिक्त शुल्क पर पर्यटकों को उपलब्ध कराइ जाती है.

     

    इस चिड़ियाघर की स्थापना एक वनस्पति उद्यान के रूप में की गई थी, जिसे बाद में चिड़ियाघर में बदला गया. लेकिन अभी भी ये चिड़ियाघर अपने अंदर पेड़ों, जड़ी बूटियों और झाड़ियों की 300 से अधिक प्रजातियों को समेटे हुए है। पौधों के संरक्षण और विकास के लिए यहाँ औषधीय पौधों के लिए एक नर्सरी, एक जलीय उद्यान, एक आर्किड घर, एक फ़र्न हाउस, ग्रीन हाउस, एक ग्लास हाउस और एक गुलाब उद्यान शामिल हैं। खासकर गुलाब उद्यान तो प्रेमी जोड़ों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहता है.

     

    इस चिड़ियाघर में बच्चों के मुख्य आकर्षण के केंद्र हुआ करता था, टॉय ट्रेन. टॉय ट्रेन का ट्रैक कुछ इस तरह बिछाया गया था की ये टॉय ट्रेन चिड़ियाघर के हर एक हिस्से को कवर करता था. टॉय ट्रेन में बैठकर लोग चिड़ियाघर में पशु पक्षी और जानवरों को देखने का आनंद लिया करते थे, लेकिन पिछले कई सालों से तकनिकी कारणों से टॉय ट्रेन बंद है. हालाँकि चिड़ियाघर प्रशासन ये पहल कर रही है की उद्यान में इलेक्ट्रिक टॉय ट्रेन शुरू की जाए. आगंतुकों के लिए चिड़ियाघर प्रशासन की तरफ से यहाँ शौचालय, कैंटीन, पेयजल जैसी सार्वजनिक उपयोगिता की सुविधाओं की भी ठीकठाक व्यवस्था की गई है.

     

    अगर आप पटना जाएं तो एकबार संजय गाँधी जैविक उद्यान (Patna Zoo) घुमा जा सकता है. इसकी रोड, रेल और एयर कनेक्टिविटी बहुत अच्छी है. यह पटना शहर के प्रमुख सड़क बेली रोड पर स्थिति है. इसके आलावा पटना के जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से मात्र पंच मिनट की दुरी पर है. रेल कनेक्टिविटी की बात करें तो पटना जंक्शन से बीस मिनट तो दानापुर रेलवे स्टेशन से मात्र पंद्रह मिनट की दुरी पर है. रेलवे स्टेशन, और एअरपोर्ट से ऑटो, कैब और बस की अच्छी सुविधा है.

  • बिहार में महिला अधिकारी से लूटपाट, शिकायत पर तीन अपराधी गिरफ्तार

    बिहार में महिला अधिकारी से लूटपाट, शिकायत पर तीन अपराधी गिरफ्तार

    बिहार में अपराधियों के हौंसले इतने बढ़ गए हैं कि अधिकारियों से भी लूटपाट करने लगे हैं। रोहतास जिले में पहाड़ियों पर शरारती तत्वों ने महिला अधिकारी से मारपीट और लूटपाट की घटना को अंजाम दिया है। बताया जा रहा है कि घटना के समय महिला सीओ Goldi Kumari अपने मित्र के साथ पहाड़ी की सैर पर गई थीं। इसी दौरान लुटेरों ने उनके साथ मारपीट की और उनका मोबाइल लूट लिया। घटना के बाद महिला अधिकारी गोल्डी कुमारी ने दरिगांव थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई।

     

    मारपीट का विडियो वायरल होने के बाद सरकार के विधि व्यवस्था पर सवाल उठाने लगे. लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगी, की अगर इस शासन व्यवस्था में अधिकारी ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता कैसे सुरक्षित रहेगा। सरकार पर सख्त कार्रवाई करने और कानून व्यवस्था व शासन में जनता का विश्वास बहाल करने का दबाव बढ़ रहा है। पुलिस पर भी कार्रवाई का दबाव बनने लगा. हालांकि मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें शुभम उर्फ संदीप बिंद, पवन कुमार और जैकी गुप्ता को उनके घरों से गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

     

    सोशल मीडिया में हमले, मारपीट और लूटपाट का वीडियो वायरल होने के बाद मचे घमासान के बाद। एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर सीओ गोल्डी कुमारी (Goldi Kumari) और सारण सीओ कौशल कुमार (Kaushal Kumar), कैमूर के उसी पहाड़ी इलाके में अनुचित व्यवहार करते हुए दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि उन्होंने यह वीडियो रिकॉर्ड किया है. लोगों ने अधिकारियों पर अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया है, जिससे मामले में विवाद और बढ़ गया है।

     

    अगर इस मामले में मारपीट और लूटपाट की थ्योरी सच है तो मामला बेहद गंभीर है, एक अधिकारी ही नहीं सुरक्षित है तो आम जनता क्या सुरक्षित रहेगी। और अगर वायरल हो रहे दुसरे विडियो में जो दावा किया जा रहा है की दोनों अधिकारी अभद्र हरकत कर रहे थे, तब भी शरारती तत्वों को ये अधिकार किसने दिया की उनसे मारपीट करें? लूटपाट करें. दोनों बालिग़ हैं, अगर कहीं घुमाने गए भी है, साथ वक्त बिता भी रहे हैं तो कानून को अपने हाथ में लेने का अधिकार उनको किसने दिया? भीड़ जिस हिसाब से महिला का पीछा करते दिख रही है, कोई अनहोनी हो जाती तो कौन जिम्मेवारी लेता? दोनों ही परिस्थिति में मामला बेहद संगीन है की देश कानून के हिसाब से चलेगा की भीड़ के हिसाब से?

     

    नितीश सरकार अपनी विधि व्यवस्था और सुशासन के लिए मशहूर था। लेकिन हाल के महीनों में बिहार में अपराध की बढती घटनाओं ने विधि व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दी हैं। बढ़ते अपराध ने न सिर्फ जनता में नाराजगी बाधा दी है, बल्कि नितीश सरकार पर कानून व्यवस्था के मुद्दे पर विपक्ष के हमले भी बढ़ गए हैं। अपने सुधासन के लिए जाने जाने वाले नितीश कुमार के सामने ये चुनौती है की वो भीड़तंत्र और अपराध की तरफ बढ़ते व्यवस्था को फिर से लोकतंत्र और सुशासन की पटरी पर लाएं।

  • PM नरेंद्र मोदी ने Nalanda University के नए कैंपस का उद्घाटन किया

    PM नरेंद्र मोदी ने Nalanda University के नए कैंपस का उद्घाटन किया

    Nalanda University Campus | Narendra Modi | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने नए परिसर का उद्घाटन करते हुए भारत के इतिहास इतिहास और नालंदा विश्वविद्यालय की गौरव गाथा का जिक्र किया। नालंदा यूनिवर्सिटी से PM मोदी ने दुनिया को संदेश दिया – आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकती। नया कैंपस प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहरों से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है।

  • पटना में शिक्षक अभ्यर्थियों पर लाठी चार्ज, क्या लगातार नियम में बदलाव बहाली को लटकाने का खेल?

    पटना में शिक्षक अभ्यर्थियों पर लाठी चार्ज, क्या लगातार नियम में बदलाव बहाली को लटकाने का खेल?

    Lathi Charge on teacher aspirants in Patna : बिहार में 1.70 लाख शिक्षकों की होने वाली भर्ती में डोमिसाइल पालिसी को हटाकर, दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों को मौका देने के बाद से बिहार में बवाल मचा हुआ है। बिहार के शिक्षक अभ्यर्थी लगातार नियमावली में संशोधन का विरोध कर रहे हैं।

     

    पटना में शिक्षक बहाली में डोमिसाइल नीति लागू कराने की मांग को लेकर शिक्षक अभ्यर्थी सड़क पर उतर गए है। शनिवार की सुबह 2000 से अधिक की संख्या में अभ्यर्थी सबसे पहले गांधी मैदान में इकट्‌ठा हुए। फिर हाथों में तिरंगा लिए पैदल मार्च किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें जेपी गोलंबर के बाद रोक दिया।

     

    पुलिस के समझाने के बाद भी शिक्षक अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे थे। जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। पुलिस की लाठी चार्ज से आक्रोशित शिक्षक अभ्यर्थियों ने भी पथराव शुरू कर दिया। जिसके बाद डाक बंगला चौराहे से पुलिस ने उन्हें पटना जंक्शन तक खदेड़ा। इस लाठी चार्ज के दौरान कई अभ्यर्थी घायल हो गए, और पुलिस ने कई शिक्षक अभ्यर्थियों को हिरासत में भी लिया है, इनमें 2 महिलाएं भी शामिल हैं। सभी को कोतवाली थाना ले जाया गया है।

     

    एक तरफ शिक्षा विभाग ने प्रदर्शन को देखते हुए आदेश जारी किया है कि नई शिक्षा नियमावली का विरोध करने वालों के खिलाफ आचार संहिता के तहत कार्रवाई की जाएगी। वहीँ दूसरी तरफ प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों ने यह मांग की है कि शिक्षा मंत्री को शिक्षा विभाग से हटाकर पशुपालन विभाग दे देना चाहिए। अगर शिक्षा मंत्री को लगता है कि योग्य शिक्षक की बहाली के लिए वैकेंसी को नेशनल करना होगा। तो वह आगे कहेंगे कि वैकेंसी को इंटरनेशनल ही कर दिया जाना चाहिए। ताकि ब्रिटेन और अमेरिका के लोग भी यहां आकर शिक्षक बन सकेंगे।

     

    शिक्षा मंत्री अगर बिहार में निकलेंगे तो उन्हें योग्य अभ्यर्थी नजर आ जाएंगे। क्योंकि देश और दुनिया में हर जगह शिक्षा के क्षेत्र में बिहारियों का डंका बज रहा है। यूपीएससी और इंजीनियरिंग में बिहार के छात्र लगातार अपना परचम फहराते रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि संशोधन को समाप्त करते हुए बहाली प्रक्रिया में डोमिसाइल पॉलिसी लागू की जाए।

     

    अभ्यर्थियों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए :

    अभ्यर्थियों ने कहा की सरकार नियम तय नहीं कर पा रही है, या बहाली नहीं करना चाहती? आखिर क्या है सरकार की मंशा, क्यों लगातार नियमों में बदलाव किया जा रहा है? अभ्यर्थियों के बहाली के स्थान पर सिर्फ लगातार बदलते नियमावली का झुनझुना क्यों मिल रहा है? क्या सरकार जानबुझकर बहाली प्रक्रिया को विवादों में घसीटकर बहाली को लटकाना भटकाना चाहती है? लालू यादव के शासन काल में भी यही पैंतरा अपनाकर बिहार की शिक्षा को चौपट किया गया था, और इसी तरह के तरकीबों से शिक्षकों की बहाली बंद की गई थी।

  • बिहार के बिहटा में शराब छापेमारी के लिए गई पुलिस की महिलाओं ने घेर कर तलाशी ली

    बिहार के बिहटा में शराब छापेमारी के लिए गई पुलिस की महिलाओं ने घेर कर तलाशी ली

    बिहार में आए दिन शराब छापेमारी में पुलिस पर हमले होते रहते हैं। ताजा वीडियो बिहार के बिहटा के एक महादलित बस्ती की बताई जा रही है, जहां पुलिस अवैध शराब पर छापेमारी के लिए गई थी।

     

    बस्ती की महिलाओं ने चारों तरफ से पुलिस को घेर लिया, और चोरी का आरोप लगाकर न सिर्फ तलाशी ली, बल्कि मारपीट भी किया। बिहार में लाइसेंस वाला शराब तो बंद है, लेकिन गांव गांव, बस्ती बस्ती और टोले टोले अवैध और नकली शराब बन रही है और बिक रही है। कारण से सभी बिहार वासी परिचित है, बस प्रशासन लाचार है।

     

    अक्सर पुलिस के पीटने का वीडियो सामने आता रहता है, उसका कारण भी सब जानते हैं। अब भले लोग नकली जहरीली शराब से मरें, अवैध शराब का कारोबार माफिया का रूप ले ले, पुलिस लाचार हो जाए, लेकिन सत्ता के कान बंद ही रहेंगे। : Ganga News

  • Pawapuri : पावापुरी सिर्फ एक प्राचीन भारतीय सांस्कृतिक तीर्थ स्थल

    Pawapuri : पावापुरी सिर्फ एक प्राचीन भारतीय सांस्कृतिक तीर्थ स्थल

    पावापुरी, भारत के बिहार राज्य के नालंदा ज़िले जिले में राजगीर और बोधगया के समीप स्थित एक शहर है। यह जैन धर्म के अनुयायियों के लिये एक अत्यंत पवित्र शहर है क्यूंकि माना जाता है कि भगवान महावीर को यहीं मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। यहाँ के जलमंदिर की शोभा देखते ही बनती है। संपूर्ण शहर कैमूर की पहाड़ी पर बसा हुआ है। इस लेख मे हम पावापुरी का इतिहास, पावापुरी जैन तीर्थ हिस्ट्री, पावापुरी के प्रमुख जैन मंदिर आदि के बारें में विस्तार से जानेंगे।

     

    माना जाता है की जिस स्थान पर भगवान् महावीर का अंतिम संस्कार किया गया था उस पवित्र स्थान की भस्म व मिट्टी को उठाते-उठाते वहां एक विशाल सरोवर का निर्माण हो गया जिसमे कमल के फूल खिलने लगे इसी वजह से इस सरोवर को कमल सरोवर के नाम से जाना जाता है। आज के समय में इस सरोवर की लम्बाई 1451 फिट व चौड़ाई 1223 फिट है। कहा जाता है की यहाँ एक मंदिर का निर्माण राजा नंदिवर्धन के द्वारा कराया गया जिसमे भगवान् महावीर की चरण पादुका की स्थापना की गई जो इस कमल सरोवर के मध्य स्थित है। इस मंदिर के दायीं तरफ गौतम के गणधर तथा बायीं तरफ सुधर्मा के गणधर के चरण स्थापित है। इस मंदिर में प्रतिवर्ष कार्तिक अमावस्या के दिन निर्वाण लड्डू चढ़ाने की परंपरा है इसी दिन भगवान महावीर का निर्वाण हुआ था।

     

    दीपावली पर भारत के कोने कोने से जैन धर्म के मानने वाले लोग पावापुरी की यात्रा करते है। क्योंकि दीपावली का त्यौहार यहां महावीर स्वामी के परिनिर्वाण की याद में मनाया जाता है। हर साल दीपावली के मौके पर भगवान महावीर की विशेष पूजा की जाती है। इसमें भाग लेने के लिए कई देशों के श्वेताम्बर व दिगंबर जैन श्रद्धालु आते हैं। कार्तिक अमावस्या की मध्य रात्रि में भगवान महावीर का निर्वाण हुआ था। इसी उपलक्ष्य में हर साल दीपोत्सव पर यहां जैन श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है। इस अवसर पर खास यह होता है कि जलमंदिर (अग्नि संस्कार भूमि) में लड्डू चढ़ाने के लिए श्वेताम्बर व दिगंबर श्रद्धालुओं के बीच अलग-अलग बोली लगती है। दोनों संप्रदायों में अलग-अलग जो ज्यादा बोली लगाते हैं उन्हें सबसे पहले निर्वाण लड्डू चढ़ाने का मौका मिलता है।

     

    13वीं शती ई॰ में जिनप्रभसूरीजी ने अपने ग्रंथ विविध तीर्थ कल्प रूप में इसका प्राचीन नाम अपापा बताया है। पावापुरी का अभिज्ञान बिहार शरीफ रेलवे स्टेशन से 9 मील पर स्थित पावा नामक स्थान से किया गया है। यह स्थान राजगृह से दस मील दूर है। भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण का सूचक एक स्तूप अभी तक यहाँ खंडहर के रूप में स्थित है। स्तूप से प्राप्त ईटें राजगृह के खंडहरों की ईंटों से मिलती-जुलती हैं। जिससे दोनों स्थानों की समकालीनता सिद्ध होती है।

     

    आइए जानते हैं पावापुरी के प्राचीन मंदिरों के बारे में –

    जल मंदिर पावापुरी (Jal temple pawapuri) – यह मंदिर यहां का मुख्य मंदिर है। यहां पर भगवान महावीर स्वामी का दाह संस्कार हुआ था। माना जाता है कि भगवान महावीर स्वामी जी का पुरा शरीर कपूर बनकर उड़ गया था। केवल बाल और नाखून का ही अग्नि संस्कार किया गया था। कहते है कि महावीर स्वामी जी के दाह संस्कार में इतने लोग एकत्रित हुए कि राख उठाते उठाते मिट्टी उठाने लगे। इससे एक छोटे तालाब का रूप बन गया। जिसकों बाद मे बड़ा तालाब का रूप दे दिया गया जो अब 85 बीघे में है। और इसके बीच कमल सरोवर पर एक भव्य मंदिर बनाया गया जो जल मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

     

    श्वेताम्बर जैन मंदिर (Swetamber jain template) – भगवान महावीर स्वामी की इस स्थान पर मृत्यु हुई थी। यहां से भगवान महावीर स्वामी के पार्थिव शरीर को दाह संस्कार के लिए जल मंदिर वाले स्थान पर लाया गया था।

     

    समोसरन मंदिर (Samosaran temple) – भगवान महावीर स्वामी इस स्थान पर उदेश दिया करते थे। उन्होंने इसी स्थान पर प्रथम और अंतिम उपदेश दिया था। अंतिम उपदेश देकर वे यहां से श्वेतांबर जैन मंदिर वाले स्थान पर चले गए थे। जहां उनका देहांत हो गया था।

     

    दिग्म्बर जैन मंदिर (Digambar jain temple) – इस मंदिर के स्थान पर भगवान महावीर स्वामी जी ध्यान करते थे।

     

    दादा गुरूदेव का मंदिर (Dada gurudev temple) – इस मंदिर को दादा बाड़ी मंदिर भी कहते है। यहाँ पर भगवान महावीर स्वामी जी के बाताए गए रास्ते पर चलने वाले गुरूओं का मंदिर है। इस मंदिर में भगवान महावीर स्वामी के प्रथम गणधर, पंचम गणधर श्री सुधर्मा स्वामी तथा भगवान वर्द्धमान तीर्थंकर की मूर्तियां है। यह मंदिर श्री जैन श्वेताम्बर समोसरन मंदिर के निकट है। दोनों मंदिर एक ही जगह में है। यह भगवान महावीर स्वामी जी का आराधना मंदिर भी है।

     

    पहुँचाने के रास्ते –

    सड़क मार्ग – पटना, राजगीर, गया या बिहार के किसी भी शहर से सड़क मार्ग से जुड़ा है, टैक्सी या बस से पावापुरी घुमने आया जा सकता है। रेलमार्ग – पावापुरी बिहार शरीफ रेलवे स्टेशन से लगभग 25 किमी, नालंदा से लगभग 24 किमी तथा राजगीर से 37 किमी की दूरी पर स्थित है, लेकिन निकटतम सुविधाजनक रेलवे स्टेशन पटना में है जो 90 किमी की दूरी पर स्थित है। वायुमार्ग – वैसे तो गया में एक हवाई अड्डा है, लेकिन निकटतम सुविधाजनक हवाई अड्डा पटना है जो लगभग 101 किमी पर है। भारतीय एयरलाइंस पटना को कलकत्ता, बॉम्बे, दिल्ली, रांची और लखनऊ से जोड़ती है।

  • Barabar : बराबर की सप्त गुफाएं, महाभारत कालीन प्राचीन सिद्धेश्वर नाथ मंदिर

    Barabar : बराबर की सप्त गुफाएं, महाभारत कालीन प्राचीन सिद्धेश्वर नाथ मंदिर

    बराबर ( बाणावर ) भारत के बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। ये दो वजहों से प्रसिद्द है, एक तो महाभारत कालीन प्राचीनतम शिवमंदिरों में एक बाबा सिद्धेश्वर नाथ मंदिर के लिए, और दूसरा बराबर की गुफाओं के लिए, जो चट्टानों को काटकर बनाया गया भारत के प्राचीनतम गुफाओं में से एक है। जिनमें से ज्यादातर का संबंध मौर्य काल से है और कुछ में अशोक के समय के शिलालेखों को देखा जा सकता है। ये गुफाएं भारत के बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में गया से 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।

     

    बाणावर की गुफाओं में बराबर की चार गुफाएं और नागार्जुनी तीन गुफाएं जुड़वां पहाड़ियों में स्थित हैं, जिसे सातघर या सतघरवा भी कहा जाता है। पहाड़ों को सावधानी से काट कर हजारों साल पहले इंसान ने इन बेहद सुंदर गुफाओं को बनाया है। बराबर में ज्यादातर गुफाएं दो कक्षों की बनी हैं जिन्हें पूरी तरह से ग्रेनाईट को तराशकर बनाया गया है, जिनमें एक उच्च-स्तरीय पॉलिश युक्त आतंरिक सतह और गूंज का रोमांचक प्रभाव मौजूद है। इस स्थान पर चट्टानों से निर्मित कई बौद्ध और हिंदू मूर्तियां भी पायी गयी हैं। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार पर्वत पर बनी गुफाएं प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों के ध्यान साधना लगाने हेतु सुरक्षा के दृष्टिकोण से बनाई गई थी।

     

    जब इन गुफाओं की दीवारों को देखते हैं, तो लगता है जैसे उन्हें अभी पॉलिश किया गया हो। यह पॉलिश एकदम नयी सी लगती है। इनमें से कई गुफाओं की दीवारों को देखकर आप तब दंग रह जाएंगे जब पाएंगे कि उनकी चिकनाई आज के समय में लगाई जाने वाली टाइल्स से कम नहीं हैं। इसे देखकर यह मानना मुश्किल हो जाता है कि, ये गुफाएँ 2400 साल से ज्यादा पुरानी हैं। मौर्य काल की यह स्थापत्य कला पर्यटकों को आश्चर्य से भर देती है। इन गुफाओं के कारीगरों ने इतनी बड़ी चट्टान को काटकर, उसे तराशकर इतना अच्छा और सुंदर गुबंद न जाने कैसे बनाया होगा, ये अपने आप में एक आश्चर्य जैसा लगता है। बारबर पहाड़ में अवस्थित इन गुफाओं को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है।

     

    बराबर की चार गुफाएँ –

    बराबर पहाड़ी में चार गुफाएं शामिल हैं – कर्ण चौपड़, लोमस ऋषि की गुफा, सुदामा गुफा और विश्व झोपड़ी। सुदामा और लोमस ऋषि गुफाएँ भारत में चट्टानों को काटकर बनायीं जाने वाली गुफाओं की वास्तुकला के सबसे आरंभिक उदाहरण हैं, जिनमें मौर्य काल में निर्मित वास्तुकला संबंधी विवरण मौजूद हैं और बाद की सदियों में यह महाराष्ट्र में पाए जाने वाले अजंता और कार्ला की गुफाओं में चलन के रूप में दीखता है। इसने चट्टानों को काटकर बनायी गयी दक्षिण एशियाई वास्तुकला की परंपराओं को भी काफी हद तक प्रभावित किया है।

    लोमस ऋषि की गुफा – इस गुफा का निर्माण अशोक ने करवाया था। लोमस ऋषि की गुफा एकमात्र ऐसी गुफा है जिसके प्रवेश द्वार पर उत्कीर्णन का काम किया हुआ है। इसके प्रवेश द्वार पर बने मेहराब पर ऐसे दो अर्धवृत्त हैं, जिनमें से ऊपरी अर्धवृत्त पर जाली का काम किया गया तो निचले अर्धवृत्त पर हाथियों की पंक्ति उत्कीर्णित है। मेहराब की तरह के आकार वाली ये लोमस ऋषि गुफा, लकड़ी की समकालीन वास्तुकला से प्रेरित है। इन गुफाओं का निर्माण, इसकी उच्च स्तरीय पॉलिश और बारीक उत्कीर्णन उस समय के भारतीय कारीगरों के उत्कृष्ट कलाकारी एवं वास्तु विशेषज्ञता का एक अद्भुत नमूना है। यहां कई गुफाओं के अंदर भी गुफाएं है जहां तक पहुंचना काफी मुश्किल है।

    सुदामा गुफा – इस गुफा का निर्माण मौर्य सम्राट अशोक द्वारा अपने राज्याभिषेक के बारहवें वर्ष में आजीवक साधुओं के लिए करवाई गयी थी और इसमें एक आयताकार मण्डप के साथ वृत्तीय मेहराबदार कक्ष बना हुआ है।

    कर्ण चौपड़ – इस गुफा का निर्माण अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 19वें वर्ष में कराया था। यह पॉलिश युक्त सतहों के साथ एक एकल आयताकार कमरे के रूप में बना हुआ है जिसमें उस समय के शिलालेख मौजूद है। शिलालेखों के अनुसार इस पहाड़ी को सलाटिका के नाम से भी जाना जाता था। कर्ण चौपड़ गुफा को सुप्रिया गुफा भी कहा जाता था।

    विश्व झोपड़ी – इसमें दो आयताकार कमरे मौजूद हैं जहां चट्टानों में काटकर बनाई गई अशोका सीढियों द्वारा पहुंचा जा सकता है।

     

    नागार्जुनी तीन गुफाएं –

    नागार्जुन के आसपास की गुफाएं बराबर गुफाओं से छोटी एवं नयी हैं। यह गुफाएं बराबर की गुफाओं से थोड़ी दूरी पर स्थित नागार्जुनी पहाड़ी पर स्थित हैं। इनमें तीन गुफाएं शामिल हैं –

    गोपी का गुफा – ये गुफा मौर्यवंशी राजा दशरथ द्वारा आजीविका संप्रदाय के अनुयायियों को समर्पित किया गया था।

    वदिथीका गुफा – यह दरार में स्थित है।

    वापिक गुफा – इसका निर्माण भी मौर्यकालीन माना जाता है। पहाड़ के ऐतिहासिक सप्त गुफाओं में बनी वापिक गुफा में अंकित तथ्यों से ज्ञात होता है कि इसकी स्थापना योगानंद नामक ब्राह्मण ने की थी। इन्हें दशरथ द्वारा आजीविका के अनुयायियों को समर्पित किया गया था।

     

    बराबर और नागार्जुन की गुफाओं की बारे में कुछ प्रचलित जानकारियां –

    • सात गुफ़ाओं में से तीन में अशोक के अभिलेख अंकित हैं।
    • ब्राह्मी लिपि में लिखे अभिलेख इतिहास का जीवंत प्रमाण हैं।
    • नागार्जुन पहाड़ी की तीनों गुफ़ाओं में दशरथ के अभिलेख अंकित हैं।
    • इन गुफ़ाओं में परिवर्ती काल के कुछ अन्य अभिलेख भी हैं।
    • मौर्य काल की बराबर गुफ़ाएँ देश की सबसे पुरानी पत्थरों से काटी गई गुफ़ाएँ हैं।
    • ये गुफ़ाएँ पत्थरों की कटाई वाली वास्तुकला के शानदार उदाहरण हैं।
    • अशोक की प्रमुख गुफ़ाएँ हैं- ‘कर्ण चौपड़’, ‘विश्व झोपड़ी’ और ‘सुदामा गुफ़ा’।
    • दशरथ की गुफ़ाओं में लोमश ऋषि की गुफ़ा तथा गोपिका गुफ़ा उल्लेखनीय है।
    • बराबर पर्वत को मगध का हिमालय भी कहा जाता है।

     

    पातालगंगा तथा अन्य स्पॉट –

    गुफाओं की तरफ बढ़ने से पहले निचे ही पातालगंगा है, जिसका आकार एक छोटे कुंड जैसा है, जो पत्थरों के बिच है। जिसमें बाबा सिद्धेश्वर नाथ के दर्शन करने जाने से पहले श्रद्धालु स्नान करके ही आगे जाना पसंद करते हैं। जहाँ से आगे बढ़ने पर रास्ते में उन्हें प्राचीन सतघरवा गुफाएँ भी मिलती है। फिर थोड़ा आगे बढ़ने पर एक बढ़ा सा तालाब है, जिसमें लोग बोट चलाने का आनंद उठा सकते हैं।

     

    यहां पर एक छोटा सा संग्रहालय भी है, जिसमें इतिहास के विभिन्न पहलुओं को देखा जा सकता है। श्रद्धालु सीढियों से चढ़कर पहाड़ी के ऊपर पहुंचते हैं। ऊपर बाबा सिद्धेश्वर नाथ का मंदिर है, जहाँ पहुँचने के बाद प्रकृति का अद्भुत नजारा दीखता है। आस-पास बिखरी हरियाली प्रकृति के करीब होने का एहसास कराती है। छोटे-बड़े पत्थर कुछ इस तरह से एक दूसरे पर रखे हैं जिसे देखकर लगता है कि प्रकृति ने बड़े ही फुर्सत में इन्हें कलाकृतियों के रूप में सजाया है।

     

    देश का प्राचीन शिव मंदिर बाबा सिद्धेश्वर नाथ –

    सिद्धेश्वर नाथ मंदिर, बराबर पहाड़ियों की सीमा में सबसे ऊंची चोटियों में से एक में स्थित है, जहाँ तक जाने के लिए सीढीयां बनी हुई है। वैसे तो पूरे देश में अनेकों प्राचीन शिव मंदिर हैं, परन्तु जब बात प्राचीनतम शिव मंदिर की हो तो मगध के बराबर पहाड़ पर स्थित सिद्धेश्वर नाथ महादेव मंदिर का नाम सर्वप्रथम आता है। इसे सिद्धनाथ तीर्थ के रूप में भी जाना जाता है। बाबा सिद्धेश्वरनाथ को नौ स्वयंभू नाथों में प्रथम कहा जाता है। इनकी पूजन कथा शिवभक्त वाणासुर से संबंधित होने के कारण इसे ‘वाणेश्वर महादेव भी कहा जाता है।

     

    स्थानीय किंवदंतियों में मंदिर के निर्माण का श्रेय बाना राजा (जारसंध का ससुर) को दिया जाता है। लेकिन मंदिर का गुप्त काल के दौरान बनाया (जीर्णोद्धार किया) जाना भी माना जाता है। लेकिन इस स्थान का नाम ‘बाणावर’ होना इसे अपने आप में बाणासुर अर्थात महाभारत काल से जोड़ता है, तथा इसे महाभारत कालीन जीवंत कृतियों में से एक रूप में मान्यता प्रदान करता है। वैसे तो हजारों साल पुराने इस शिव मंदिर में जल चढ़ाने के लिए वर्षभर श्रद्धालु आते हैं लेकिन सावन और शिवरात्रि में तो यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। इसके अलावा यहां पर लगभग एक महीने के लिए मेले का भी आयोजन होता है, जिसमें भी भक्तों की बहुत भीड़ होती है।

     

    बराबर घुमने का प्लान बनाएँ –

    बराबर श्रद्धालुओं, पिकनिक प्रेमियों, पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए एक जबर्दस्त कॉम्बो पैक है। सिद्धेश्वर नाथ मंदिर की वजह से बराबर एक धार्मिक क्षेत्र तो है ही, अपनी प्राकृतिक छटा की वजह से एक पिकनिक स्पॉट भी है, अक्सर पर्यटक यहां पिकनिक मनाने आते है। इसके साथ ही गुफाओं, अभिलेखों और प्राचीनतम ऐतिहासिक साक्ष्यों तथा कलाकृतियों की मौजूदगी की वजह से यह एक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल भी है, इतिहास और सभ्यतों के साक्ष्य तलासने वाले लोग भी यहाँ आते रहते हैं।

     

    वैसे तो आमतौर पर यहां सालों भर शिव भक्तगण व पर्यटक आते रहते हैं, लेकिन श्रावण मास, बसंत पंचमी एवं  महाशिवरात्री अनंत चतुदर्शी में भक्तों व पर्यटकों का आगमन बड़ी संख्या में होता है। मौसम को देखते हुए बराबर घुमने का सबसे उत्तम समय अक्टूबर से लेकर मार्च तक माना जाता है। यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन की ओर से कई इंतजाम किए गए हैं, सुरक्षा के लिए पुलिस रहती है, वहीं खान-पान और ठहरने की सुविधा भी आसानी से मिल जाती है। अगर अपने व्यस्त जिंदगी से खुद के लिए फुर्सत के दो पल निकालकर जीना चाहते हैं तो अपने परिवार के साथ बराबर की यात्रा का प्लान अवश्य बनाइए, आपको जरुर आनंद और ताजगी महसूस होगी।

     

    बराबर ( बाणावर ) पहुँचाने के रास्ते –

    बराबर के सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन बाणावर हाल्ट है, जो पटना गया रेलखंड पर है। ट्रेन के द्वारा पटना से बराबर जाने में दो से ढाई घंटे का समय लगता है, जबकि गया से बराबर जाने में एक से सवा घंटे का समय लगता है। यह पटना, गया, नालंदा और अरवल से सड़क के माध्यम से भी जुड़ा हुआ है। खासकर यह पटना-गया रोड से अच्छी तरह से जुड़ा है। पटना गया रोड से दो जगहों से बराबर जाने का रास्ता जुड़ता है, एक मखदुमपुर के पास बाणावर द्वार से रास्ता जाता है और दूसरा बेला के पास से बराबर के लिए रास्ता जाता है। निकटतम हवाई अड्डा पटना एवं गया का हवाई अड्डा (Airport) है।

     

    बराबर के आसपास के प्रमुख पर्यटक स्थल – बोध गया – महाबोधि मंदिर, गया – विष्णुपद मंदिर, नालंदा- नालंदा विश्वविद्यालय, राजगृह – सप्त कुंड, बौद्ध स्तूप, जरासंध का अखाड़ा।

  • शादी मेरी मर्जी के खिलाफ, मेरा फैसला अडिग, अब और घुट घुट कर नहीं जी सकता: तेजप्रताप

    शादी मेरी मर्जी के खिलाफ, मेरा फैसला अडिग, अब और घुट घुट कर नहीं जी सकता: तेजप्रताप

    राजद प्रमुख लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने शनिवार को कहा, ‘‘ऐश्वर्या से शादी मेरी मर्जी के खिलाफ हुई थी। मुझे ऐश्वर्या के साथ रहना मंजूर नहीं है! इस मामले में कोई कुछ भी कहे, मेरा फैसला अडिग रहेगा! ऐश्वर्या के साथ किसी मामले में मेरा मेल नहीं खाता! उसने कहा था कि तुम तलाक क्यों नहीं दे देते! इस बारे में मम्मी-पापा से बात करो! वह हाई सोसाइटी की है, उसने दिल्ली में पढ़ाई की, जबकि मैं तो बीएन कॉलेज जाता था!

     

    तेजप्रताप ने कहा, ‘‘मैं तो शादी ही नहीं करना चाहता था! मैं धार्मिक आदमी हूं, मंदिर जाता हूं! मम्मी-पापा ने मुझे फंसा दिया, वे कहते थे कि शादी कर लो, नहीं तो यह हो जाएगा, वह हो जाएगा! मैंने घरवालों कहने पर शादी की, लेकिन अब घुट-घुटकर नहीं जी सकता!’’

     

    शुक्रवार को ऐश्वर्या से तलाक की अर्जी देने के बाद Tejpratap Yadav शनिवार दोपहर रांची पहुंचे! उन्होंने राजेंद्र इंस्टिटयूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में अपने पिता से मुलाकात की! बाहर निकलने के बाद तेजप्रताप ने कहा कि परिवार के साथ बैठकर बात होगी! इसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई! तेजप्रताप रांची के जिस होटल में ठहरे हैं, वहां देर शाम डॉक्टरों की टीम इलाज के लिए पहुंची!

     

    जेल प्रशासन हर शनिवार घरवालों को लालू से मिलने की अनुमति देता है! ऐश्वर्या और तेजप्रताप के तलाक की अर्जी की खबरों से लालू भी तनाव में रहे। शुक्रवार को लालू प्रसाद की शुगर 180 हो गई। वहीं, बीपी 140/90 था! डॉक्टरों का मानना है कि तनाव की वजह से ऐसा हुआ है! पत्नी ऐश्वर्या से तलाक की अर्जी की खबरों के बाद शुक्रवार देर शाम तेजप्रताप पिता लालू से मिलने रांची रवाना हो गए थे, लेकिन थोड़ी देर बाद पटना लौट गए! हालांकि, देर रात वे दोबारा रांची चले गए और रात के वक्त गया में रुके!

     

    शादी के 175 वें दिन तेजप्रताप ने पटना सिविल कोर्ट स्थित परिवार न्यायालय में तलाक की अर्जी दाखिल की! Aishwarya Rai के साथ नहीं रहना चाहते हैं! हम दोनों में तालमेल नहीं है, ऐसे में कोर्ट तलाक की अनुमति दे! मैं घुट-घुट कर नहीं जी सकता! इस पर 29 नवंबर को सुनवाई होगी!

     

    हालाँकि एक अख़बार में छपे खबर के मुताबिक क़ानूनी विशषज्ञों का कहना है की तलाक की यह अर्जी कानूनी रूप से वैध नहीं है! नई व्यवस्था में शादी के एक वर्ष के पहले तलाक की अर्जी दी ही नहीं जा सकती! विशेष परिस्थिति में ऐसी अर्जी दाखिल करने के पहले, हाईकोर्ट की इजाजत जरूरी है! फैमिली कोर्ट अपने सामने आए ऐसे मामले में पूरा प्रयास करता है कि किसी भी हाल में शादी न टूटे!

  • जदयू भाजपा में बराबर सीटों पर सहमती बनी, बाकि सहयोगियों की प्रतिक्रिया बाकि

    जदयू भाजपा में बराबर सीटों पर सहमती बनी, बाकि सहयोगियों की प्रतिक्रिया बाकि

    बिहार में Loksabha Chunav 2019 के लिए बीजेपी और जेडीयू में सीटों के बंटवारे पर सहमति बन गई है! दोनों ही पार्टियां आने वाले चुनाव में बराबर की सीटों पर चुनाव लड़ेंगी! शुक्रवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने स्वंय मीडिया के सामने इसका ऐलान किया!

     

    बीजेपी अध्यक्ष Amit Shah ने कहा, JDU और BJP दोनों ही राज्य में समान सीटों पर चुनाव लड़ेगी और बाकि जो भी हमारे सहयोगी दल हैं, उन्हें भी सम्मानजनक सीटें दी जाएंगी! NDA के घटक दलों जैसे RLSP और LJP की सीटें कम होने की सवाल पर अमित शाह ने कहा, रामविलास जी और उपेंद्र कुशवाह जी हमारे साथ हैं, गठबंधन में नए साथी जुड़ने के बाद सभी दलों की सीटें कम होगी! सीएम Nitish Kumar ने कहा, सीटों के बंटवारे के साथ- साथ सारी बातेें हो चुकी है, दो तीन दिन में संख्या का भी ऐलान कर दिया जाएगा!

     

    बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं. साल 2014 लोकसभा चुनाव में जेडीयू बीजेपी से अलग चुनाव लड़ी थी और बीजेपी राज्य में एनडीए का सबसे बड़ा घटक दल रहा था! अकेले बीजेपी के खाते में 22 सीटें गईं थीं! वहीं, आरजेडी 4, लोजपा 6, आरएलएसपी 3, जेडीयू 2, कांग्रेस 2 और एनसीपी को एक सीट जीतने में सफलता मिली थी! अगर हम एनडीए की बात करें तो 31 सीटें जीतने में सफल रही थी! एनडीए में बीजेपी के साथ उपेंद्र कुशवाह की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के बीच सीटों का बंटवारा हुआ था! पासवान ने 7 सीटों पर चुनाव लड़ा था और रालोसपा ने 3 सीटों पर चुनाव लड़ा था! यानि 30 सीटों पर बीजेपी ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे! लेकिन इस बार नीतीश कुमार के एनडीए में आने के बाद से रालोसपा और एलजेपी के बीच सीट बंटवारे को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई थी!

     

    जदयू से तो सीटों पर बात तय हो गयी है लेकिन अभी तक इस पर अन्य सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है की क्या वो कम सीटों के साथ भी एनडीए में बने रहना पसंद करेंगे या फिर अपना कोई अलग रास्ता चुनेंगे, क्योंकि कुछ दिन पहले ही बिहार में LJP के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने प्रेशर पॉलिटिक्स के तहत बयान दिया था की हमें सात से कम सीटें मंजूर नहीं है, हम पहले भी सात सीटों पर चुनाव लड़े थे और इस बार भी सात सीटों की मांग करेंगे, पार्टी की लोकप्रियता पहले से काफी बढ़ी है, और इस कारण लोजपा को Loksabha Election 2019 में झारखंड और उत्तर प्रदेश में भी सीटें चाहिए!

     

    उधर उपेन्द्र कुशवाहा भी बिच बिच में विद्रोही स्वर दिखाते रहते हैं! कभी तेजस्वी के गुण गाते हैं तो कभी मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हैं! क्या वो कम सीटों के साथ गठबंधन में बने रहना पसंद करेंगे! वैसे उपेन्द्र कुशवाहा की नितीश कुमार से बहुत पुरानी दुश्मनी है! पहले वो नितीश कुमार की पार्टी में ही थे और उनसे खटपट होने के बाद अपनी अलग पार्टी बनाई थी! फिर नितीश के NDA में वापस आने के बाद से ही उनका स्वर विद्रोही हो रहा है!

     

    हालाँकि इस बात में कोई भी जमीनी सच्चाई नहीं है की LJP की लोकप्रियता बढ़ी या घटी है, उसके कुछ अपने खास वोटर्स हैं और पार्टी बस उसी वर्ग के वोटरों तक सिमित है! और रही बात उपेन्द्र कुशवाहा की तो उनके पास अपना कोई बड़ा जनाधार नहीं है और बीजेपी के वोटों के सहारे ही चुनाव जीतें है! इसलिए विद्रोह की ज्यादा सम्भावना तो नहीं लेकिन प्रेशर politics के तहत कुछ खींचातानी वाले बयान जरुर आ सकते हैं!